बीते रविवार को दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की उनके घर में ही फांसी पर लटकी लाशें मिलने से हड़कंप मच गया. किसी ने इसको तंत्र-मंत्र के कारण की गई सामूहिक आत्महत्या करार दिया, तो कोई इसे मर्डर बोल रहा है. वहीं पुलिस भी अभी इसमें कुछ बोल नहीं पा रही है, क्योंकि अभी जांच चल रही है.

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केस की जांच के दौरान हर रोज़ पुलिस को कुछ न कुछ हैरान करने वाला मिल रहा है. पहले दिन से ही इस केस को तंत्र-मंत्र और अन्धविश्वास से जोड़ा जा रहा है क्योंकि इस घर से कुछ ऐसे सुराग, जैसे पूजा स्थल पर एक डायरी में मौत को अंजाम देने का सिलसिलेवार विवरण लिखा हुआ मिला, घर के जिस घर में इस काण्ड को अंजाम दिया गया उसमें 11 पाइप होना, आदि. और इन सुरागों की वजह से ये केस दिन पर दिन उलझता ही जा रहा है.

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पर अब पुलिस को इस कांड से जुड़ा एक और सुराग मिला है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो वहां उसको दो रजिस्टर, रुई, मेडिकल टेप के साथ-साथ 5 स्टूल्स भी मिले थे. मगर तब पुलिस ने इन पांच स्टूलों पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया शायद. गौर करने वाली बात है कि जब फांसी लगाने वालों की संख्या 10 थी, तो सिर्फ़ 5 स्टूल्स ही क्यों थे वहां? अब इसमें भी दो बातें हो सकती हैं कि क्या दो-दो लोगों ने फ़ांसी लगाने के लिए एक ही स्टूल का इस्तेमाल किया था? या फिर पांच-पांच के ग्रुप में फ़ांसी लगाई गई है. पुलिस इस पहलू के मद्देनज़र भी जांच कर रही है.

इसके अलावा घर से जो डायरी मिली है उसके आधार पर पुलिस इस मास सुसाइड के पीछे 77 साल की नरायणी देवी के बेटे ललित को मास्टरमाइंड मान रही है. पुलिस का कहना है कि ललित सपने में अपने पिता गोपालदास से बात करता था. उसका मानना था कि उसके पिता, गोपालदास जिनकी 10 साल पहले मौत हो चुकी है, वो परिवार के बाकी सदस्यों को मोक्ष दिलाएंगे. इस बात के सबूत भी हैं कि परिवार के सभी लोगों को पूरा यक़ीन था कि वो लोग मरेंगे नहीं, बल्कि उनके पापा उन्हें बचा लेंगे. पुलिस का कहना है कि ललित को अपने पिता पर पूरा विश्वास था कि उसके पिता उसके परिवार को मोक्ष दिलवाना चाहते हैं. पुलिस को एक और रजिस्टर मिला है जिससे पता चलता है कि ललित 2011 से अपने पिता को सपने में देख रहा था और वो उनके द्वारा मिले हुए सभी निर्देशों को 2015 से एक डायरी में लिख रहा था.

आइये अब इस केस से जुड़ी कुछ अहम जानकारियों से अवगत कराते हैं.

- पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी बॉडी पर कहीं भी कोई चोट का निशान नहीं मिले, बल्कि नोटबुक के अनुसार, परिवार के कुछ सदस्यों ने फांसी पर लटकने में बाकी लोगों की मदद की.

- घटनास्थल से पुलिस को 5 स्टूल्स मिले जबकि फांसी पर लटकने वालों की संख्या 10 थी.

- इस परिवार के करीब 22 रिश्तेदारों से पुलिस ने पूछताछ की है. पुलिस ने ये भी आशंका जताई है कि जांच में मनोचिकित्सक की सहायता ली जा सकती है. वहीं पुलिस ने इस सामूहिक आत्महत्या में किसी बाबा का हाथ होने की संभावना से इनकार किया है.

- पुलिस ने जब ललित के किराना स्टोर की तलाशी ली, तो जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि ललित के पिता की मौत 10 साल नहीं, बल्कि 12 साल पहले हुई थी.

- रजिस्‍टर की लास्ट एंट्री में ललित ने लिखा था कि अंतिम समय में आखिरी इच्छा की पूर्ति के वक़्त आसमान हिलेगा, धरती कांपेगी. उस वक़्त तुम घबराना मत, मंत्रों का जाप बढ़ा देना और मैं आकर तुम्हें उतार लूंगा, औरों को भी उतारने में मदद करूंगा.

- ललित ने अपने परिवार के सदस्‍यों से कहा था कि उसे अपने स्‍वर्गीय पिता से संदेश मिला है. इसका मतलब यह है कि ललित और उसके परिवार के लोगों को विश्‍वास था कि एक बार वो फांसी के फंदे से लटक जाएंगे तो उनके पिता उनको बचा लेंगे.

- परिवार और रिश्‍तेदारों से हुई पूछताछ के अनुसार ये पता चला है कि ललित कई सालों से मौन धारण किये हुए था. लेकिन वो नोटबुक में सब कुछ लिखता था. जो लोग उसकी दुकान में सामान खरीदने आते थे उनसे भी वो नोटबुक पर लिखकर ही बात करता था.

इसके अलावा zee news के अनुसार, एक जानकारी और ये है कि सभी 11 मृतकों की आंखें बीते सोमवार को गुरु नानक आई सेंटर को दान कर दी गयीं हैं. परिवार के एक रिश्तेदार ने कहा कि 'ये परिवार दूसरों की मदद के लिए हमेशा आगे रहता था और उनकी 11 जोड़ी आंखें अब 22 लोगों के जीवन में रौशनी ला सकती हैं.'

एक अहम जानकारी ये है कि जिस रात ये सामूहिक आत्महत्या हुई है उस घर में मौत से पहले ऋषि नाम का एक डिलीवरी बॉय 20 रोटियां देने गया था, जो उस घर में जाने वाला आखिरी इंसान था. इस लड़के का नाम ऋषि है. ऋषि ने ndtv को बताया कि जब वह रोटियां देने गया था, तो परिवार के सदस्य सामान्य दिख रहे थे. इसके साथ ही उसने ये भी बताया कि घर को देखकर उसे कहीं से भी ऐसा नहीं लगा कि यहां इतना बड़ा कांड होने वाला है. करीब पौने ग्याहर बजे उसने घर में बीस रोटियों की डिलिवरी की. उसने बताया कि घर में सबकुछ नॉर्मल था.

कुछ देर पहले ही बुराड़ी केस से जुड़ा एक और खुलासा हुआ है. घटना वाले दिन का CCTV फ़ुटेज सामने आ गया है. इस फ़ुटेज से पूरे घटनाक्रम को रात के 10 बजे से देर 1 बजे तक कैसे अंजाम दिया गया ये साफ़-साफ़ पता चल गया है.

तो अब आप भी देखिये कि कैसे क्या हुआ?

10 pm: फ़ैमिली की सबसे बड़ी बहू स्टूल्स लेकर आई.

10:15 pm: 15 वर्षीय ध्रुव और शिवम तार लेकर आये थे, जिनको फांसी के लिए इस्तेमाल किया गया.

10:39 pm: बड़ी बेटी द्वारा आर्डर की गई 20 रोटियां डिलीवर हो गयीं थी.

10:57 pm: घर की बुज़ुर्ग नारायणी देवी का बड़ा बेटा भुवनेश पालतू कुत्ते को टहलाने के लिए बाहर ले गया.

11:04 pm: भुवनेश और वो डॉग घर के अंदर आये थे.

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