नोटबंदी की घोषणा हुए महीनों बीत गये, मगर उससे जुड़ी बातें हैं कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं. नोटबंदी के बाद से ही सरकार और उसके फ़ैसले विवादों में रहे हैं. अब नई ख़बर ये आई है कि 8 नवंबर 2016 की जिस रात को पीएम नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर कर दो हज़ार के नोटों को चलन में ला दिया, उसकी योजना लगभग साल भर पहले तय हो गई थी. मोदी सरकार का दावा रहा है कि दो हज़ार के नोट के बारे में किसी को ख़बर भी नहीं थी. मगर सूत्रों की मानें, तो दो हज़ार के करंसी नोट का डिज़ाइन और उसका ब्लू प्रिंट लगभग एक साल पहले ही तैयार कर लिया गया था. बाज़ार में 2000 रुपये के नोटों का चलन 10 नवंबर 2016 से शुरू हो गया था.

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इसके अलावा, दो हज़ार रुपये के करंसी नोट की छपाई 8 नवंबर की रात हुई घोषणा से पहले ही शुरू हो गई थी. इससे साफ़ समझ आता है कि प्रधानमंत्री मोदी दीवाली के अवसर पर 30 अक्टूबर को दो हज़ार के नोट भारतीयों के लिए गिफ़्ट के रूप में लाने वाले थे. BOOM की एक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टी हुई है.

BOOM के मुताबिक, दिलचस्प बात ये है कि दो हज़ार के नोट लाने की एक मुख्य वजह मंहगाई अथवा मुद्रास्फिती भी थी.

BOOM से बातचीत में बैंकर्स ने इस बात की पुष्टी की है कि 8 नवंबर से पहले ही कुछ जगहों पर दो हज़ार के नोट पहुंच चुके थे. हालांकि, उस टाइम इसे नोटबंदी से जोड़कर नहीं देखा जा रहा था.

दो हज़ार के नोट पर भले ही भारतीय रिज़र्व बैंक के वर्तमान गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर हों, मगर इस नोट को लाने की दिशा में उसके डिज़ाइन और ब्लू प्रिंट पर काम भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के समय से ही शुरू हो गया था.

हालांकि, ये बात भी सच है कि नोटबंदी की घोषणा से पहले दो हज़ार के नोट को चलन में लाने के लिए सरकार और आरबीआई दोनों ज़रा असहमत थे. यही कारण है कि नोटबंदी के बाद लाखों-करोड़ों भारतीयों को एटीएम के सामने खड़े होकर परेशानियों का सामना करना पड़ा.

अगर नोटबंदी की घोषणा नहीं भी होती, तब सरकार की मुख्य मंशा थी कि दो हज़ार के नोट को भारतीय करंसी के गिरते स्तर को बचाने के रूप में लाया जाए. अगर ऐसा हो भी जाता, तो आम आदमी के लिए ये बड़ी समस्या खड़ी कर देता और इतने बड़े नोट का खुदरा हासिल करना मुश्किल काम हो जाता.

समाचार पत्र ने हाल ही में ये ख़बर दी है कि रघुराम राजन के कार्यकाल के दौरान 5000 रु. और 10000 रु. के नोट को भी लाने का सुझाव दिया गया था. इसके अलावा एक हज़ार के नोट को ख़त्म करने की भी योजना थी.

हालांकि, सरकार ने पांच हज़ार और दस हज़ार के नोट की सिफारिश को नामंज़ूर कर दिया और दो हज़ार के नोट लाने के लिए हामी भर दी. मगर ये किसी को उम्मीद नहीं थी कि इस करंसी को नोटबंदी के साथ ही लाया जाएगा.

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा लोक लेखा समिति को उपलब्ध करायी गई जानकारी में ये कहा गया कि केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर 2014 में इसकी सिरफारिश की थी.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग मई 2016 में सरकार ने आरबीआई को दो हज़ार के नोटों की सीरीज़ को लाने के निर्णय के बारे में जानकारी दे दी थी.

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