इंडियन क्रिकेट टीम इन दिनों क्रिकेट सीरीज़ के लिए साउथ अफ़्रीका पहुंची हुई है. एक मैच के सिलसिले में भारतीय टीम के खिलाड़ी साउथ अफ़्रीका के Cape Town शहर पहुंचे, जहां उन्हें होटल वालों की तरफ़ से हिदायत दी गई कि वो 2 मिनट से ज़्यादा शावर का इस्तेमाल न करें.

इस वाकये के साथ ही दुनिया को Cape Town के उस संकट के बारे में पता चला, जिससे ये शहर पिछले कई सालों से जूझ रहा है. 1977 से केपटाउन में हर साल लगभग 508 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड होती थी, पर पिछले तीन सालों में यहां सिर्फ़ 153 मिमी बारिश हुई है, जिसकी वजह से कभी पानी से लबालब रहने वाला बांध Theewatersklooof भी सूख चुका है. इससे 40 लाख की आबादी वाले इस शहर में पानी का संकट पैदा हो गया है. यहां आने वाले पर्यटकों को भी साफ़ हिदायत दी जा रही है कि वो पानी का इस्तेमाल सूझ-बूझ के साथ करें.

पानी कम ख़र्च करने के लिए जारी किये गए आदेश

होटल भी इस बाबत पर्यटकों को कह रहे हैं कि वो शावर का इस्तेमाल 90 सेकंड से ज़्यादा न करें और स्विमिंग पूल में नहाने के बजाय समंदर में गोते लगाएं. यहां तक कि पर्यटकों से फ़्लश का इस्तेमाल भी कम से कम करने के लिए कहा जा रहा है.

Cape Town पिछले एक साल से पानी के इस संकट से जूझ रहा है, पर Day Zero के दिन यहां हालात बद से बद्तर हो जाते हैं. घर के नल में पानी आने के बजाय कुछ सरकारी नलों में पानी आता है, जिस पर लोग अपनी ज़रूरतों के लिए निर्भर रहते हैं. इसके लिए शहर में करीब 200 वॉटर कलेक्शन सेंटर बनाए जाते हैं, जहां से लोग 25 लीटर तक ही पानी ले सकते हैं. पानी की सुरक्षा के लिए सेंटर पर पुलिस और सेना को भी तैनात किया जाता है. सरकार ने हर साल की 16 अप्रैल को Day Zero घोषित किया हुआ है.

यहां हर परिवार के लिए पानी की एक सीमा भी निर्धारित है, जिसके मुताबिक, एक परिवार रोज़ाना 87 लीटर पानी ही ख़र्च कर सकता है, पर पिछले हफ़्ते से इस सीमा को घटाकर 50 लीटर कर दिया गया. इसके अलावा गाड़ियों को धोने पर पाबंदी भी लगा दी गई है.

होटल्स भी चला रहे हैं मुहीम

इसके लिए कई होटल्स ने सड़कों और एयरपोर्ट्स के पास ऐसे होर्डिंग और पोस्टर्स लगवाएं हैं, जिनमें लोगों से पानी को संभाल कर इस्तेमाल करने की अपील की जाती है. इसके साथ ही उन्होंने अपने बाथटब हटा कर बाल्टियां रखनी शुरू कर दी हैं. बार और रेस्टोरेंट ने भी ऑटोमेटिक फ़्लश सिस्टम को हटाना शुरू कर दिया है.

टूरिज़्म इंडस्ट्री से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि 'इंग्लैंड में एक आदमी औसतन 150 लीटर पानी रोज़ाना इस्तेमाल करता है, जबकि हम लोगों से अपील करते हैं कि आप अपने काम को 50 लीटर पानी में निपटाएं.' होटलों में पानी को बचाने की व्यवस्था की गई है और पानी के दोबारा इस्तेमाल पर भी ज़ोर दिया जाता है.

Cape Town टूरिज़्म के चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफ़िसर Enver Duminy का कहना है कि 'इसमें कोई शक नहीं कि पानी की वजह से यहां की टूरिज़्म इंडस्ट्री पर भी प्रभाव पड़ा है. कई टूरिस्ट यहां का प्लान कैंसिल कर रहे हैं.'

हमारे लिए चेतावनी

ख़ैर ये तो Cape Town का मामला था, पर हिंदुस्तान के कई शहर भी इसी तरह की परेशानी से जूझ रहे हैं, जिनमें बंगलुरु का नाम प्रमुख है. तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच पहले ही कावेरी जल विवाद है, जो कई बार हिंसा का रूप भी ले चुका है. वहीं पंजाब और हरियाणा के बीच भी चल रहा जल विवाद सुलझता नहीं दिखाई दे रहा. Cape Town हम सब के लिए एक सबक है कि दिनों-दिन पढ़ते प्रदुषण की वजह से मौसम का मिज़ाज पहले ही बिगड़ चुका है. बारिश का स्तर भी हर साल की तुलना में घटता जा रहा है. ऐसे में यदि हम अब भी नहीं संभले, तो वो दिन दूर नहीं जब हिंदुस्तान में भी Cape Town जैसे हालात हो जायेंगे.

हम कैसे बचा सकते हैं कल के लिए जल?

गाड़ी धोते समय पाइप की बजाय बाल्टी व मग का प्रयोग करें.नहाते समय शावर की बजाय बाल्टी एवं मग का प्रयोग करें.अपने आस-पास अधिक से अधिक पेड़ लगाएं.बिल्डिंग और घर को बनाते समय वर्षा जल संरक्षण के लिए पहले से ही जगह बनवाएं.RO मशीन या AC से निकलने वाले पानी को दोबारा इस्तेमाल में लाएं.