गोरखपुर में पिछले दिनों में 70 बच्चों की मौत हो चुकी है. मेडिकल कॉलेज में 10 से 12 अगस्त के बीच 48 घंटे में 36 बच्चों की मौत ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से हुई. इस हादसे के बाद से सबकी नज़रें गोरखपुर की स्वास्थ्य सुविधाओं पर हैं, इस बीच लोग ये नहीं देख पा रहे कि उत्तर-प्रदेश के बाकी ज़िलों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत और भी लचर है.

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NFHS (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण) डाटा में साफ़ देखा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत पूरे देश में सबसे ख़राब है. कई ज़िले ऐसे हैं, जहां हालात गोरखपुर से भी ख़राब हैं. मसलन, केवल 50 प्रतिशत बच्चों का ही टीकाकरण हुआ है और आधे से ज़्यादा बच्चे अवरुद्ध विकास से ग्रसित हैं. ज़्यादातर माओं को प्रसवपूर्व देखभाल नहीं मिल पाती.

टीकाकरण

बलरामपुर में सबसे कम (7%) बच्चों का टीकाकरण हुआ है. गोरखपुर इस मामले में 62 अन्य ज़िलों से आगे है.

बच्चों का विकास

कुपोषण, संक्रमण जैसी अवस्थाओं में बच्चों का विकास ठीक तरह नहीं हो पता. बहराइच में हालात इस मामले में सबसे ख़राब हैं. यहां हर तीन में से दो बच्चों का विकास अवरुद्ध है.

प्रसवपूर्व देखभाल

गर्भावस्था में कई महिलाओं को सही देख-भाल नहीं मिल पाती. गोरखपुर में 35% महिलाओं को ही कम से कम चार ANC (Antenatal Care) विज़िट मिल पाते हैं. वहीं, बहराइच में ये आंकड़ा मात्र 4.3% है.

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खून की कमी

चित्रकूट में 15-49 साल की हर तीन में से दो महिलाओं को अनीमिया है. इस मामले में 43 ज़िलों के हालात गोरखपुर से भी ख़राब है.

साफ़-सफ़ाई

खुले में शौच आज भी उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में समस्या बना हुआ है. इस मामले में श्रावस्ती ज़िला सबसे पीछे है, जहां दस में से एक ही घर में शौचालय है. बलरामपुर और गोंडा में भी हालात कम ख़राब नहीं हैं.

ये सब देखते हुए कहा जा सकता है कि जो हम गोरखपुर में देख रहे हैं, वो मात्र उदहारण हैं, बाकि जगहों में भी लोग स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं.