बेंगलुरु के रहने वाले चेतन एम. गौड़ा किसी मिसाल से कम नहीं हैं. 16 साल की उम्र में ब्लड बैंक खोल कर वे मानवता की मिसाल कायम कर रहे हैं. जिस उम्र में बच्चे पढ़ाई करते हैं, खेलते-कुदते हैं, उस उम्र में चेतन लोगों को मरने से बचा रहे हैं. आइए, उनके बारे में जानते हैं.

Source: b'Source- Topyaps'

बात मई 2016 की है, जब चेतन के शिक्षक की मौत समय पर ख़ून नहीं मिलने के कारण हुई थी. इस बात से चेतन को काफ़ी तकलीफ़ हुई. उसी समय उसने निर्णय लिया कि अब किसी की मौत ख़ून की कमी के कारण नहीं होगी. अपने दोस्तों के सहयोग से उन्होंने एक ब्लड बैंक खोला, जो आपातकाल में ज़रुरतमंदों को ख़ून देता है.

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दरअसल, यह एक एनजीओ है, जो लोगों के लिए काम करता है. इस एनजीओ की मदद से आप ख़ून ले भी सकते है और डोनेट भी कर सकते हैं. इसके खोलने के पीछे एक ही संदेश है 'किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं होगी.'

Bangalore Mirror को दिए इंटरव्यू में चेतन कहते हैं, 'हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं, जिनकी मौत समय पर ख़ून नहीं मिलने के कारण होती है. हमारी कोशिश लोगों को समय पर ख़ून पहुंचाने की है.'

चेतन ने अपने एनजीओ का नाम 'ख़ून' रखा है, जो लोगों की मदद के लिए 24 घंटे उपलब्ध है. इतना ही नहीं, सरकार ने ख़ून दान करने वाले के लिए जो कीमत तय की है, उसी कीमत पर आप यहां अपना ख़ून डोनेट कर सकते हैं.

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450 ml. ख़ून की कीमत 500 रुपये से 2000 रुपये के बीच है. इस संस्था में 250 रजिस्टर्ड सदस्य हैं. 'ख़ून' सभी संस्थाओं के लिए भी खुला है. सरकारी अस्पताल, प्राइवेट अस्पताल, रेड क्रॉस सोसायटी और आम लोगों को भी ख़ून देता है.

अपनी परेशानियों के बारे में बताते हैं कि लोग ख़ून देने के लिए बहुत मुश्किल से तैयार होते हैं. इसके लिए कई प्रक्रियाएं होती हैं. शुरुआत में लोग ब्लड डोनेशन को गंभीरता से नहीं लेते हैं, मगर समझाने के बाद कुछ लोग समझ भी जाते हैं.

सरकारी आंकड़ों की बात करें, तो देश में 13 प्रतिशत लोगों की मौत समय पर ख़ून नहीं मिलने के कारण होती है. ऐसे में चेतन पूरे देश को एक नई ज़िंदगी देने की कोशिश कर रहे हैं. सलाम है इनकी सोच को.