त्योहारों का मौसम आ गया है और सभी लोग चाहते हैं कि वो साफ़-सुथरा और हेल्दी त्योहार मनाएं, जिससे न तो उन्हें कोई परेशानी हो और न ही हमारे पर्यावरण को. इसी की ओर कदम बढ़ाते हुए, आजकल इको-फ़्रेंडली मूर्तियां बनने लग गई हैं. इन मूर्तियों में इस्तेमाल किए जाने वाले मटेरियल से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता है. ये बात ज़रूर है कि इको-फ़्रेंडली मटेरियल इस्तेमाल करने की वजह से इनकी क़ीमत प्लास्टर ऑफ़ पेरिस से बनी मूर्तियों से ज़्यादा होती है.

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आईए जानते हैं कैसे बनती हैं ये मूर्तियां और क्या-क्या हैं इनके फ़ायदे...

किन चीज़ों से बनाई जाती हैं Eco-Friendly मूर्तियां:

बांस, मिट्टी, पुआल, रस्सी, कागज़, गत्ता, ड्रॉइंग शीट, रंगीन सूती कपड़ा, आटा, गोंद, कपड़े और भूसे से Eco-Friendly मूर्तियां बनाई जाती हैं. इनमें हर्बल पेंट का इस्तेमाल किया जाता है. यहां तक कि माता की मूर्ति का श्रंगार जैसे, साड़ी, किराना, गोटा, चूड़ी, बाल, पायल, मुकुट आदि सब मिट्टी से बनाए जाते हैं. ये मिट्टी को आकार देते समय ही ढाल दिए जाते हैं. इन मूर्तियों को बनाने में काफ़ी समय और मेहनत लगती है.

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पर्यावरण को सुरक्षित करने की तरफ़ एक कदम बढ़ाते हुए गोरखपुर के साहबगंज किराना मंडी में रहने वाले 63 साल के प्रवीण विश्वास ने मसूर दाल की Eco-Friendly माता की मूर्ति बनाई है. एक मूर्ति की कीमत 40 हज़ार रुपये है.

इन मूर्तियों में ज़रा-सा भी पीओपी (प्लास्टर ऑफ़ पेरिस) और रसायनिक पेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है. हर्बल पेंट की उपलब्धता कम होने और महंगा होने के बावजूद कलाकारों ने इसे अलग-अलग शहरों से मंगाया है. ये हर्बल पेंट भी घर में कूट-पीस कर बनाया जाता है. इसको बनाने में बहुत समय और मेहनत लगती है. इस पेंट की कीमत रसायनिक पेंट से दोगुनी होती है.

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क्यों न लें प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की मूर्तियां:

पीओपी यानि प्लास्टर ऑफ़ पेरिस से तैयार की गई मूर्तियां देखने में बहुत सुंदर लगती हैं. मगर इन मूर्तियों में इस्तेमाल किया जाना वाला रासायनिक पेंट और पीओपी दोनों ही हमारे पर्यावरण के लिए अच्छे नहीं होते हैं. इससे पानी में रहने वाले जीवों को भी नुकसान होता है.

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क्यों लें मिट्टी की मूर्ति:

मिट्टी की मूर्तियां पर्यावरण और हमारे स्वास्थ, दोनों के लिए उपयोगी होती हैं. इनमें किसी तरह का हानिकारक केमिकल नहीं इस्तेमाल किया जाता है. इसकी वजह से ये महंगी होती हैं, लेकिन अगर आप पर्यावरण की नज़र से देखें, तो ये मूल्य नाम मात्र होगा. इसलिए मिट्टी से बनीं मर्तियां ही खरीदें क्योंकि मिट्टी को श्रद्धा का प्रतीक भी माना जाता है.