नुसरत फतेह अली खान... संगीत की दुनिया का वो सितारा, जिसने सूफ़ी संगीत को एक अलग पैमाना दिया. नुसरत साहब इस दुनिया में नहीं है. पर 'कव्वाली किंग' हमारे बीच कुछ ऐसी कव्वालियां छोड़ गए हैं, जिन्हें जितनी दफ़ा सुनो, वो रूह में और गहरे उतरते जाते हैं.

कभी-कभी तो पता ही नहीं लगता कि कब 20 मिनट की कव्वाली ख़त्म हो गई. आज की पीढ़ी में भी कव्वाली और सूफ़ी शौक़ीन पाए जाते हैं और सबको ये मलाल भी होगा ही कि वो नुसरत साहब को स्टेज पर गाते नहीं देख पाए.

नुसरत साहब के जीते हुए पाकिस्तान इंडस्ट्री ने उनकी कदर नहीं की, क्योंकि उन्होंने एक भी पाकिस्तानी फ़िल्म में गाना नहीं गाया.

नुसरत साहब ने बॉलीवुड के लिए भी कुछ कव्वालियां गाई. जैसे- 'दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है'. उन्होंने सिर्फ़ 3 बॉलीवुड फ़िल्मों में काम किया लेकिन वो 'उस तरह' से कई फ़िल्मों का हिस्सा बने.

90 के दशक में कई संगीतकारों ने बेशर्मी से ब़गैर क्रेडिट दिए नुसरत साहब की कव्वालियों से धुनें उठाईं और ब्लॉकबस्टर गानें तैयार कर दिए. नमूने के तौर पर पेश हैं 6 गाने:

1. सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम

Original-

कोयला फ़िल्म का संगीत राजेश रौशन ने दिया था. सूफ़ी संगीत के शौकीन ये जानते होंगे कि ये कव्वाली नुसरत साहब की है.

2. मेरा पिया घर आया हो राम जी

Original-

इस गाने पर हमने कई बार ठुमके लगाए होंगे. अनु मलिक ने ये गाना नुसरत साहब की कव्वाली 'मेरा पिया घर आया हो लाल नी' से ही 'प्रेरित' होकर बनाया था.

3. कितना प्यारा तुझे रब ने बनाया

Original-

90s के दशक की मशहूर संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण ने राजा हिन्दुस्तानी के लिए ये गाना बनाया था. असल में ये भी नुसरत साहब की कव्वाली 'किन्ना सोहणा तेनु रब ने बनाया' से ही कॉपी किया गया था.

4. जुदाई-जुदाई

Original-

इस कॉपी ने तो हमें दुखी कर दिया. नुसरत साहब की मशहूर कव्वालियों में से एक, 'सानु इक पल चैन ना आवे सजना तेरे बिना' से डायरेक्ट कॉपी-पेस्ट. नदीम-श्रवण ने ही ये कारनामा कर दिखाया है.

5. तू चीज़ बड़ी है मस्त-मस्त

Original-

'मोहरा' के इस गाने पर डांस किए बग़ैर पार्टी अधूरी लगती है. लेकिन संगीतकार विजू शाह ने बड़ी सफ़ाई से नुसरत साहब की 'दम मस्त कलंदर मस्त मस्त' से इसे चेपा था.

6. ये जो हल्का-हल्का सुरूर है

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यूं तो नुसरत साहब की हर कव्वाली का अपना मज़ा है, पर 'ये जो हल्का हल्का सुरूर है' की बात अलग है. ये कव्वाली सीधे दिल के तारों को छेड़ देती है. 'सौतन की बेटी' में इस कव्वाली की कॉपी की गई और कॉपी कुछ इस तरह की, कि दिल से आह निकल जाती है.

एक वीडियो में नुसरत साहब ने ख़ुद विजु शाह और अनु मलिक की कॉपी करने की प्रतिभा की प्रशंसा की थी.

बॉलीवुड के म्यूज़िक डायरेकटर्स ने नुसरत साहब को कॉपी किया और क्रेडिट भी नहीं दिया. आज भी नुसरत साहब की कव्वालियों को गायक गाते हैं, लेकिन क्रेडित भी देते हैं. काश 90 के दशक के डायरेक्टर्स भी थोड़ी ईमानदारी दिखाते!