80 के अंत और 90 की शुरुआत का समय दूरदर्शन का वो दौर जिसने उस वक़्त के लोगों को फिर चाहे वो बच्चे हों या बड़े सबको यादगार मनोरंजन दिया जिन लोगों का बचपन 90 के सीरियल्स देख कर गुज़रा है वो इस चीज़ से भलीभांति वाकिफ़ होंगे. वो ऐसा दौर था जब बच्चों के रविवार यानि की छुट्टी के दिन की शुरुआत दूरदर्शन के लोगो की धुन से शुरू होती होगी. उसके बाद बारी-बारी समाचार, महाभारत, कार्टून, और मिले सुर मेरा तुम्हारा... जैसे म्यूज़िकल कार्यक्रमों से होती होगी. और अगर बात की जाए 90 के दशक के बेहतरीन सीरियल्स के टाइटल ट्रैक की तो ये कहना गलत नहीं होगा कि वो एक ऐसा दौर था जब सीरियल्स और विज्ञापनों का म्यूज़िक उनकी पहचान था. मेरा मानना है कि आज भी अगर वो म्यूज़िक कहीं सुनाई दे जाता है तो केवल धुन ही काफ़ी होती ये ये बताने के लिए कि कौन सा सीरियल है या विज्ञापन है.

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आज हम आपको उस दौर के कुछ ऐसे ही म्यूज़िक को एक बार फिर सुनवाने जा रहे हैं. हमारा दावा है कि इसके ज़रिये आप एक बार फिर उस दौर में चले जाएंगे, जब पूरा परिवार साथ बैठकर टीवी देखा करता था.

1. मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा...

15 अगस्त 1988 को दूरदर्शन पर रिलीज़ हुआ गीत था, मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा. इस गीत में हिंदुस्तान में बोली जाने वाली 14 भाषाओं में 'मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा' का अनुवाद किया गया था. पूरे देश को एक सुर में बांधने वाले इस गीत के बोल अद्वितीय हैं और इन बोलों की लिखा था सुरेश माथुर ने. अगर आपको याद हो तो इसमें बॉलीवुड, खेल जगत की कई हस्तियों सहित पंडित भीम सेन जोशी भी नज़र आये थे. क्यों आ गया न ज़ुबान पर ये गीत तो अब सुन भी लीजिये.

2. स्कूल चलें हम...

सर्व शिक्षा अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ये गीत बनाया गया था. बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से बनाये गए इस गीत को स्वरबद्ध किया है प्रसिद्ध गायक शान ने और इसका संगीत निर्देशन किया है ऋषिकेश पांडे ने. इस गीत के बोल भी ऋषिकेश पांडे के ही हैं.

3. महाभारत...

महाभारत नाम आते ही सबसे पहले उसका टाइटल ट्रैक याद आता है. उस टाइम में जैसे ही टाइटल ट्रैक आता था वैसे ही लोगों के सारे काम बंद हो जाते थे और पूरा परिवार टीवी के सामने होता था. मुझे अच्छे से याद है मेरे घर में रविवार को सुबह 9 बजते ही सब लोग हॉल में इकठ्ठा हो जाते थे और महाभारत देखते थे. मजाल थी जो उस बीच कोई अपनी कुर्सी से उठता भी हो.

4. जंगल-जंगल बात चली है... (मोगली जंगल बुक)

मोगली उस दौर का बच्चों का सबसे लोकप्रिय कार्टून हुआ करता था, बच्चे ही क्या बड़े भी इसे शौक से देखते थे. सीरियल तो सीरियल इसका टाइटल ट्रैक जंगल-जंगल बात चली है पता चला है... भी बच्चों की ज़ुबान पर चढ़ा हुआ था. उस ज़माने के बच्चे अब अपने बच्चों को ये गाना सुनाते हैं.

5. शक्तिमान...

शक्तिमान सुपरहीरो पर आधारित एक भारतीय काल्पनिक दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला धारावाहिक था. बच्चे इसको बहुत पसंद करते थे. दूरदर्शन नेशनल इसके 400 से अधिक एपिसोड प्रसारित किये गए थे. इसका टाइटल ट्रैक भी बच्चों में काफ़ी लोकप्रिय था.

6. एक चिड़िया अनेक चिड़िया...

ये गीत या कविता तो आप सबको याद ही होगी. इसमें एक दीदी बड़े ही सुरीले अंदाज़ में 'अनेक' का मतलब बताती हैं. क्यों याद आया या नहीं?

7. तरंग-तरंग...

दूरदर्शन पर बच्चों के लिए रोचक और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम तरंग आता था. तरंग का शुरुआती गाना था, सीआईईटी लेकर आया तरंग तरंग, उमंग है तरंग, पहेली पहली पहली है तरंग, मज़ा मज़ा मज़ा है तरंग––. इसके मुख्य किरदारों लाल बुझक्कड़ चाचा, गोपू और गीतू और उनकी बातें बच्चों से मिलती हुई लगती थी.

8. सुरभि...

सुरभि एक दूरदर्शन का पहला ऐसा कार्यक्रम था जिसमें डेली प्रतियोगिता होती थी और इनाम भी दिया जाता था. इसमें भारत की संस्कृति और सामान्य ज्ञान से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते थे. जिनके जवाब में लाखों लोग उत्तर भेजते थे. इसका टाइटल ट्रैक आज भी मेरे कानों में अनायास ही गूंजने लगता है. इस कार्यक्रम की शुरुआत सिद्धार्थ काक और रेणुका शहाणे की आवाज़ में होती थी.

9. मालगुडी डेज़...

एक बच्चे की कहानी दिखाते मालगुडी डेज़ के टाइटल ट्रैक के बारे ेमिन कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं है. मालगुडी डेज़ नाम आते ही खुद-ब-खुद कानों में उसका ट्रैक बजने लगता है.

10. अमूल द टेस्ट ऑफ़ इंडिया...

घर-घर की पहली पसंद 'अमूल' का विज्ञापन हर हिन्दुस्तानी की जुबां पर रहता है.

11. दूरदर्शन का म्यूज़िक...

दूरदर्शन का अपना जो म्यूज़िक था वो भी बहुत अद्भुत था. वो म्यूज़िक हर न्यूज़ बुलेटिन के शुरू होने से पहले और ख़त्म होने के बाद तो ज़रूर ही आता था. और दूरदर्शन पर दिन की शुरुआत भी इसी म्यूज़िक से होती थी.

12. चित्रहार...

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चित्रहार उस दौर का ऐसा कार्यक्रम था जिसका हर किसी को बेसब्री से इंतज़ार रहता था. दूरदर्शन पर कार्यक्रम 15 अगस्त 1982 को शुरू हुआ था और आज तक ये बिना रुके चल रहा है. इसमें फ़िल्मी गीत दिखाए और सुनाये जाते थे. भारतीय टेलीविजन के इतिहास में सबसे लम्बा चलने वाला कार्यक्रम है चित्रहार. मुझे याद है मेरे दादा जी हम सभी बच्चों को चित्रहार देखने के लिए बहुत डांटते थे.

13. चंद्रकांता...

दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला सीरियल चंद्रकांता बच्चों के बीच काफ़ी लोकप्रिय था. देवकी नंदन खत्री के नॉवेल से प्रेरित इस नाटक के क्रूर सिंह को लोगों ने काफ़ी पसंद किया. इस सीरियल को देखने के लिए पूरे हफ्ते रविवार आने का बेसब्री से इंतज़ार किया जाता था. इसका टाइटल ट्रैक भी लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हुआ था.

14. भारत एक खोज...

