फ़िल्में समाज का आईना होती हैं. बॉलीवुड पिछले कुछ सालों में रियलिस्टिक सिनेमा को लेकर गंभीर हुआ है वर्ना 80 और 90 के दशक में भारत में मुख्य तौर पर कमर्शियल सिनेमा का ही बोलबाला था. आज कई बड़े निर्माता-निर्देशक भी फ़िल्म बनाने के लिए समाज के अहम मुद्दे चुन रहे हैं, तो कई तो किसी सच्ची घटना को ही पर्दे पर उतार दे रहे हैं.

इनमें से कुछ फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस पर खूब चलीं, तो कुछ फिसड्डी साबित हुईं. लेकिन इन फ़िल्मों ने दर्शकों के दिलों में जगह ज़रुर बनाई. जानिए सच्ची घटनाओं पर आधारित इन फ़िल्मों के बारे में लंबे वीकेंड के लिए फ़िल्मों की ये लिस्ट आपके काम आ सकती है.

1. चक दे इंडिया

फ़िल्म में शाहरुख़ ख़ान ने कबीर खान का किरदार निभाया है. कबीर भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच हैं. अपने ऊपर से देशद्रोही होने का कलंक मिटाने के लिए वो इस टीम को वर्ल्ड कप जिताने के लिए जी जान से जुटे रहते हैं और अंत में टीम जीत भी जाती है.

1982 के एशियन गेम्स में मीर रंजन नेगी पर मैच जानबूझ कर पाकिस्तान को जिताने का आरोप लगा था. कबीर का किरदार मीर से ही प्रभावित है.

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2. नो वन किल्ड जेसिका

ये फ़िल्म जेसिका लाल हत्याकांड पर आधारित है. फ़िल्म में जेसिका की हत्या के बाद उसे इंसाफ़ दिलाने की कहानी को दिखाया गया है. फ़िल्म में रानी मुख़र्जी एक जर्नलिस्ट के किरदार में हैं, जो जेसिका को न्याय दिलाने का ज़िम्मा लेती है. वहीं विद्या बालन ने जेसिका की बहन का किरदार निभाया है.

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3. Once Upon a Time In Mumbai

मिलन लुथरिया की ये फ़िल्म मुम्बई में अंडरवर्ल्ड के दबदबे की कहानी को बयां करती है. फ़िल्म के मुख्य किरदार अजय देवगन और इमरान हाशमी, अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान और दाउद इब्राहिम से प्रभावित हैं.

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4. स्पेशल 26

ये फ़िल्म 1987 में हुई ओपेरा हाउस ठगी मामले पर बनी है. इस मामले में एक व्यक्ति ने खुद को CBI का अधिरकारी बताया था और शातिर तरीके से छापा मारते हुए 'जब्त' की गई चीज़ों को लेकर चंपत हो गया था.

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5. सरकार/सरकार राज

2005 में आई सरकार और 2007 में आया फ़िल्म का सीक्वल, पॉलिटिक्स, पावर और अपराध की कहानी है. इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन का किरदार काफ़ी हद तक बाल ठाकरे से प्रभावित था.

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6. बॉर्डर

बॉर्डर में 1971 के भारत-पाक युद्ध को दिखाया गया है. बॉर्डर के पहले किसी भी फ़िल्म में पाकिस्तान को खुले तौर पर दुश्मन नहीं कहा गया था.

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7. मद्रास कैफ़े

श्रीलंका का सिविल वॉर, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या और उसके बाद के राजनीतिक हालातों को सुजीत सरकार ने अपनी फ़िल्म मद्रास कैफ़े में दिखाया है. इस फ़िल्म में जॉन अब्राहम, लीना पॉल और नरगिस फ़ाकरी लीड रोल में हैं.

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8. एयरलिफ़्ट

90 के दशक में खाड़ी युद्ध में फंसे भारतीयों की समस्या और उनको सुरक्षित भारत लाने के संघर्ष को बयां करती है एयरलिफ़्ट. फ़िल्म में एक काल्पनिक किरदार को वास्तविक घटना के साथ बेहतरीन तरीके से जोड़ा गया है.

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9. शूटआउट एट लोखंडवाला

फ़िल्म 1991 में हुए गैंगस्टर माया डोलस के एनकाउंटर पर बनी है. माया डोलस 16 नवंबर 1991 में लोखंडवाला के एक कॉम्प्लेक्स में छिप गया था. इसके बाद ACP ए.ए. खान ने अपनी 400 पुलिस के जवानों की टीम के साथ उस पर हमला किया था.

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10. भोपाल : ए प्रेयर फ़ॉर रेन

2014 में आई ये फ़िल्म 1984 की भयानक भोपाल गैस त्रासदी को नाटकीय तरीके से पर्दे पर उतार पाने में सफ़ल रही है.

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11. द अटैक्स ऑफ़ 26/11

मुंबई के 26/11 के हमले को शायद ही कोई भारतीय भूल पाएगा. इसी नृशंस कांड को फ़िल्म में बखूबी दिखाया गया है.

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12. सरबजीत

पाकिस्तान की जेल में बंद सरबजीत और उसे छुड़ाने के लिए संघर्ष कर रही उसकी बहन की कहानी 2016 में पर्दे पर रिलीज़ हुई थी. सरबजीत की बहन का किरदार ऐश्वर्या राय ने निभाया है, वहीं सरबजीत के रोल में रणदीप हुड्डा हैं.

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13. तलवार

ये फ़िल्म देश भर को उलझन में डाल देने वाली आरुषि मर्डर मिस्ट्री पर बनी है. 2008 में नोएडा में 14 साल की आरुषि की उसके कमरे में ही हत्या कर दी गई थी. उसके साथ घर के नौकर हेमराज की भी हत्या हुई थी. इस केस में जांच एजेंसियों ने जितना दिमाग लगाया उतना ही मीडिया ने भी ट्रायल किया था. कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया. नौकरों से लेकर मां-बाप तक को जेल हुई लेकिन अब तक साफ़ नहीं हो पाया है कि हत्या किसने की थी. हालांकि, फ़िल्म को देखने पर समझ आ जाता है कि ये गुत्थी क्यों अब तक सुलझ नहीं पाई है.

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14. गैंग्स ऑफ़ वासेपुर

गैंग्स ऑफ़ वासेपुर धनबाद के एक कोल माफ़िया पर बनी है. फ़िल्म युवाओं को खासी पसंद आई थी और इसे अब एक कल्ट क्लासिक फ़िल्मों में शुमार किया जाता है.

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15. LOC कारगिल

2003 में आई ये फ़िल्म 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध पर आधारित है. फ़िल्म में सरहद पर जवानों को होने वाली कठिनाइयों और बहादुरी को दिखाया गया है.

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