पैंडमिक में साल 2020. बहुत से लोग ये कह रहे हैं कि अगर इस साल हमने बस सर्वाइव कर लिया तो यही काफ़ी है. पैंडमिक के अलावा भी इस साल हमारा सामना कई समस्याओं से हुआ. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले बढ़े, अर्थव्यवस्था की कमर टूटी, दलितों, ब्लैक्स के साथ हिंसा भी हुई. चरैवैति-चरैवैति फ़ॉर्मूला को अपनाते हुए हम 2021 में प्रवेश करने वाले हैं.


अगर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की बात करें तो इसने भी पैंडमिक की मार झेली, काम के अभाव में कई आर्टिस्ट्स ने ज़िन्दगी भी खो दी. एक चीज़ जो 2020 में नहीं बदली वो थी 'महिलाओं पर आधारित' फ़िल्में. अजीब बात तो यही है कि हमारे पास ये एक कैटगरी है और आज भी हीरोज़ पर आधारित कहानियों की मांग ज़्यादा है. हीरोज़ की आय भी ज़्यादा है, ख़ैर, उस पर फिर कभी बात करेंगे.

सारी तूतू-मैंमैं से इतर इस बात से तो हम सभी सहमत होंगे कि 2020 में हमें कई तरह के महिला किरदारों पर आधारित फ़िल्में और वेब सीरीज़ देखने को मिलीं. ये रही चुनिंदा 20 फ़िल्मों, सीरीज़ की सूची-

फ़िल्म

1. छपाक 

Source: Times of India

भारत में एसिड की बिक्री पर रोक है लेकिन एसिड अटैक पर रोक नहीं लग पाई है. ये एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की, ज़िन्दगी में कुछ कर गुज़रने की जद्दो-जहद और दुपट्टे के बिना घूमने के लिए आत्मविश्वास दोबारा हासिल करने की कहानी है. मालती के किरदार में दीपिका पाडुकोण ने दमदार अभिनय किया है. फ़िल्म का निर्देशन मेघना गुलज़ार का है और फ़िल्म की सबसे प्यारी बात है कि इसमें एसिड एटैक सर्वाइवर्स ने भी अभिनय किया है. 

2. शकुंतला देवी 

Source: Twitter

ह्यूमन कंप्यूटर, शकुंतला देवी की बायोपिक है शकुंतला देवी. विद्या बालन ने कंप्यूटर से भी तेज़ मैथ्स करने वाली शकुंतला देवी के किरदार को बखूबी निभाया है. इस फ़िल्म में शकुंतला देवी और मैथ्स ही नहीं, शकुंतला देवी और उनके निजी जीवन के भी कई पहुलओं को दर्शाया गया है. ये कहानी एक ऐसी महिला की है जो 1950 के दशक में अपनी मर्ज़ी, अपनी शर्तों पर ज़िन्दगी जीती है और क्या कमाल ज़िन्दगी जीती है. फ़िल्म का निर्देशन अनु मेनन ने किया है.

3. थप्पड़ 

Source: The Print

एक ऐसी फ़िल्म जो आपको अंदर तक झकझोर देगी, एक ऐसी फ़िल्म जो न सिर्फ़ हर भारतीय को बल्कि ख़ासकर भारतीय महिलाओं को देखनी चाहिए. वो जो कहते हैं, एक थप्पड़ ही तो था, भूल जाओ उन्हें देखनी चाहिए. तापसी पन्नू के दमदार अभिनय और अनुभव सिन्हा की बेहतरीन कहानी है थप्पड़. ये फ़िल्म अमृता की कहानी कहती है जिसने एक थप्पड़ के बाद अपने पति के ख़िलाफ़ पेटिशन फ़ाइल कर दिया और बताया कि एक थप्पड़ भी नहीं मारा जा सकता.

4. गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल

Source: Money Control

देश की पहली महिला हेलिकॉप्टर पायलट, गुंजन सक्सेना की कहानी है ये फ़िल्म. गुंजन का किरदार, जान्हवी कपूर ने निभाया है और गुंजन के पिता का किरदार, पंकज त्रिपाठी ने. जेंडर स्टीरियोटाइप्स को तोड़ती गुंजन सक्सेना और उनके नारीवादी पिता की कहानी पीढ़ियों को पता होनी चाहिए और इसलिए ये फ़िल्म ख़ास है. फ़िल्म का निर्देशन शरन शर्मा ने किया है.

