शायद जब से दुनिया बनी है, तब से इंसान और कुत्तों की दोस्ती का रिश्ता चला आ रहा है. हालांकि समय के साथ-साथ इंसान बदल गया और इस रिश्ते से अपना मुंह मोड़ने लगा, पर कुत्तों ने आज भी अपनी वफ़ादारी में कोई कमी नहीं आने दी.

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इसका जीता-जगाता उदाहरण कुछ दिनों पहले ही पश्चिम बंगाल के हावड़ा में देखने को मिला, जहां कुत्तों ने एक त्यागे हुए नवजात को बचाया है. 'संगबाद प्रतिदिन' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जब कुत्तों को एहसास हुआ कि नवजात को छोड़ दिया गया है, तो उन्होंने बच्चे के इर्द-गिर्द एक सुरक्षा घेरा बना लिया.

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इस बीच यहां से कई लोग आये और बच्चे को नज़रअंदाज़ करके निकल गए. इसके बावजूद कुत्ते मदद के इंतज़ार में वहीं रहे और खाने की तलाश में भी कहीं नहीं गए. इस बीच एक RPF जवान की नज़र इस तरफ़ गई, जिसके बाद रेलवे अधिकारियों ने बच्चे की जान बचाई.

इससे पहले भी पश्चिम बंगाल के पुरुलिया डिस्ट्रिक्ट में 1996 में चार कुत्तों ने एक नवजात की जान बचाई थी. 1996 की ये तस्वीर एक बांग्ला अख़बार 'आजकल' का हिस्सा थी, जिसे अख़बार ने 23 मई 1996 के अंक में प्रकाशित किया था. अख़बार ने ख़बर में छापा था कि एक नवजात बच्ची को कूड़ेदान में मरने के लिए फेंक दिया गया था, पर तीन कुत्ते रात भर बच्ची के आस-पास पहरा देते रहे और 24 मई को भी बच्ची को देखते रहे. अगली सुबह जब लोगों की नज़र बच्ची पर गई, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद बच्ची को बचाया गया. 1996 की ये तस्वीर एक बार फिर सुर्ख़ियों के केंद्र में आई और वायरल होने लगी.

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इस कहानी को The Voice of Stray Dogs नाम के एक फ़ेसबुक पेज ने लोगों के साथ शेयर किया.

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