राजनीति को सबसे पुराना और गंदा धंधा कहा जाता है. राजतनीति में आने के बाद नेता अकसर अपने विवादित बयानों की वज़ह से मीडिया की सुर्ख़ियों में आ जाते हैं. एक बार फिर से कांग्रेस नेता अपने विवादित बोल की वज़ह से सुर्खियों में हैं.

हम बात कर रहे हैं केरल के कांग्रेस नेता एम.एम. हसन की, जिन्होंने महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर विवादित बयान दिया है. कांग्रेस नेता एम.एम. हसन ने कहा कि पीरियड्स के दौरान महिलाएं अपवित्र हो जाती हैं और इन दिनों उन्हें मंदिर नहीं जाना चाहिए.

महिलाओं को होने वाले मासिक धर्म पर बड़े बोल बोलने वाले नेता हसन यहीं नहीं रुके, बल्कि उन्होंने तो ये तक कह डाला कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण है. उन्होंने मुस्लिम महिलाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि पीरियड्स के दौरान उन्हें रोज़ा रखने की इज़ाजत नहीं होती है. मेरे विचार ऐसे वक़्त में महिलाओं को मंदिर, मस्जिद या चर्च कहीं भी नहीं जाना चाहिए.

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हसन ने ये बयान उस वक़्त दिया जब उन्हें केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अंतरिम अध्यक्ष चुना गया है. एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाषण के दौरान उन्होंने ये बात कही. कई छात्रों ने उनके इस विवादित बयान की आलोचना भी की है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के दवाब के कराण कांग्रेस हाई कमान ने हसन को केपीसीसी का अस्थायी तौर पर प्रसिडेंट बनाया है. वी.एम. सुधीरन के इस्तीफे के बाद से यह पद खाली पड़ा हुआ था. उन्होंने ख़राब स्वास्थ्य के चलते इसी महीने इस्तीफ़ा दिया था.

समेमिनार में मौज़ूद एक लड़की के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मेरी बातों का मतलब सिर्फ़ इतना था कि केवल पाीरियड्स के दौरान महिलाओं को मंदिर नहीं जाना चाहिए. हसन ने ये भी कहा कि पीरियड्स पर ये उनकी निज़ी राय नहीं है, उन्होंने वही कहा जो इस समाज की स्थिति है. मीडिया ने उनके इस बयान को तोड़ मरोड़ कर ग़लत तरीके से पेश किया है.

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जहां एक ओर कई समाजिक संगठन महिलाओं के मंदिर,मस्जिद में प्रवेश के हक के लिए लड़ रहे हैं. वहीं महिलाओं पर नेताओं का ऐसा बयान काफ़ी शर्मनाक और दुखद है.

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