भारत के हर 10 से में एक प्रॉपर्टी केस में जबरन कब्ज़े या धोखे से ज़मीन हथियाने का मामला सामने आता है. ये बात हम नहीं बल्कि बॉम्बे हाई कोर्ट के जज ने हाल ही में एक अनोखा फ़ैसला सुनाते हुए कही. इस फ़ैसले में जज साहब ने एक बिल्डर की प्रॉपर्टी निलामी पर लगवा दी, जिसने अपने ग्राहकों से धोखाधड़ी की थी.

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ये मामला शुरु हुआ था साल 2008 में, बिल्डर शिरीष दीक्षित ने मुम्बई के दादर की 'Sahnaz' नाम की बिल्डिंग उसके मालिक से ख़रीद ली. यहां उस वक़्त 21 परिवार रह रहे थे. शिरीष ने उस वक़्त सभी किरायदारों से कहा कि वो पूरी बिल्डिंग तोड़ कर दोबारा बनवाएगा, जिसके लिए करीब 34 महीने लगेंगे. शिरीष ने उन्हें तब तक किसी और जगह रहने को कहा. शुरुआत में तो वो बाकी लोगों का ​किराया खु़द भरता था, बाद में उसने वो भी बंद कर दिया. कई साल मामला टलने के बाद साल 2015 में किरायदारों को ख़बर लगी कि शिरीष ने वो ज़मीन गिरवी रख कर 10 करोड़ 40 लाख का लोन लिया है.

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इसके बाद उनमें से एक किरायदार Sunil Soi ने शिरीष के खिलाफ़ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करा दी. ये मामला जब बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा तो जज ने कहा कि, 'शिरीष पुननिर्माण कार्य करना ही नहीं चाहता था. वो बस किरायदारों को ठगने की​ फिराक़ में था.' इसके बाद जज ने इस केस के लिए एक कमिश्नर नियुक्त किया और दिक्षित से उसके माटुंगा वाले फ़्लैट और महाबलेश्वर के पास वाली ज़मीन के दस्तावेज़ जमा करने को कहे. कोर्ट के आॅर्डर अनुसार अब दिक्षित की दोनों प्रॉपर्टी की ​नीलामी हो रही है और उसी से आए पैसे से 'Sahnaz' का पुननिर्माण कार्य शुरू होगा.

इस फ़ैसले पर शिरीष राज़ी है और किरायदार भी संतुष्ट हैं.

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