67th National Film Awards: 67वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है. अवॉर्ड सेरेमनी का आयोजन दिल्ली के विज्ञान भवन में किया गया था. सभी विजेताओं को उपराष्ट्रपति एम. वेकैया द्वारा सम्मानित किया गया था.

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कंगना रनौत, धनुष और मनोज बाजपेयी को उनके बेहतरीन अभिनय के लिये अवॉर्ड से नवाज़ा गया. वहीं अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की फ़िल्म ‘छिछोरे’ को र्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार दिया गया. इसके अलावा साउथ सुपरस्टार रजनीकांत (सुपरस्टार) को 51वें दादासाहेब फ़ाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. सिनेमाजगत में ‘राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार’ काफ़ी अहम माने जाते हैं, जिसे पाना हर एक्टर और डायरेक्टर के लिये एक सपना सा होता है. इसलिये आज इन पुरस्कारों के बारे में थोड़ा विस्तार से जान लेते हैं.

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कैसे किया जाता है विजेताओं का चयन? 

जानकारी के मुताबिक, ‘नेशनल अवॉर्ड’ के लिये सबसे पहले निर्देशकों से प्रविष्टियां (Entries) मंगाई जाती हैं. इसके बाद सरकार अवॉर्ड्स चयन के लिये ज्यूरी (Jury) का गठन करती है. वो Jury बिना किसी भेदभाव के सभी फ़िल्में देखती है. इसके बाद वो सभी कैटेगिरी के हिसाब से फ़िल्म्स और स्टार्स का सेलेक्शन करती है. इस इंवेट में लगभग 90 अवॉर्ड्स होते हैं, जो अलग-अलग कैटेगिरी में वितरित किये जाते हैं.

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ऐसा कहा जाता है कि Jury पूरी निष्पक्ष प्रक्रिया से पुरस्कार विजेताओं के नाम सामने रखती है. इसके अलावा उनका विचार-विमर्श भी बेहद गोपनीय होता है.

अवॉर्ड कौन बांटता है? 

आधिकारिक तौर पर ये अवॉर्ड्स राष्ट्रपति की तरफ़ से वितरित किये जाते हैं. हांलाकि, कुछ सालों से ‘नेशनल अवॉर्ड’ उपराष्ट्रपति भी दे रहे हैं.

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विजेताओं को क्या मिलता है? 

चूंकि, ये अवॉर्ड अलग-अलग कैटेगिरी में दिये जाते हैं. इसलिये उनका अवॉर्ड (Awards) भी अलग-अलग होता है. कुछ विजेताओं को नकद राशि मिलती है, तो कुछ सिर्फ़ मेडल. इसके अलावा शॉल भी पहनाई जाती है.

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आयोजन कौन करता है? 

आपको बता दें कि इन अवॉर्ड्स का आयोजन सूचना और प्रसारण मंत्रालय कराता है.

नेशनल अवॉर्ड से जुड़ी जानकारी आपको कैसी लगी कमेंट में बताइयेगा.