भारत में किसानों के हालात किसी से नहीं छिपे, हर साल हज़ारो किसान गरीबी और कर्ज़ के तले दब कर आत्महत्या कर लेते हैं. इसके पीछे कई कारण हैं. इनके सुधार के लिए कोई उपाए नहीं दिख रहा.

लेकिन कुछ किसान हैं, जिन्होंने अपने जीवन में बदलाव कर लिया है. ऐसे ही एक किसान हैं राम महाजन, जिन्होंने न सिर्फ़ खेती के मायने बदले, बल्कि उसमें बड़ी ख़्याती भी प्राप्त की. कैसे? राम महाजन जी ने मोती की खेती शुरू की है. अपने खेत को तालाब में तबदील कर के उन्होंने मोती बनाने शुरू किए. इसके लिए उन्होंने पढ़ाई की, प्रशिक्षण लिया और पास की नदी से सीप ला कर मन चाहे आकार के मोती बनाना सीखा. इतना ही नहीं अब उनका मन है कि वो काले मोती की पैदावार भी शुरू करें.

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धामनोद जिले में राम महाजन कोई पहले किसान नहीं हैं, जिन्होंने मोती की खेती शुरू की. सबसे पहले यहां भगवान विट्ठल नाम के किसान ने तालाब बना कर इसकी शुरुआत की थी. इन मोतियों को वैज्ञानिक प्रकिया के तहत बनाया जाता है.

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लेकिन इस खेती को आसान समझने की गलती न करें. एक मोती को बनने में करीब 14 महीने का वक़्त लगता है. इसमें धैर्य की आवश्यक्ता होती है. किसान बताते हैं कि जितना ज़्यादा समय दिया जाता है, उतनी बेहतरीन क्वालिटी का मोती बन सकता है.

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इस विज्ञान को सिखाने के लिए सरकार ने कई मुफ़्त संस्थान खोले हैं. लेकिन उनकी संख्या इतनी ज़्यादा नहीं है. ऐसे में किसान निजी संस्थानों का रुख कर सकते हैं.