दूरदर्शन पर 1988 में शुरू हुए श्याम बेनेगल के सीरियल 'भारत एक खोज' से हर कोई वाकिफ़ होगा. इस सीरियल के हर एपिसोड की शुरुआत में ऋग्वेद से लिए गए श्लोक जिसका अर्थ 'सृष्टि से पहले सत नहीं था असत भी नहीं अंतरिक्ष भी नहीं; आकाश भी नहीं था छिपा था क्या, कहाँ किसने ढका था उस पल तो अगम अतल जल भी कहां था...' पंक्तियों को सुनाया जाता था. ये कार्यक्रम देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु जी की लिखी किताब डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया पर आधारित था. इस कार्यक्रम के कुल 53 एपिसोड्स प्रसारित किये गए थे. इसका म्यूज़िक अपने आप में काफ़ी अलग और रोंगटे खड़े कर देने वाला था.

15. रामायण...

रामायण दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले लोकप्रिय कार्यक्रमों में से एक था. रामानंद सागर द्वारा प्रायोजित ये सीरियल 1987 को दूरदर्शन पर शुरू हुआ था. कार्यक्रम की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब इसके प्रसारण का टाइम होता था लोग हाथ में फूल और आरती तक लेकर बैठते थे क्योंकि वो इसके मुख्य किरदारों को भगवान के रूप में असल के राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान पूजने लगे थे. इसका म्यूज़िक कानों को सुकून और ज़िन्दगी में शान्ति लाता था.

16. ॐ नमः शिवाय...

डीडी नेशनल पर 1997 में शुरू हुए धार्मिक सीरियल 'ॐ नमः शिवाय' का म्यूज़िक और उस संगीत पर भगवान शिव की अग्नि रूपी आकृति का तांडव नृत्य देखना अपने आप ही रोमांचक था. अगर आपने ये सीरियल देखा है तो आप इस बात को बख़ूबी समझ सकते हैं.

17. डक टेल्स...

दूरदर्शन के ज़माने में टीवी पर केवल रविवार को कार्टून आते थे. जिनमें डिज्नी के कार्टून हिंदी में डब करके दिखाए जाते थे जैसे टेलस्पिन, डक टेल्स, अलादीन, ऐलिस इन वंडरलैंड आदि. और इनके गीत बच्चों के लिए स्कूल की किताबों वाली कविताओं से ज़्यादा मज़ेदार होते थे.

18. फ़्लॉप शो...

एक आम इंसान की रोज़मर्रा की जिंदगी और उसकी परेशानियों को कॉमेडी के ज़रिये दर्शकों तक पहुंचाने का काम किया जसपाल भट्टी के 'फ़्लॉप शो' ने. दूरदर्शन पर ये कॉमेडी 90 के दशक में आती थी और दर्शकों को गुदगुदा जाती थी. आपकी जाकारी के लिए बता दें कि इस कार्यक्रम के केवल 10 एपिसोड्स ही प्रसारित हुए थे लेकिन दर्शकों को ये इतने पसंद आये कि बार-बार इनको दिखाया गया.

19. छिपकली के नाना हैं...

इनमें कहने वाली कोई बात नहीं है कि ये कार्यक्रम भी उस दौर के दूरदर्शन का बच्चों का सबसे लोकप्रिय कार्टून था और इसका गाना आज भी लोगों को पूरा याद होगा.

20. अलिफ़ लैला...

90 के दशक का एक सुपरहिट धारावाहिक अलिफ़ लैला था. इसकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर उम्र के लोगों द्वारा इसे बहुत पसंद किया गया. रामायण के बाद रामानंद सागर प्रोडक्शन द्वारा प्रस्तुत किया गया अलिफ़ लैला दूसरा सबसे लोकप्रिय धारावाहिक था. इसे 1994 में दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया था.

21. जय हनुमान

अंत में मैं सिर्फ़ ये कहना चाहूंगी कि जो लोग 80's के अंत और 90's की शुरुआत की पैदाइश हैं उनके लिए मनोरंजन का मतलब सिर्फ़ और सिर्फ़ दूरदर्शन था. अगर आप भी मेरी इस बात से सहमत हैं तो कमेंट बॉक्स में बताएं. और हां, अगर हम कुछ भूल गए हों, तो वो भी आप बता सकते हैं.