तमिलनाडु के पश्चिमी जिलों में पानी की बेहद कमी थी. यहां के निवासियों को मुश्किल से ही पीने व सिंचाई के लिए पानी मिल पाता था. Pennycuick नाम के एक ब्रिटिश इंजीनियर ने महसूस किया कि नदी के पानी का रूख बदलकर उसे मद्रास के कई क्षेत्रों में पहुंचाया जा सकता है, जिससे यहां के निवासियों को कृषि और पीने के लिए पानी मिल जाएगा. Pennycuick ने निर्णय लिया कि वे नदी पर एक बांध बनाकर उन क्षेत्रों में पानी पहुंचा सकेंगे, जो अपनी प्यास बुझाने और खेती करने के लिए सिर्फ ‘वैगई नदी’ के पानी पर निर्भर थे. यह बांध केरल की पेरियार नदी पर बनाया गया है, जो अरब सागर में पश्चिम की ओर बहती है. इसका संचालन और रख-रखाव तमिलनाडु राज्य द्वारा किया जा रहा है.

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Pennycuick और अन्य ब्रिटिश इंजीनियर्स ने यह निर्णय लिया कि प्राकृतिक मुश्किलों के बाद भी वे Mullaiperiyar बांध का निर्माण करेंगे. उन्होंने बेहद बाहदुरी से जंगल के ख़तरनाक जानवरों और कीट-पंतगों की परवाह किए बिना, इस काम को अंजाम दिया. एक समय ऐसा भी था, जब उनके पास बांध निर्माण के लिए पर्याप्त धन नहीं था. ब्रिटिश सरकार ने भी बांध निर्माण के लिए उतनी सहायता नहीं की थी, जितनी उन्हें ज़रूरत थी. इसके बाद भी इंजीनियर Pennycuick ने हार नहीं मानी और इंग्लैड में मौजूद अपनी संपत्ति को सिर्फ इसलिए बेच दिया ताकि वे बांध बना सकें.

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यह बांध पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ रामनाथपुरम के थेनी, डिंडीगुल, मदुरै और शिवगंगा ज़िले की 2.23 एकड़ ज़मीन के लिए सिंचाई का पानी भी उपलब्ध करवाता है. Pennycuick ने बांध के निर्माण में सही सामग्री का इस्तेमाल किया है, तभी तो यह बांध भूकंप के झटकों को आसानी से सह सकता है. तमिलनाडु के थेनी और मदुरै जिले के निवासी इस ब्रिटिश इंजीनियर का सम्मान ही नहीं करते, बल्कि उन्हें आज भी याद करते हैं.

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