1 जनवरी 2019 को सुबह-सुबह दो महिलाओंं ने केरल के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश किया. इस ऐतिहासिक कदम के बाद केरल की रफ़्तार थम सी गई. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राज्य स्तर पर बंद का आहवान किया. हड़ताल के दौरान कई जगह हिंसाक घटनाएं भी घटी.

हिंसा, तोड़-फोड़, आगजनी की घटनाओं को Kairali TV की कैमरपर्सन, शैलजा अली फ़ाथिमा कवर कर रही थी.

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शैलजा को बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ़ धमकाया, बल्कि उन पर हाथ भी उठाया. कार्यकर्ताओं ने उनका कैमरा छीनने की कोशशि की, कैमरा बचाने की जद्दोजहद में उन्हें गर्दन में चोट भी लगी.

Scroll की रिपोर्ट के अनुसार, शैलजा ने कहा,

मुझे पता नहीं कि मुझे किसने मारा. मैं दर्द से कराह रही थी और वो मेरा कैमरा छीनना चाह रहे थे लेकिन मैंने अपनी पूरा ताकत लगाकर कैमरा पकड़े रखा. इसी खींच-तान में मुझे चोट लगी.

केरल के 'मातृभूमि' अख़बार ने शैलजा की ये तस्वीर प्रकाशित की थी. ये तस्वीर अपने-आप में बहुत कुछ बयां कर रही है.

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तिरुवनंथपुरम के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है. NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, शैलजा ने कहा,

मैं डर की वजह से नहीं रो रही थी, बेबस होने के कारण आंसू निकल आए.

शैलजा ने आगे कहा,

अगर 5-6 लोग पीछे से आकर मुझे मारते, कैमरा छीन लेते, तो मैं क्या करती? मैंने कई तस्वीरें खो दी इसीलिए मुझे रोना आ गया. मैं दूसरों को अपनी तकलीफ़ नहीं दिखाना चाहती थी इसीलिए मैंने कैमरे से अपना चेहरा छिपा लिया था.

बुधवार को शैलजा को बिंदु अम्मीनी और कनक दुर्गा के सबरीमाला में प्रवेश करने पर, बीजेपी लीडर्स की प्रतिक्रियाएं रिकॉर्ड करने के लिए भेजा गया. 3 हफ़्तों से सेक्रेटेरियट के सामने भूख हड़ताल पर बैठे नेताओं की प्रतिक्रिया लेने के बाद वो वापस दफ़्तर लौट रही थी. रास्ते में उन्होंने देखा कि कुछ लोग गुस्से में सेक्रिटेरियट की ओर बढ़ रहे हैं.

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रास्ते में वे पत्रकारों पर हमला करते, लेफ़्ट के होर्डिंग्स तोड़ते हुए बढ़ रहे थे. जब शैलजा ने ये शूट करना शुरू किया, तो भीड़ उन्हें धमकाने लगी. जब शैलजा ने अनसुना कर दिया, तो उन्हें पीछे से किसी ने मारा. इन सबकी वजह से उनका कैमरा बंद हो गया. मगर शैलजा की ये तस्वीर सारी कहानी बयां कर रही है.