5. गुल मकई 

Source: Filmi Beat

मलाला युसुफ़ज़ई की कहानी है, गुल मकई. गुल मकई नाम से मलाला, तालिबानी आतंक के बारे में लिखती थी. पाकिस्तान ही नहीं पूरी दुनिया में महिलाओं की शिक्षा का चेहरा बन चुकी मलाला का किरदार रीम शेख़ ने निभाया है. फ़िल्म में अतुल कुलकर्णी, दिव्या दत्ता जैसे मंझे कलाकार भी हैं. फ़िल्म का निर्देशन अमजद ख़ान ने किया है.

6. पंगा 

Source: Times of India

कंगना रनौत सोशल मीडिया पर आज जो कुछ भी कर रही हों, उनकी 'क्वीन' और 'तनु वेड्स मनु' का कोई मैच नहीं है. पंगा में भी क्वीन की एक झलक नज़र आती है. अपने खोये हुए आत्मविश्वास को दोबारा ढूंढने की कहानी है, पंगा. पंगा कहानी है 32 वर्षीय एक्स-कबड्डी खिलाड़ी की, जो कबड्डी छोड़ घर बसाने का निर्णय लेती है और इस वजह से उसका सपना कहीं पीछे छूट जाता है. दुनिया में कई महिलाओं की ज़िन्दगी रसोई तक ही सिमट कर रह जाती है. अश्विनी अय्यर निर्देशित इस फ़िल्म में एक और किरदार है, कोच मीनू (ऋचा चड्ढा) का जो कबड्डी कोच है. दोनों स्टार्स ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है.

7. बुलबुल 

Source: The Indian Express

इस फ़िल्म की एक बात जो इस फ़िल्म को बेहद ख़ास बनाती है वो है इस फ़िल्म की सिनमैटोग्राफ़ी. ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि भारत में इस तरह की फ़िल्म पहले शायद ही बनी हो. अन्विता दत्त की डेब्यू निर्देशन बुलबुल की कहानी हॉरर-थ्रिलर है. 19वीं सदी में बुनी गई ये कहानी एक ज़मींदार परिवार की है, जिसमें बुलबुल (तृप्ती डिमरी) की शादी होती है, बड़ी सी हवेली में छोटी बुलबुल का एक ही दोस्त है, सत्या. फ़िल्म की कहानी दर्शकों को पसंद आये न आये लेकिन इसके शॉट्स इतने बेहतरीन है जो दर्शकों को इस फ़िल्म से बांधकर रखते हैं.

8. डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे 

Source: Free Press Journal

एक कहानी के अंदर कई कहानियां. अगर फ़िल्म को क्रिटिक्स की नज़र से न देखे तो फ़िल्म कुछ ऐसे मामलों पर बात करती है जिस पर बात होनी चाहिए. चाहे वो महिलाओं को अपने अनुसार, ज़िन्दगी जीने की आज़ादी हो, प्रेम करने की आज़ादी हो या बच्चों को उनके अनुसार खिलौने दिलवाने की. कोंकणा सेन शर्मा और भूमि पेडनेकर दो Cousins हैं. किट्टी (भूमि) गांव से शहर अपनी लाइफ़ बनाने आती है, कई तरह की मुसीबतों का सामना करती है लेकिन पूरी फ़िल्म में वो बतौर इंसान ग्रो करती है. डॉली (कोंकणा) का किरदार भी अपने मन की भावनाएं छिपाते हुए, एक दिन अपनी दिल की सुनता है. फ़िल्म का निर्देशन अलंकृता श्रीवास्तव ने किया है.

