परिवार से बिछुड़ने का क्या दर्द होता है, ये चीनी सैनिक वांग से बेहतर कोई और नहीं बता सकता है. 1962 के भारत-चीन युद्ध में वो ग़लती से भारतीय सीमा में प्रवेश कर गए थे और तब से वे भारत में ही रह रहे हैं. इस बात को हुए 50 साल हो गया, मगर वीज़ा के चक्कर में वे फंसे रहे.

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भारतीय सेना के कब्ज़े में होने के कारण उन्हें जेल में डाल दिया गया. वर्ष 1969 में जेल से छूटने के बाद वह मध्यप्रदेश के बालघाट जिला स्थित तिरोदी गांव में बस गए. हालांकि भारतीय मीडिया में उनकी कहानी कई बार प्रकाशित हो चुकी है लेकिन उनके दुख की झलक पेश करते एक टीवी फीचर को चीनी सोशल मीडिया पर व्यापक तौर पर प्रसारित किया गया. इसके बाद चीनी सरकार ने भारत के साथ मिलकर उनकी वापसी के लिए प्रयास शुरू किया.

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वांग क्वी (77) नामक इस चीनी सैनिक को लेने के लिए उसके करीबी चीनी संबंधियों के अलावा चीनी विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के अधिकारी भी पहुंचे.

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वांग दिल्ली से बीजिंग आने वाले विमान में अपने बेटे, बहू और पोती के साथ आए हैं. 5 दशक से भी अधिक समय पहले सीमा पार कर जाने वाले वांग जब पहली बार अपने चीनी संबंधियों से वापस मिले तो उनसे गले लगकर भावुक हो उठे. हवाईअड्डे पर मौजूद एक अधिकारी ने बताया, यह एक भावनात्मक पुनर्मिलन था.

हालांकि उनकी भारतीय पत्नी सुशीला भारत में ही रूकीं. भारतीय अधिकारियों ने कहा कि वांग और उनके परिवार के सदस्य बाद में शांक्सी प्रांत स्थित प्रांतीय राजधानी शियान गए. वहां से उन्हें उनके मूल गांव शू झाई नान कुन ले जाया जाएगा.

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