दिल्ली का बुराड़ी केस: ऐसा लग रहा है कि अब इस सामूहिक आत्महत्या की गुत्थी सुलझती नज़र आ रही है. बीते रविवार को दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की उनके घर में ही फांसी पर लटकी लाशें मिलने से हड़कंप मच गया. इस केस में 11 नंबर का रहस्य ही इस सामूहिक आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है. बुराड़ी के संतनगर इलाके के इस घर से पुलिस ने 11 डायरियां बरामद की हैं, और इनमें बीते 11 सालों में बहुत कुछ लिखा गया है. पुलिस के अनुसार, इन सभी डायरियों में लिखी गई बातें कथितरूप से आत्महत्या करने के तरीके से पूरी तरह से मेल खाती हैं.

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अगर केस से जुड़े अभी तक के सुरागों को देखा जाए, तो इन सभी की संख्या 11 है, जैसे 11 पाइप, घर के रोशनदान में 11 एंगल, 11 खिड़कियां, 11 सीढ़ियां, 11 रजिस्टर या डायरियां, आदि इसके पीछे अन्धविश्वास को मुख्य वजह बना रहे हैं. इसी के साथ पुलिस की थ्योरी भी इसी नंबर के इर्द-गिर्द ही घूम रही है और इन्वेस्टिगेशन टीम भी सामूहिक खुदकुशी को 11 नंबर से जोड़कर देख रही है. पुलिस जानना चाहती है कि आखिर इस नंबर का रहस्य क्या है.

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तो चलिए अब देखते इस 11 नंबर का फेर क्या है?

11वें रजिस्टर में लिखा मिला मौत का ये भयानक मंज़र

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घर से मिले कुल 11 रजिस्टर्स में से 11वें रजिस्टर की आख़िरी एंट्री, जो 30 जून 2018 को की गई थी, वो इस घटना का राज़ खोलती है. पुलिस के अनुसार, इन रजिस्टरों में 3-4 लोगों की हैंडराइटिंग मिली हैं. ज़्यादातर ललित बोलता था और प्रियंका लिखती थी. रजिस्टर के आख़िरी पन्ने पर लिखा है 'घर का रास्ता. 9 लोग जाल में, बेबी (विधवा बहन) मंदिर के पास स्टूल पर, 10 बजे खाने का ऑर्डर, मां रोटी खिलाएगी, एक बजे क्रिया, शनिवार-रविवार रात के बीच होगी, मुंह में ठुंसा होगा गीला कपड़ा, हाथ बंधे होंगे.' इसके साथ ही इस आख़िरी एंट्री की आख़िरी पंक्ति है- 'कप में पानी तैयार रखना, इसका रंग बदलेगा, मैं प्रकट होऊंगा और सबको बचाऊंगा.

11 प्लास्टिक के पाइप का सच

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भाटिया परिवार के घर की बाहरी दीवार पर 11 पाइप लगे हुए थे. जिसने ये पाइप लगाए थे उससे पूछताछ में पता चला कि उसने तो वेंटिलेशन के लिए ग्लास का रोशनदान या खिड़की लगाने के लिए बोला था, पर परिवार के लोगों ने कहा पाइप ही लगाओ. अब ये पाइप वेंटिलेशन के लिए थे या किसी और क्रिया के लिए ये तो अभी तक राज़ ही है.

रोशनदान में 11 लोहे के एंगल

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जैसे-जैसे केस की परतें खुल रही हैं, हर दिन एक नया खुलासा हो रहा है. पुलिस को घर के एंट्री गेट के ऊपर लगे रोशनदान में लगे 11 लोहे के एंगल पर भी संदेह हो रहा है. इन 11 ऐंगल्स का राज़ भी अभी तक पता नहीं चला है.

11 खिड़कियां

किसी घर में 11 खिड़कियां होना कोई बड़ी और आश्चर्यजनक बात नहीं है लेकिन इस घर में 11 खिड़कियां भी किसी ओर इशारा कर रही हैं.

11 सीढ़ियां

डायरी में लिखे इंस्ट्रक्शंस के हिसाब से घर के पालतू डॉग को इस क्रिया के वक़्त ऊपर के माले पर रखना था. लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि ऊपर तक जाने वाली सीढ़ियों की संख्या भी 11 ही थी.

11 सालों का इतिहास

पुलिस के अनुसार, कुल 11 रजिस्टर मिले हैं. पिछले 11 सालों से ललित के पिता उसके सपनों में आ रहे हैं और उसको इंस्ट्रक्शंस दे रहे हैं. पिछले 11 सालों यानि कि 2007 से, ललित अपने पिता की आवाज़ में बात कर रहा है. एक एक्सीडेंट में सदमे से ललित की आवाज़ चली गयी थी, और पिता कि मौत के बाद अचानक ही उसकी आवाज़ वापस आ गई, लेकिन तब से वो अपनी पिता की तरह उनकी ही आवाज़ में बात कर रहा था. परिवार के इस 11 सदस्यों के अलावा किसी को यह बात पता नहीं थी.

11 लाशें

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इस केस की सबसे दुखद बात ये है कि इसमें 11 लोगों की जान चली गई, जिनमें दो नाबालिग थे.

इसके अलावा पुलिस ने बताया कि घर में से हनुमान चालीसा और गायंत्री मंत्र के अलावा कोई और धार्मिक ग्रंथ नहीं मिला है, और न ही कोई आध्यात्मिक पुस्तक मिली है. घटना के साथ दिन पहले से घर में पूजा चल रही थी. वहीं आत्महत्या करने के लिए 9 लोगों ने 5 स्टूलों का इस्तेमाल किया था. छठा स्टूल प्रतिभा को इस्तेमाल करना था. प्रियंका को सेंटर में रखना था.

ndtv के अनुसार, एक सीसीटीवी फ़ुटेज मिला है, जिसमें भाटिया परिवार की दो महिलाएं घटना वाले दिन, रात 10 बजकर 12 मिनट पर बाहर से स्टूलों और तारों को लाते देखा जा सकता है, जिनका प्रयोग बाद में फांसी लगाने में किया गया.

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ndtv के अनुसार, आवाज़ वापस आने के बाद से घर के लोग ललित को काका कहते थे. वहीं सपने में आने वाले पिता को सब सदस्य डैडी बोलते थे. ललित पूरे घर को धमकी देता था कि अगर ऐसा नहीं किया, तो डैडी ऐसा कर देंगे. इस वजह से पूरा घर उसकी कोई बात नहीं टालता था. फांसी लगाने के लिए जिन चुन्नी और कपड़ों का इस्तेमाल हुआ, वो भी टीना और उसकी मां उसी दिन दोपहर में पास के ही बाज़ार से लाये थे.

पुलिस के मुताबिक़, ये सब कुछ एक्सीडेंटल हुआ, क्योंकि रजिस्टर में इस प्रक्रिया के बाद हाथ खोलने के बारे में लिखा था. रजिस्टर में लिखी बातों के अनुसार, उनको विश्वास था कि इस प्रक्रिया से उनकी शक्तियां बढ़ जाएंगी. प्रकिया के बाद सबको एक-दूसरे की हाथ खोलने में मदद करनी थी. पर ऐसा हो न सका और सबकी जान चली गई.

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