9. काली कुही 

Source: Money Control

हमारे देश कि एक बहुत बड़ी समस्या पर बनी है ये फ़िल्म. 21वीं सदी में भी कई परिवारों में बेटी का पैदा होना अपशगुन माना जाता है और आज भी कई जगह बेटियों को पैदा होते ही मार दिया जाता है. काली कुही इसी कुरीति पर आधारित एक कहानी है. शबाना आज़मी, संजीदा शेख, रीवा अरोड़ा और सत्यदीप मिश्रा की इस फ़िल्म का निर्देशन टेरी समुन्द्रा ने किया. फ़िल्म की कहानी पंजाब के एक गांव के इर्द-गिर्द घूमती है जहां कुछ बूढ़ी महिलाएं बच्चियों को पैदा होते ही मारकर कुंए में फेंक देती हैं. फ़िल्म की सिनमैटोग्राफ़ी बेहतरीन है.  

10. दुर्गामति 

Source: Bollywood Mantra

तेलुगू फ़िल्म भागमथि की रिमेक है दुर्गामति. इस फ़िल्म में भूमि पेडनेकर ने दुर्गामति का किरदार निभाया है. इस हॉरर-थ्रिलर का निर्देशन जी.अशोक ने किया है. अपराध, भ्रष्टाचार एक पुरानी हवेली और साथ में हॉरर का डोज़. भूमि पेडनेकर के अलावा इस फ़िल्म में माही गिल, अरशद वारसी और जीशू सेनगुप्त जैसे दमदार स्टार्स थे.  

11. शकीला 

Source: Deccan Herald

साउथ की एक्ट्रेस शकीला की ज़िन्दगी पर आधारित है शकीला. इस फ़िल्म में ऋचा चड्ढा ने शकीला का किरदार निभाया है. फ़िल्म का निर्देशन इंद्रजीत लंकेश ने किया है. मलयालम फ़िल्म इंडस्ट्री की स्टार बन चुकी शकीला के नेम-फ़ेम से जलता है सलीम (पंकज त्रिपाठी). सिल्क स्मिथा की मौत के बाद, दूसरी सिल्क बनकर उभरी शकीला की कहानी फ़िल्मी स्टार्स के स्ट्रगल को दिखाती है.  

वेब सीरीज़

12. लंदन कॉन्फ़ीडेंशियल

Source: Imdb

इंडो-चीन बॉर्डर पर फैल रहा है एक वायरस. यूके में भारतीय राजदूत पर इस सूचना को छिपाए रखने का प्रेशर है. हुसैन जै़दी की क़िताब, 'लंदन कॉन्फ़ीडेंशियल' की किताब पर आधारित है, ये सीरिज़. इसमें मौनी रॉय ने एक गर्भवती रॉ एजेंट का किरदार निभाया है. सीरिज़ का निर्देशन कवल सेठी का है.  

13. रसभरी 

Source: https://gadgets.ndtv.com/entertainment/news/rasbhari-trailer-swara-bhasker-web-series-release-date-amazon-prime-video-2020-2251867

इस सीरीज़ के ज़रिए फ़ीमेल सेक्शुअलिटी को एक्सप्लोर करने और प्यूबर्टी की जिज्ञासाओं को दिखाने की कोशिश की गई है. नंद किशोर (आुयुष्मान सक्सेना) नामक एक टीनेज लड़का, अपनी अंग्रेज़ी शिक्षिका सानू मैडम (स्वरा भास्कर) के प्रति आकर्षित हो जाता है. स्वरा भास्कर के किरदार के द्वारा ये दर्शाया गया है कि भारतीय अपनी सेक्शुएलिटी को कितना ज़्यादा छिपाते हैं. सीरीज़ का निर्देशन निखिल भट्ट ने किया है. 

14. शी 

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इम्तियाज़ अली निर्देशित पहली वेब सीरीज़ है शी. सीरीज़ में एक महिला कॉन्स्टेबल की भूमिका निभाती हैं, अदिति पोहनकर. पोस्टर, ट्रेलर देखने पर ये सीरीज़ लस्टफ़ुल टाइप लगती है, देखने के बाद पता चलता है कि ये ज़िन्दगी के कितने पहलुओं को दर्शाती है. बॉडीज़ के बीच, माइंड का गेम है शी. एक जूझती पर स्ट्रॉन्ग माइन्डेड महिला की कहानी है शी.

