Female Genital Mutilation या ख़तना एक ऐसी प्रथा है, जिसका एकमात्र उद्देश्य महिलाओं की Sexual Freedom पर पाबंदी लगाना है. Female Genital Mutilation से हर साल बहुत सी महिलाओं और बच्चियों की मौत हो जाती है. जो लड़कियां बच भी जाती हैं, इस प्रथा से जुड़ी दर्दनाक यादें ताउम्र उनके साथ रहती है. ख़तना से न सिर्फ़ महिलाओं को मानसिक क्षति पहुंचती है, बल्कि उनको शारीरिक नुकसान भी होता है. विश्व के कई समुदायों में इस प्रथा का पालन किया जाता है.इस कुप्रथा को रोकने के लिए एक महिला सालों से संघर्ष कर रही है. मासूमा रानाल्वी ने देश के प्रधानमंत्री के नाम एक खुला ख़त लिखकर इस कुप्रथा को रोकने की मांग की है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी,
स्वतंत्रता दिवस पर आपने मुस्लिम महिलाओं के दुखों और कष्टों पर बात की थी. ट्रिपल तलाक को आपने Anti-Women कहा था, सुनकर बहुत अच्छा लगा था.
हम औरतों को तब तक पूरी आज़ादी नहीं मिल सकती जब तक हमारा बलात्कार होता रहेगा, हमें संस्कृति, परंपरा और धर्म के नाम पर प्रताड़ित किया जाता रहेगा. हमारा संविधान सभी को समान अधिकार देने की बात करता है, पर असल में जब भी किसी बच्ची को गर्भ में मारा जाता है, जब भी किसी बहु को दहेज के नाम पर जलाया जाता है, जब भी किसी बच्ची की जबरन शादी करवा दी जाती है, जब भी किसी लड़की के साथ छेड़खानी होती है या उसके साथ बलात्कार किया जाता है, हर बार इस समानता के अधिकार का हनन किया जाता है.
ट्रिपल तलाक अन्याय है, पर इस देश की औरतों की सिर्फ़ यही एक समस्या नहीं है. मैं आपको Female Genital Mutilation के बारे में बताना चाहती हूं, जो छोटी बच्चियों के साथ किया जाता है. जो बच्चियां अपने शरीर से जुड़े निर्णय नहीं ले सकती, उन्हें इस अमानवीय प्रथा का शिकार बनना पड़ता है. इन बच्चियों के शरीर को जो नुकसान पहुंचता है, उसे किसी भी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता. इस प्रथा के खिलाफ़ पूरी दुनिया में आवाज़ उठाई जा रही है.
मैं इस ख़त के द्वारा आपका ध्यान इस भयानक प्रथा की तरफ़ खींचना चाहती हूं. बोहरा समुदाय में सालों से 'ख़तना' या 'ख़फ्ज़' प्रथा का पालन किया जा रहा है. बोहरा, शिया मुस्लिम हैं, जिनकी संख्या लगभग 2 मिलियन है और ये महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बसे हैं.
मैं बताती हूं कि मेरे समुदाय में आज भी छोटी बच्चियों के साथ क्या होता है. जैसे ही कोई बच्ची 7 साल की हो जाती है, उसकी मां या दादीमां उसे एक दाई या लोकल डॉक्टर के पास ले जाती हैं. बच्ची को ये नहीं बताया जाता कि उसे कहां ले जाया जा रहा है या उसके साथ क्या होने वाला है. दाई या आया या वो डॉक्टर उसके Clitoris को काट देते हैं. इस प्रथा का दर्द ताउम्र के लिए उस बच्ची के साथ रह जाता है.
इस प्रथा का एकमात्र उद्देश्य है, बच्ची या महिला के Sexual Desires को दबाना.
WHO के अनुसार,
'FGM महिलाओं और लड़कियों के मानवाधिकार का हनन है. महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव का ये सबसे बड़ा उदाहरण है. बच्चों के साथ ये अकसर होता है और ये उनके अधिकारों का भी हनन है. इस प्रथा से व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है.'
सैंकड़ों सालों से इस प्रथा का शांति से पालन किया जा रहा है और बोहरा समुदाय के बाहर बहुत कम लोग ही इस प्रथा के बारे में जानते होंगे. 2015 में बोहरा समुदाय की कुछ महिलाओं ने एकजुट होकर 'WeSpeakOut On FGM' नाम से एक कैंपेन शुरू किया और यहां हमने आपस में अपनी दुख और कहानियां एक-दूसरे से कही. हमने ख़तना के खिलाफ़ एक जंग का ऐलान करने की ठानी.
हमने अपने पादरी, सैदना मुफ़्फदल को इस प्रथा को रोकने के लिए कई ख़त लिखे, पर हमारी बात किसी ने नहीं सुनी. ये प्रथा न सिर्फ़ आज भी चल रही है, बल्कि पादरी साहब ने एक पब्लिक प्रेस स्टेटमेंट में ये घोषणा भी कर दी कि 1400 साल से जो प्रथा चल रही है उसे किसी भी हालत में नहीं बदला जाएगा. बच्चों के मानवाधिकार हनन की तरफ़ किसी ने भी ध्यान नहीं दिया.
18 दिसंबर. 2014 में UN General Assembly ने एक Resoultion पारित किया जिसके तहत पूरी दुनिया में FGM को बैन करने की बात कही गई. FGM को ख़त्म करना एक Sustainable Development Goal भी है.
प्रधानमंत्री जी, एक बार पहले भी आपने कहा था कि संविधान के अनुसार, मुस्लिम औरतों और उनके अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है. मुझे आपकी बातें सुनकर सुकून मिला कि मुस्लिम महिलाओं की हक़ की रक्षा करना भी सरकार का कर्त्वय है.
आपने ये भा कहा था कि, 'Democracy में बातचीत ज़रूरी है.' इसलिये मेरी आपसे दरख्वास्त है कि मेरी और मेरी बहनों की, जो FGM की शिकार हुईं हैं कि बात सुनी जाए.
दिसंबर 2015 में हमने 'WeSpeakOut On FGM' नाम से Change.org पर एक Signature Campaign की शुरुआत की थी. इस प्रथा को बंद करने के Favor में हमें 90000 से ज़्यादा दस्तख़त मिल गए हैं. लेकिन अब तक सरकार की तरफ़ से हमें कोई जवाब नहीं मिला है.
प्रधानमंत्री जी, हम बोहरा समुदाय की महिलायें अपने हक़ के लिए लड़ रही हैं. कुरान में भी FGM की बात नहीं कही गई है. हमारे देश में सिर्फ़ बोहरा समुदाय में और केरल के कुछ समुदायों में ही इस प्रथा का पालन किया जाता है. हम 21वीं सदी में जी रहे हैं और कुछ चीज़ें बदलनी ही चाहिए. मैं सरकार से ये दरख़्वास्त करती हूं कि जल्द से जल्द इस कुप्रथा को ख़त्म करने पर काम शुरू किया जाए.
इस प्रथा को बैन करके बोहरा बेटी बचाना बहुत ज़रूरी है.
मासूमा रानाल्वी

Source: Indian Express

Feature Image Source: Ummid