बॉलीवुड में डरावनी फ़िल्में हमेशा से बनती आयी हैं, मगर ये फ़िल्में कुछ ख़ास कर नहीं पायीं. एक जैसी ही कहानी, इम्प्रेस ना कर पाने वाले इफेक्ट्स. अजीबोग़रीब मेक अप और काफ़ी औसत कहानी के चलते फ़िल्में डर नहीं पैदा कर पातीं.

मगर कई डरावनी फ़िल्में डरावनी होती हैं क्योंकि वो हमारे आसपास हो रही घटनाओं को दिखाती हैं. फ़िल्में उन मुद्दों, उन भावनाओं, उन चीज़ों को दिखाती हैं जिनसे हम जुड़ा हुआ महसूस करते हैं. अच्छी डरावनी फ़िल्में हमारे भीतर छुपे इमोशन को टटोलती हैं और वहां से कहानी को जोड़ती है.

पेश हैं ऐसी ही 8 डरावनी फ़िल्में जो आपको देख लेनी चाहिए:

1. मधुमती:

1985 में आयी इस फ़िल्म के डायरेक्टर बिमल रॉय थे और इस फ़िल्म में दिलीप कुमार, वैजयन्ती माला और जॉनी वॉकर थे. फ़िल्म की कहानी शुरू होती है एक तूफ़ानी रात से. दिलीप कुमार तूफ़ान में फंस कर एक हवेली में रुकते हैं.

हवेली में जाते ही दिलीप कुमार को हवेली जानी पहचानी लगती है और उन्हें पुराने जन्म की बातें याद आने लगती हैं.
इस फ़िल्म में वैजयन्ती माला ने तीन रोल निभाये हैं. यह शायद पहली हिन्दी फ़िल्म है जिसमें किसी आर्टिस्ट ने तीन-तीन रोल निभाये हों. इस फ़िल्म का असर ऐसा है कि इस फ़िल्म के कई रीमेक बने जैसे कुदरत, बीस साल बाद, और ओम शांति ओम.

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2. मोनिहारा:

इस फ़िल्म को डायरेक्ट किया है सत्यजीत रे ने. सत्यजीत रे महान फ़िल्म निर्माताओं में से एक हैं. उनके सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें 1992 में आस्कर लाइफ टाइम अचीवमेंट ऑनरेरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

फ़िल्म मोनिहारा सत्यजीत रे की एकमात्र हॉरर फिल्म है और ये इंसान के सबसे बड़े डर को दिखाती है: निराशा.
मोनिहारा की कहानी शुरू होती है, जब एक शाम को गांव का स्कूल मास्टर एक छोड़ी हुई हवेली से गुजरता है और नदी के किनारे बैठता है. वहां, वह एक अजनबी से मिलता है और उसे बताता है कि वह हवेली के पूर्व मालिक - अमीर व्यापारी फणीभूषण और उसकी पत्नी, मोनिमालिका की कहानी सुनाता है. फणीभूषण की पत्नी को गहनों का जुनून सवार है. आगे चलकर कहानी कई दुःख भरे मोड़ लेती है और डरावनी होती जाती है.
ये फ़िल्म बंगाली भाषा में है.

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3. कुहेली:

तरुण मजूमदार की 1971 में आयी ये फ़िल्म शीबा नाम की एक महिला की कहानी है जो एक दूर के पहाड़ी शहर, निझुमगढ़ में बालिका रानू की दाई मां बनने. शीबा जैसे ही हवेली में उसे कुछ अजीब महसूस होता है. फ़िर उसे मालूम पड़ता है कि करीब सात साल पहले यहां दो हत्याएं हुई थीं. साथ ही कई अजीबोग़रीब और रहस्यमयी घटनाएं भी होने लगती हैं. कहानी में आगे पता चलता है कि अपराधी परिवार के बहुत करीब और विश्वसनीय है.

इस फ़िल्म की कहानी के साथ-साथ इसे जो डरावना बनता है वो है इस फ़िल्म का बैकग्राउंड म्यूज़िक. ये फ़िल्म बंगाली भाषा में है.

