ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स के दसवें दिन की शुरुआत शानदार रही. महिलाओं के 45-48 किलो वर्ग की बॉक्सिंग में मैरी कॉम ने स्वर्ण पदक जीत लिया. पहली बार मैरी कॉम ने कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया है. उन्होंने नॉर्थर्न आयरलैंड की Kristina O'Hara को बॉक्सिंग में हरा कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. इस जीत के साथ मैरी कॉम कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज़ बन गईं.

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भारत की स्टार बॉक्सर की इस जीत ने भारत को इस कॉमनवेल्थ में 18वां स्वर्ण पदक दिलाया. जीत के बाद मैरी कॉम ने अपने कोच के कंधों पर बैठ कर जीत का जश्न मनाया.

तीन बच्चों की मां मैरी कॉम 35 वर्ष की हैं, फ़ाइनल मुकाबले में उनके सामने 22 साल की Kristina O'Hara खड़ी थी. मैच की शुरुआत में Kristina को बढ़त मिल गई थी. लेकिन वो इस बढ़त को बनाये रखने में असफ़ल रहीं. मैरी कॉम के अनुभव और ज़ोरदार मुक्कों के सामने Kristina ने घुटने टेक दिए. अंत में मैच का परिणाम कुछ ऐसा रहा 30-27, 30-27, 29-28, 30-27, 20-27.

2012 लंदन ओलंपिक्स में मैरी कॉम ने कांस्य पदक जीता था, वो पांच बार विश्व विजेता भी रह चुकी हैं. मैरी कॉम 2016 रियो डि जेनेरो ऑलंपिक्स के लिए क्वालिफ़ाइ नहीं कर पाईं थी. तब ऐसा लग रहा था कि जैसे एक महान खिलाड़ी का करियर अब अपने अंतिम पड़ाव पर है. क्योंकि मैरी कॉम एक फ़ाइटर हैं इसलिए उन्होंने हार नहीं मानी और खेल में वापसी की. पिछले साल नवंबर महीने में मैरी कॉम पांचवी बार एशियन चैंपिनय बनीं. इस जीत के साथ रिंग पर उनका दबदबा फिर से कायम हो गया.

वर्तमान में मैरी कॉम के नाम पांच वर्ल्ड चैंपियन, पांच एशियन चैंपियनशिप, 1 ओलंपिक मेडल, 2 एशियाई खेल पदक दर्ज हैं. भारत की इस आयरन लेडी को 2009 में खेलरत्न सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है.

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