साल 1968 में एक बेहतरीन कॉमेडी फ़िल्म आई थी, जिसका नाम था 'पड़ोसन'. ये फ़िल्म आज भी बॉलीवुड की बेहतरीन कॉमेडी फ़िल्मों में से एक मानी जाती है. भले ही इस फ़िल्म के मुख़्य कलाकार सुनील दत्त और सायरा बानो थे, लेकिन पूरी फ़िल्म में महमूद ही छाए रहे. महमूद साहब ने इस फ़िल्म को अपनी लाजवाब कॉमेडी से यादगार बना दिया.

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इस फ़िल्म की एक और ख़ासियत थी, वो था इसका 'एक चतुर नार' गाना. ये गाना आज भी बॉलीवुड के बेहतरीन गानों में से एक है. किसी लड़की को इंप्रेस करने की ऐसी जुगलबंदी शायद ही आपने पहले कभी देखी हो.

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किशोर कुमार और मन्ना डे की बेहतरीन गायकी ने इस गाने को बॉलीवुड का सदाबहार गाना बना दिया था. 'पड़ोसन' फ़िल्म में किशोर दा भी हैं जो सुनील दत्त के लिए गाते हुए नज़र आते हैं. वहीं दूसरी ओर द ग्रेट महमूद मन्ना डे की आवाज़ में लाजवाब दिखते हैं.

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आज हम इसी गाने की चर्चा करने वाले हैं और बताना चाहते हैं कि जिस गाने को आज तक आप उस दौर की सबसे बेहतरीन ख़ोज समझ बैठे थे. दरअसल, वो आइकॉनिक सॉन्ग किशोर दा के भाई अशोक कुमार के एक पुराने गाने से प्रेरित है. इस गाने को सबसे पहले साल 1941 में आई फ़िल्म 'झूला' में अशोक कुमार ने गाया था. जिसे बाद में पड़ोसन फ़िल्म में एक अलग तरीके से पेश किया गया.

जानकारी दे दें कि 'झूला' फ़िल्म 1941 की सबसे सफ़ल फ़िल्म थी, जिसमें अशोक कुमार मुख़्य भूमिका में दिखे थे.

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दरअसल, किशोर दा इस गाने को अपने भाई अशोक कुमार की याद में 'पड़ोसन' फ़िल्म में रखना चाहते थे. फ़िल्म के म्यूज़िक डायरेक्टर आर. डी. बर्मन ने उनकी ये बात मान ली और आज ये गाना बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन गानों में से एक है.

इस गाने को 'पड़ोसन' फ़िल्म के लिए राजेंदर कृष्ण ने लिखा था, लेकिन किशोर कुमार ने भी इसमें अपनी ओर से कई चीज़ें डाली थी.