दिल्ली में अगर आप मेट्रो से सफ़र कर रहे हैं तो उसमें भीड़ न हो ऐसा संभव ही नहीं है. मेट्रो में सीट मिल जाना तो भगवान को पाने जैसा है. लोगों से ठसाठस भरी मेट्रो में लोग इंसानी बर्ताव को ताक पर रख देते हैं. खुद सीट हड़पने की फ़िराक में घुसते ही धक्कामुक्की करने से भी लोग बाज़ नहीं आते. कुछ खास स्टेशन्स के बीच तो लोग ऐसे चढ़ते हैं, जैसे ये उनके जीवन की आखिरी मेट्रो बची हो. बार-बार अनाउंसमेंट होता रहता है कि कृपया ज़रूरतमंदों को सीट प्रदान करें, फिर भी बुजुर्ग या दिव्यांगों को खड़ा देखते हुए भी सीट पर तशरीफ़ टिकाए लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती.

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महिलाओं का क्या कहना, उनके भी अलग नखरे होते हैं. महिलाओं की सीट पर चाहे कोई भी बैठा हो, भले ही वो निःशक्त हो या उम्र के लम्बे पड़ाव में ढल चुका बुजुर्ग, उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता. कानों में इयर फोन लगाने के बाद वो इंसानियत से भी तौबा कर लेती हैं. कुल मिलाकर कहने का मतलब ये है कि मेट्रो में कैसे बर्ताव किया जाता है, ये उसमें चढ़ने वालों को जानना बहुत ज़रूरी है. इसके लिए लोगों को ट्यूशन देने के लिए एक रेस्टोरेंट खोला गया है. रेस्टोरेंट देखने में भी किसी मेट्रो के कोच की तरह लगता है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्वा लाइन पर बने इस रेस्टोरेंट में लोगों को मेट्रो में सही बर्ताव करने की क्लास दी जाती है.

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मेट्रो में शिष्टाचार की बात सबसे पहले पूर्व DMRC के चीफ ई. श्रीधरन ने की थी. उनका मानना था कि दिल्ली मेट्रो विश्व की सर्वश्रेष्ठ मेट्रो हो सकती है, अगर इसमें यात्रा करने वाले यात्रियों में शिष्टाचार आ जाए तो. CISF के चीफ ओ.पी. सिंह ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि कुछ वालंटियर्स तैयार किये जाएं, जो मेट्रो में सफ़र करने वालों को सही शिष्टाचार सिखा सकें. पर नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन ने इस लक्ष्य को पाने की ठान ली है. दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन के अधिकारियों के अनुसार, नोएडा मेट्रो की इस पहल के पीछे उसके मैनेजिंग डायरेक्टर संतोष यादव का हाथ है.

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हम अकसर देखा करते थे कि अनाउंसमेंट के बाद भी लोग येलो लाइन के बाहर निकल कर खड़े होते थे, जैसे कोई रेस हो. ट्रैक्स पर झांकना और अन्दर जाने की जद्दोजहद उनकी रोज की आदतों में शुमार हो गया था. लाइन में खड़े न रहना तो आम बात हो गयी थी. इसलिए हमने एक कोच जैसा दिखने वाला रेस्टोरेंट बनाया और उसमें आने-वालों को स्नैक्स और पेय देना शुरू कर दिया. इसमें यात्रा के दौरान क्या करना है और क्या नहीं करना है, इन सब बातों के पोस्टर लगे हैं और अनाउंसमेंट भी होते रहते हैं. - अधिकारी, नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन.

जब अधिकारियों से पूछा गया कि आपको ऐसा क्यों लगता है कि लोग इसमें आएंगे और इसकी बातों को अमल में लायेंगे, तो मेट्रो अधिकारी ने जवाब दिया कि लोगों की जिज्ञासा उन्हें यहां खींच लाएगी और इसके लिए उन्हें कोई शुल्क भी नहीं देना होगा.

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आपको बता दें कि रेस्टोरेंट अभी प्लानिंग फेज़ में है और एक्वा लाइन भी इस साल मई-जून में शुरू होने वाली है.

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