University of California के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी में पाया है कि भारत में जो हजारों किसान आत्महत्या कर रहे हैं, उसके पीछे कुछ और नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन है. गौरतलब है कि पिछले 30 सालों में भारत में 59,000 किसानों ने आत्महत्या की है.

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शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि आगे ये दर बढ़ भी सकती है. इसके पीछे वजह है ग्लोबल वॉर्मिंग है. इससे फसल कम हो रही है और किसान गरीब होते जा रहे हैं.

UC Berkeley के शोधकर्ता Tamma Carleton ने कहा कि ये चौंकाने वाला है और दुखद भी. किसान ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां उनके पास अपनी जान ले लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है.

बढ़ते तापमान और कम वर्षा से किसानों की हालत और ख़राब होती जा रही है. ये स्टडी 'Proceedings of the National Academy of Sciences' नाम के जर्नल में प्रकाशित हुई है. 1980 के बाद से किसानों की आत्महत्या की दर दोगुनी हो चुकी है. हर साल लगभग 130,000 किसान आत्महत्या कर रहे हैं.

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दुनिया की 75 प्रतिशत आत्महत्याएं विकासशील देशों में ही होती हैं. स्टडी के अनुसार, 2050 तक तापमान में तीन डिग्री तक की और वृद्धि हो जाएगी. इससे आत्महत्याएं भी बढ़ सकती हैं.

इन दुखद घटनाओं को रोकने के लिए इस मुद्दे पर चर्चा होना और कोई समाधान निकला जाना बेहद ज़रूरी है. भारत सरकार ने फसल बीमा योजना तो शुरू की है, लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि ये इस समस्या से निपटने में कितनी कारगर साबित होगी.

भारत की आधी से ज़्यादा जनसंख्या कमाई के लिए खेती पर निर्भर है. यदि किसानों का ये हाल रहा, तो देश की अर्थव्यवस्था भी कभी नहीं बढ़ पायेगी.

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