रेलवे में अब और नहीं चलेगी VIP संस्कृति. दरअसल, रेलवे मंत्रालय ने VIP कल्चर पर बड़ा प्रहार करते हुए, 36 साल पुराने प्रोटोकॉल को ख़त्म करने का आदेश जारी किया है.

इस नए आदेश के तहत अब रेलवे का कोई भी अधिकारी अपने निजी कामों के लिए घरों में स्टाफ़ की ड्यूटी नहीं लगा सकता है, इसके साथ ही ऐसा करने वाले अफसरों को तुरंत वर्कर्स को रिलीव करने के ऑर्डर दिए गए हैं. इतना ही नहीं, रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने वरिष्ठ अधिकारियों को Executive श्रेणी में यात्रा करने के बजाए, अन्य यात्रियों के साथ स्लीपर और एसी थ्री-टीयर श्रेणी के डिब्बों में सफ़र करने की हिदायत दी है. वरिष्ठ अधिकारियों की इस सूची में रेलवे बोर्ड के सदस्य, रेलवे जोनों के महाप्रबंधक और सभी 50 मंडलों के रेलवे प्रबंधक शामिल हैं.

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रेल मंत्रालय ने 36 साल पुराने एक प्रोटोकॉल को समाप्त कर दिया है. सालों पुराने इस प्रोटोकॉल के अनुसार, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और बोर्ड के अन्य सदस्यों की क्षेत्रीय यात्राओं के दौरान उनके आगमन और प्रस्थान के समय महाप्रबंधकों की उपस्थति अनिवार्य थी.

गुज़रे 28 सितबंर को मंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए कहा, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और बोर्ड के अन्य सदस्यों की यात्राओं के दौरान हवाईअड्डों और रेलवे स्टेशनों पर अपनाए कॉल के संबंध में रेलवे को जारी दिशानिर्देशों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है.

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साथ ही रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने सख़्त निर्देश देते हुए कहा कि अब से रेलवे का कोई भी अधिकारी बुके या गिफ़्ट नहीं लेगा.

अधिकारियों की मानें, तो रेलवे में काम कर रहे वरिष्ठ अधिकारियों के घरों पर करीब 30 हज़ार ट्रैकमैन काम करते हैं, जिन्हें तुरंत सेवा पर लौटने को कहा गया है. वहीं सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक महीने में करीब 6 से 7 हज़ार लोग काम पर वापस भी लौट आए हैं.

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