क्रांति जब-जब आएगी, तब-तब चे ग्वेरा का नाम लिया जायेगा.

क्रांतिकारियों के बारे में यह कहना उचित नहीं होगा कि उनका नाम सबसे शीर्ष पर लिया जाएगा क्योंकि क्रांति सबके लिए समान रूप से आती है. जिनको हटाने के लिए वो आती है, वो उसमें धराशाई हो जाते हैं. जिनके लिए वो आती है, उनको सम्मान नहीं बल्कि समानता मिलती है. चलिए गहराई में नहीं जाता. मुद्दे पर आते हैं. चे ग्वेरा का नाम सुना है कभी? नहीं सुना. चलो बता देता हूं उस्ताद. एक-एक करके पॉइंट पे आता हूं.

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ये चे की फ़ोटो है. आपने आमतौर पर टी-शर्टस या फिर अपने दोस्त के किसी कमरे में देखी होगी. एक शख़्स ने ये टीशर्ट पहन रखी थी. जब मैंने उससे पूछा कि, 'ये किसकी तस्वीर है?' तो उसने बड़ी निडरता से कहा कि, 'भाई तू नहीं जानता कि ये एक रॉकस्टार था. मुझे हंसी आ गई. आज भी आ रही है.'

मार्क्सवादी क्रांतिकारी थे 'चे'

असल नाम अर्नेस्तो 'चे' ग्वेरा था.

जन्म अर्जेंटिना के रोज़ारियों में हुआ था.

तारिख़ थी 14 जून 1929.

चे सबसे पहले एक क्रांतिकारी थे, फिर पेशे से एक डॉक्टर, गुरिल्ला नेता, लेखक और कूटनीतिज्ञ थे. दक्षिण अमेरिका के साथ सदियों से अत्याचार होता आया है. वहां संसाधनों की भरमार है, इसी के चलते अमेरिका अपनी नकेल कसे रखता है. जब चे की रगों का खून उबाल खा रहा था, तब चे ने पूरा दक्षिण अमेरिका घूमा और वहां की दिक्कतों ने एक डॉक्टर बनने वाले अर्नेस्तो ग्वेरा को चे ग्वेरा बना दिया.

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यात्राओं से बदला जीवन

सही चल रहा था सब कुछ... अर्नेस्तो ग्वेरा डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे. न जाने कौन सी बेचैनी थी जिसके कारण अपने एक दोस्त के साथ इन्होंने पूरे लैटिन अमेरिका की यात्रा करने की ठानी. इस यात्रा के दौरान अर्नेस्तो ग्वेरा की आंखों ने, जो देखा वो दिल पर गहरा प्रहार करने लगा. उन्हें पता चल चुका था कि लैटिन अमेरिका के हालात सिर्फ़ और सिर्फ़ ग़रीबी के कारण बिगड़े हैं. साम्राज्यवाद और पूंजीवाद ने जिस तरह से पूरे महाद्वीप को जकड़ रखा है, उससे बचने का एक ही तरीका था क्रांति... विश्व क्रांति.

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फिदेल कास्त्रो से मुलाकात

अपनी आंखों से जो चे ने यात्रा के दौरान देखा, उन हालातों ने चे को बदल दिया था. उस पर हालांकि एक फ़िल्म भी बनी है The Motorcycle Diaries, ये साल 2004 में आई थी. इस फ़िल्म का ट्रेलर हम नीचे दिखा रहे हैं. इस यात्रा के बाद अपने लोगों के प्रति चे के नज़रिये में बदलाव आ गया था.

इसके बाद ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति याकोबो आरबेंज़ गुज़मान द्वारा चलाये जा रहे सामाजिक सुधार आंदोलनों में चे ने भाग लेना शुरू किया. इसके बाद उनकी मुलाकात फिदेल कास्त्रो और राउल कास्त्रो से हुई. चे की उम्र उस समय 27 साल की थी. क्यूबा में फिदेल कास्त्रो ने चे को हाथों-हाथ लिया और उनके विचारों से रू-ब-रू होने के बाद चे को कई अहम भूमिकाएं दी. ये सब इतना आसान नहीं रहा होगा, जितना पढ़ने में लग रहा है. अमेरिकी शक्तियां लगातार अपने खिलाफ़़ उठती आवाज़ों को दबा रही थी. ऐसे में इन आंदोलनों को चलाना और विरोध का डंका बजाना बहुत मुश्किल काम था.

आखिर कहां से आया 'चे'

जैसे हमारे यहां भाई, ब्रो, ड्यूड बोला जाता है, वैसे ही क्यूबा में 'चे' बोला जाता है. फिदेल कास्त्रो के साथ जब ग्वेरा की मुलाकात हुई तो जल्द ही क्रांतिकारियों का समूह ग्वेरा को चे के नाम से पुकारने लगा. अपने आसपास जिस तरह से चे ने यात्राओं का सहारा लेते हुए दर्द देखा था, वो दर्द ताउम्र उनमें ज़िंदा रहा. मार्क्सवाद की ओर झुकाव हो गया और तर्क के साथ-साथ सशस्त्र आंदोलन उन समस्यओं के निदान का एक तरीका बन गया. 31 वर्ष की उम्र में चे को फिदेल ने राष्ट्रीय बैंक का अध्यक्ष और देश का उद्योग मंत्री बना दिया, लेकिन वो राजधानी में बैठकर काम नहीं करना चाहते थे बल्कि ज़मीनी स्तर पर जाकर पूंजीवाद और साम्राज्यवाद के खिलाफ़ आंदोलन को और मजबूत करना चाहते थे.

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समाजवाद के लिए समर्थन

समाजवाद के लिए चे ने पूरा विश्व घूम कर समर्थन जुटाना शुरू किया. चे को लिखने का बहुत शौक था. वो डायरी लिखा करते थे. डायरी का नाम है 'बोलीविया डायरी'. उसमें चे ने यात्रा और आंदोलन के दौरान की आंखों-देखी लिखी है. 1964 में चे ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया. कई देशों के वरिष्ठ मंत्री इनका भाषण सुनने के लिए आये. चे ने क्यूबा की ओर से इस भाषण में भाग लिया था. कॉन्गो में चे ने लोगों को क्रांतिकारी बनाने के लिए गुरिल्ला पद्धित सिखाई थी. इसके बाद बोलीविया में उठते विद्रोह को आग बनाने का काम भी चे ने ही किया.

वो एक ऐसे क्रांतिकारी थे, जो अपने अंदर की आग को अपने तक सीमित नहीं रखते थे, बल्कि तमाम व्यवस्थाओं को जला कर खाक रखने का दम रखते थे. अमेरिका की खुफ़िया एजेंसी चे को ढूंढ़ रही थी. जंगलों में एक ऐसा परिंदा था चे, जो अपने साथ पूरे समूह को लेकर चल रहा था. आख़िरकार बोलीविया सेना की मदद से 9 अक्तूबर 1967 को अमेरिकी खुफ़िया एजेंसी ने चे को पकड़ लिया और मार दिया. आज चे मरा नहीं है, चे पालिका के बाज़ारों से लेकर अमेरिका की गलियों में, क्यूबा के पोस्टर्स में हर जगह देखा जा सकता है.

विशेष नोट: गर ये लेख गलती से उन बुद्धिजीवियों के हाथ लगा हो जो चे को जानते हैं और मानते भी हैं. तो ये न सोचें कि इसमें चे के बारे में वही पुरानी बातें हैं. ये आर्टिकल हमने उन पाठकों के लिए लिखा है, जो चे को नहीं जानते. बात दिलहित में जारी.

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