15. आर्या 

Source: The Indian Express

सुष्मिता सेन की पहली वेब सीरीज़ है, आर्या. ये सीरीज़ देखकर बहुतों के मन में ये ख़याल आएगा, 'बड़े-बड़े घरों में भी?'. स्पैनिश सीरीज़, Penoza पर आधारित ये सीरीज़ है एक ऐसी महिला की कहानी है जिसके हाथों में उसके परिवार के डूबते बिज़नेस की डोर आ जाती है. अपने आस-पास के लोगों को अपने विरुद्ध खड़े होता देख आर्या ख़ुद अपने कंधों पर परिवार की सलामती का भार लेती है. सुष्मिता सेन की धमाकेदार वापसी है आर्या का निर्देशन, राम माधवानी, संदीप मोदी और विनोद रावत ने किया है.  

16. कोड एम 

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अभिनेत्री जेनिफ़र विंगेट ने सीरीज़ की दुनिया में ज़बरदस्त एंट्री मारी कोड एम के ज़रिए. इस सीरीज़ में उन्होंने एक आर्मी वक़ील का किरदार निभाया है जिसे शादी के कुछ ही दिनों पहले एक हाई-प्रोफ़ाइल केस दिया जाता है. क्या होता है जब पावर ग़लत लोगों के हाथों में आ जाती है, ये कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है. सीरीज़ का निर्देशन अक्षय चौबे ने किया है.

17. फ़्लेश 

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ह्यूमन ट्रैफ़िकिंग देश की बहुत बड़ी समस्या है और इसी समस्या को दिखाया गया है फ़्लेश में. सीरीज़ में स्वरा भास्कर ने एसीपी राधा नौटियाल का किरदार निभाया है. सीरीज़ में अक्षय ओबरॉय भी नज़र आए हैं और निर्देशन दानिश असलम ने किया है. सीरीज़ में काफ़ी वॉयलेंट दृश्य हैं.  

18. ब्लैक विडोज़ 

Source: India Today

Finnish Show Mustat Lesket पर आधारित है ये सीरीज़. ये कहानी है तीन महिलाओं की जो अब्यूज़ीव शादी से तंग आकर अपने पतियों को मारने की साजिश करती हैं. मोना सिंह, शमिता शेट्टी और स्वस्तिका मुखर्जी ने अलग-अलग आयु वर्ग की महिला का किरदार निभाया है. सीरीज़ में काफ़ी ट्विस्ट्स हैं. सीरीज़ का निर्देशन बिरसा दासगुप्त ने किया है. 

19. हंड्रेड

Source: Desi Martini

दो एकदम विपरीत महिलाएं मिलकर ज़िन्दगी का रायता कैसे साफ़ करती हैं ये कहानी है हंड्रेड की. सौम्या शुक्ला (लारा दत्ता) एक एसीपी हैं और नेत्रा पाटिल (सैराट फ़ेम, रिंकू राजगुरू) एक लड़की है जो सरकारी नौकरी और घर के कामों में उलझी है. नेत्रा को पता चलता है कि उसे कैंसर है और उसके पास जीने के लिए सिर्फ़ 100 दिन है. सीरीज़ में दोनों ने जान डाल दी है. निर्देशन रुचि नरैन, आशुतोष शाह, ताहिर शब्बीर और अभिषेक दुबे का है. 

20. मसाबा मसाबा 

Source: The Indian Express

ये डिज़ाइनर मसाबा गुप्ता और अभिनेत्री नीना गुप्ता की असली ज़िन्दगी पर आधारित सीरीज़ है. इन दोनों की ज़िन्दगी पब्लिक है. ये सीरीज़ हमें डिज़ाइनर मसाबा गुप्ता की ज़िन्दगी के कुछ पहलुओं को दिखाती है. कैसे वो ब्रेक-अप, डायवोर्स और फ़ैशन शो डिज़ास्टर से डील करती है. नीना गुप्ता और उनके रिश्ते के खट्टे-मिठे पल काफ़ी मज़ेदार हैं. सीरीज़ का निर्देशन सोनम नायर ने किया है.

अगर इनमें से कुछ नहीं देखा है तो जल्द से जल्द देख लो. और हमें उम्मीद है कि आगे भी महिलाओं पर आधारित, इससे ज़्यादा कहानियां देखने को मिलेंगी.