अपनी कमजोरी को अगर आप अपनी असफ़लता का कारण मानते हैं, तो आप वाकई मन से हारे हुए इंसान हैं. कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो ज़िंदगी की सारी चुनौतियों को चकमा देकर सफ़ल हो जाते हैं. सच कहा गया है, जिसके मन में किसी लक्ष्य को हासिल करने का ख्याल आ जाता है, वो अपनी कमजोरियां और मजबूरी नहीं देखता. ओडिशा सिविल सर्विस एग्ज़ामिनेशन में 670 कैंडिडेट्स ने जगह बनाई है. पर इन 670 में से आठ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने न सिर्फ़ एग्ज़ाम में सफ़लता पाई है, बल्कि एक मिसाल कायम की है.

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इन्हीं में से एक हैं संन्यास बेहेरा, जिनका शिक्षक की सरकारी नौकरी के लिए आवेदन हर बार रिजेक्ट कर दिया गया. लेकिन संन्यास ने इस परीक्षा में Visually-Challenged केटेगरी में टॉप किया. इसी तरह एक और सुकांति दश, जो पोस्ट ग्रेजुएट थे, लाख कोशिशों के बावजूद एक नौकरी नहीं पा सके. सुकांति ने अपनी सारी नाकामियों को इस परीक्षा में धो डाला और इस परीक्षा में टॉप कर सबको अपनी विद्वता का लोहा मनवा दिया. कोरातपुर के ऑटो चालक की बेटी सस्मिता कुमारी जेना भी दृष्टि-बाध्य थीं, उन्होंने भी अपनी शारीरिक कमज़ोरी को हरा कर आखिर सफ़लता की सीढ़ी पा ली.

UPSC ने 2006 से Visually Impaired कैंडिडेट्स को परीक्षा देने की अनुमति दे दी है. पर ओडिशा पब्लिक सर्विस कमीशन 2015 तक इस अनुमति की अवहेलना करता रहा. बाद में ओडिशा हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कमीशन को इन परीक्षार्थियों को अनुमति देने का निर्देश दिया. हाई कोर्ट के निर्देश देने के अगले ही साल आठ परीक्षार्थियों ने अच्छे नम्बरों से सफ़ल होकर खुद को प्रथम श्रेणी का अधिकारी बनने के योग्य साबित कर दिया.

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