कुछ फ़िल्में ज़िंदगी की असल घटनाओं पर आधारित होती हैं. कुछ असल घटनाएं फ़िल्मों से प्रेरित होती हैं. पिछले साल रिलीज़ हुई फ़िल्म 'हिन्दी मीडियम' तो देखी होगी आपने. उसी फ़िल्म की तरह दिल्ली के रहने वाले एक शख़्स ने इरफ़ान ख़ान बनने की कोशिश की. लेकिन इसने ये कांड तब कर दिखाया था, जब फ़िल्म रिलीज़ भी नहीं हुई थी.

नियम के अनुसार प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीट आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके के परिवारों के बच्चों के लिए आरक्षित होता है. दिल्ली के गौरव गोयल ने जाली दस्तावेज़ों की मदद से 2013 में अपने बेटे का एडमिशन चाणक्यपुरी के संस्कृति स्कूल में करा दिया था. कागज़ात में उसने अपनी वार्षिक आय 67 हज़ार बताई, निवास स्थान संजय कैंप (दिल्ली का एक स्लम एरिया) दर्शाया. संजय गोयल ने स्कूल को बताया कि वो एक MRI सेंटर में काम करता है.

सब कुछ प्लान के हिसाब से चल रहा था. इस झूठी कहानी पर चार साल तक किसी को शक़ नहीं हुआ. इस बीच कई बार स्कूल में मीटिंग भी हुई, बच्चे का बर्ताव भी ऐसा था जैसे वो ग़रीब परिवार का ही रहने वाला है. इससे गौरव गोयल का आत्मविश्वास बढ़ गया और उसनी एक ग़लती कर दी. अपने छोटे बेटे का ए़डमिशन भी वो इसी तरह कराने की फ़िराक मे लग गया.

अब गौरव स्कूल प्रशासन की नज़र में आ चुका था. उसके दस्तावेज़ों की गहराई से जांच-पड़ताल होने लगी, जिससे उसकी हरकतों पर शक बढ़ता जा रहा था. अपने दूसरे बेटे के एडमिशन में उसने अपना निवास स्थान बदल कर सफ़दरजंग इन्क्लेव बताया, जिससे प्रशासन का शक पुख़्ता हो गया.

पुलिस की जांच में पता चला कि गौरव गोयल 20 देशों में घूम चुका है, दाल का थोक व्यापारी है और एक MRI लैब का मालिक भी है. MCD,FRPO और IT तक जांच की लपटें पहुंची तो उसका सारा कच्चा-चिट्ठा खुल गया. गोयल की गिरफ़्तारी हो गई है. दिल्ली पुलिस के DCP ने बताया कि स्कूल के अधिकारियों की मदद के बिना ये फ़र्जिवाड़ा मुमकिन न था. मदद करने वाले अधिकारियों की भी जांच की जाएगी.

Source: timesofindia