आस्था के नाम पर ज़्यादातर लोग अन्धविश्वास को बढ़ावा देते हैं. बड़े ही अफ़सोस की बात है कि आज भी हम इस अंधविश्वास से भरे समाज का हिस्सा हैं. कनार्टक के बेल्लारी गांव के लोग सूखे की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. बूंद-बूंद पानी को तरसते ग्रामीणों ने अंधविश्वास के नाम पर, एक हैरान कर देने वाला कारनामा कर डाला है.

गांव वालों ने रुष्ठ देवता को मानने के लिए रातों-रात पानी से भरी हुई रामदुर्गा झील को खाली कर दिया. ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने ये सब भगवान के कहने पर किया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ग्रामीण सुबह पानी से भरी झील को एकदम खाली देखकर आश्चर्य में पड़ गए, उनके लिए ये दृश्य नामुकिन दृश्यों में से एक था. लबालब पानी से भरी रामदुर्गा झील एकदम खाली पड़ी हुई थी. मछलियां झील किनारे पहुंच चुकी थी, वो थोड़े से बचे हुए पानी में जीवन बचाने के लिए फड़फड़ा रही थी.

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घटना बीते बुधवार की है. कुछ युवाओं ने रात को झील की बंधेज तोड़कर पूरा पानी नहरों में बहा दिया है. गांव के एक बुज़ुर्ग ने बताया, ‘लड़कों का दावा है कि उन्होंने दैवीय वाणी (भगवान की आवाज़) सुनी थी. भगवान ने युवकों से कहा, जब तक झील पूरी तरह ख़ाली नहीं होती गांव में अच्छी बारिश नहीं होगी. इसलिए उन्होंने झील का पानी बहा दिया, ताकि नाराज़ देवता प्रसन्न हो जाएं.’

ख़बरों के मुताबिक, पिछले कई सालों से इलाके में अच्छी बारिश नहीं हुई है. तीन सालों से झील लबालब भरी हुई थी. इस कारण गांव के देवता नाराज़ थे. झील खाली करने से ग्रामीणों के रुठे हुए देवता ख़ुश हो जाएंगे.

बीते गुरुवार को जिला अधिकारी ने गांव और सूखी झील का दौरा किया. तहसीलदार एल कृष्णमूर्ति ने कहा, 'वे ग्रामीणों से आग्रह करेंगे कि भविष्य में पानी बर्बाद न करें.'

तालाब खाली होने के बाद न जाने कितनी बेजुबान मछलियों की मौत हो जाएगी. अंधविश्वास का ये पहला किस्सा नहीं है. ऐसे तमाम किस्से हम अख़बारों में पढ़ते और टीवी पर देखते रहते हैं. एक तरफ़ हम हाईटेक युग और तरक्की की बात करते हैं, दूसरी ओर अंधविश्वास की वजह से ऐसे कारनामें कर डालते हैं.

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