प्यारी मां,

तुम्हें वो दिन याद है जब हम मामाजी के यहां गये हुए थे और मैंने उनके बेड पर सूसू कर दी थी? शायद मैं उस वक़्त 9वीं क्लास में थी, लेकिन मुझे मामी की डांट अच्छे से याद है. तुम्हें बिस्तर दिखाते हुए मामी कहने लगी, 'रचना, तेरी बेटी अभी तक बिस्तर पर सूसू करती है... इतनी बड़ी हो गयी है ये...' मैं सुबक-सुबक कर रो रही थी... तुमने मेरी तरफ़ देखा, और मामी को बताने लगी कि दुनिया में बहुत से बच्चों को ये प्रॉब्लम होती है. मैं अकेली नहीं और बड़े होने के साथ ठीक हो जाएगी...

उस दिन सबसे पहली बार लगा था कि तुम मेरे साथ हो.

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स्कूल की वो पेरेंट टीचर मीटिंग भी मैं नहीं भूल सकती, जब मेरे मैथ्स में फ़ेल होने के बाद भी तुमने मुझ पर भरोसा जताया था. पांडे सर को तुमने कहा था कि मैं अच्छे मार्क्स से पास हो कर दिखाउंगी. ये तुम्हारा मुझ पर भरोसा ही था कि मैं इतने अच्छे मार्क्स से मैथ्स में पास हो गयी.

तुम सोच रही होंगी कि मैं इतनी पुरानी बातें क्यों याद कर रही हूं? है न?

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मैं तुम्हें ये बताना चाहती हूं कि तुम मेरे साथ तब थी, जब किसी ने मेरा साथ नहीं दिया, तब भी जब पापा ने कॉलेज में एडमिशन लेने से मना कर दिया था और तब भी जब मैंने प्रेगनेंसी में भी ऑफ़िस जाने का फ़ैसला किया.

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आज मैं तुम्हारा हाथ पकड़ कर तुम्हारे साथ खड़ी होना चाहती हूं... मुझे पता है तुम शर्मिंदा होती हो, जब किसी और को तुम्हारा काम करना पड़ता है या ख़ास कर तब जब तुम ग़लती से बिस्तर गीला कर देती हो... लेकिन मैं शर्मिंदा नहीं हूं... उम्र के साथ शरीर में ये बदलाव आते हैं और इसमें कुछ भी ग़लत नहीं. मैंने आज Urinary Incontinence के बारे में पढ़ा, ये कोई बीमारी नहीं, एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें यूरिन कंट्रोल करने वाला फंक्शन ढंग से काम नहीं करता. बढ़ती उम्र के साथ ये प्रॉब्लम सबके साथ होती है, तुम अकेली नहीं हो. समझी?

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और हां, तुम्हारी अल्मारी में Friends Diapers का पैकेट रख दिया है. ये बड़े बच्चों का डायपर है, इस्तेमाल करने का तरीका भी पैकेट पर लिखा हुआ है. इसके बाद तुम्हें शर्मिंदा होने की ज़रूरत नहीं. याद रखना मेरी नज़र में तुम हमेशा एक Strong, आत्मनिर्भर महिला रहोगी और मेरी रोल मॉडल भी.

तुम्हारी Friend!

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