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4. मकड़ी:

मुझे लगता है मकड़ी में हम सबको ख़ूब डराया होगा. 2002 में आयी विशाल भारद्वाज की ये फ़िल्म 2 जुड़वा बहनों मुन्नी और चुन्नी की कहानी है.

गांव की पुरानी भुतही हवेली में कोई नहीं जाता क्योंकि वहां चुड़ैल रहती है और कोई जाए भी तो वो जानवर बनके बाहर आता है. एक दिन मुन्नी हवेली के अंदर चली जाती है और चुड़ैल उसे मुर्गी बना देती है.
चुड़ैल बनी हुईं शबाना आज़मी अपनी एक्टिंग से किसी भी डरा सकती हैं.
बच्चों के लिए बनी ये फ़िल्म बड़ों बड़ों को डरा सकती है. साथ ही मकड़ी अन्धविश्वास पर गहरा प्रहार थी.

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5. एक थी डायन:

इस फ़िल्म को कन्नन अय्यर ने डायरेक्ट किया है. इसमें इमरान हाशमी, हुमा कुरेशी और कोंकणा सेन शर्मा मुख़्य किरदार में दिखेंगे. फिल्म में इमरान हाशमी एक जादूगर का किरदार निभा रहे हैं. कोंकणा सेन शर्मा डायन बनी हैं जो अच्छे से डरा पाने में सफल रहती हैं. हालांकि फ़िल्म जिस बेहतरीन तरीके से शुरू होती है उस तरह ख़त्म नहीं हो पाती. आगे बढ़ने के साथ-साथ फ़िल्म कमज़ोर हो जाती है. मगर हां, ये फ़िल्म आपको डरा पाने में ज़रूर सफल रहेगी.

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6. परी:

2018 में आयी अनुष्का शर्मा की फ़िल्म परी. परी फ़िल्म में डर और इमोशन को मिलाकर हॉरर पैदा किया गया है. इस फ़िल्म के डायरेक्टर प्रोसित रॉय हैं और उन्होंने कहानी थोड़ा हट कर बनायी है.

फ़िल्म में अर्नब (परमब्रत चटर्जी) है जो प्रिंटिंग प्रेस चलाता है. एक दिन भारी बारिश के चलते रास्ते में गलती से एक बूढ़ी औरत को कार से टक्कर मार देता है. महिला की मौत हो जाती है और जब पुलिस उसके घर को खोजते हैं, तो जंगल में एक पुराने झोपड़े में उन्हें रुखसाना (अनुष्का शर्मा) मिलती हैं जो अंदर जंजीर से जकड़ी हुई है. अर्नब, उसे अपने घर ले जाता है. कहानी के आगे बढ़ते-बढ़ते कई और परतें खुलती हैं.
परी दूसरी और भुतही फ़िल्मों से थोड़ा हट कर है.

Source: firstpost

7. तुम्बाड़:

2018 में आयी इस फ़िल्म के डायरेक्टर हैं राही अनिल बर्वे. ये फ़िल्म आपको ज़रूर देखनी चाहिए क्योंकि ये फ़िल्म हॉरर के अलावा लालच की भी कहानी है.

तुम्बाड़ महाराष्ट्र के कोंकण इलाके में एक गांव है. यहां के लोगों की ऐसी मान्यता है कि पूर्वज यहां कोई खजाना छुपा गए हैं. इसी को आधार बना कर फ़िल्म की कहानी को रचा-बसा गया है. लालच इंसान को कितना ज़्यादा भयानक बना सकता है ये आपको फ़िल्म देखने के बाद एहसास होगा.

Source: filmcompanion

8. स्त्री:

स्त्री एक कॉमेडी-हॉरर फ़िल्म है. अमर कौशिक की ये फ़िल्म आपको गुदगुदाएगी भी और डराएगी भी. फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के चंदेरी नाम के जगह की है जहां त्यौहार के दौरान एक चुड़ैल, जिसे लोग स्त्री कहकर बुलाते हैं, आती है और सिर्फ़ पुरुषों का शिकार करती है. फ़िल्म में श्रद्धा कपूर, राजकुमार राव, अपारशक्ति खुराना, अभिषेक बनर्जी और पंकज त्रिपाठी है.

Source: imdb