1975 में रमेश सिप्पी ने इंडियन सिनेमा को एक नायाब फ़िल्म दी थी नाम था शोले. इस फ़िल्म की गिनती बॉलीवुड की क्लासिक फ़िल्मों में की जाती है. ये वो फ़िल्म है जिसे एक जेनरेशन से दूसरी जेनरेशन को किसी पंरपरा की तरह पास किया जा रहा है. इस फ़िल्म और इसके किरदारों से लोगों को आज भी उतना ही प्यार है जितना पहली बार ये फ़िल्म देखने पर हुआ होगा। फ़िल्म के डायलॉग्स और सॉन्ग्स भी ज़बरदस्त थे और आज भी लोगों को ज़ुबानी याद हैं.

Sholay
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फ़िल्म के डायलॉग ही नहीं इसके कैरेक्टर तक लोगों के जीवन का हिस्सा बन गए हैं. फिर चाहे बात गब्बर सिंह की हो या फिर जय और वीरू की. मगर इस फ़िल्म में एक और कैरेक्टर ऐसा था जो इस फ़िल्म के एक गाने से रातों रात फ़ेमस हो गया था. इस एक्टर का नाम है जलाल आगा, जो मशहूर कॉमेडियन आगा के बेटे थे. शोले के सुपरहिट गाने महबूबा-महबूबा में जो बंजारा ये गाना गाता है वो जलाल आगा ही थे. इस फ़िल्म से उन्हें इंडस्ट्री में नई पहचान मिली थी.

Jalal Agha
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हालांकि, ऐसा नहीं था कि इससे पहले उन्होंने फ़िल्मों में काम नहीं किया था. जलाल आगा Film And Television Institute Of India (FTII) से ग्रेजुएट हुए थे. उन्होंने बचपन में फ़िल्म मुग़ल-ए-आज़म में शहज़ादे सलीम यानी दिलीप कुमार के बचपन का रोल किया था.

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बड़े होने पर उन्होंने 1967 में फ़िल्म 'बम्बई रात की बाहों में' से अपने करियर का आगाज़ किया था. जलाल आगा ने अपने करियर में लगभग 60 फ़िल्मों में काम किया था. इनमें से अधिकतर सपोर्टिंग रोल थे जिनके लिए उनकी एक्टिंग की सराहना भी की जाती है.

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जलाल आगा की कुछ चुनिंदा फ़िल्मों की बात करें तो इनमें ‘यादों की बारात’, ‘जूली’, ‘थोड़ी सी बेवफ़ाई’, ‘सात हिंदुस्तानी’, ‘रॉकी’, ‘आया सावन झूम के’ जैसी मूवीज़ के नाम शामिल हैं. इसके अलावा उन्होंने कुछ हॉलीवुड मूवीज़ में भी काम किया था. जलाल आगा ने आगे चलकर स्क्रिप्ट राइटिंग और निर्देशन की फ़ील्ड में भी हाथ आज़माया था.

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हालांकि, उनकी पहली निर्देशित फ़िल्म किन्हीं कारणों से रिलीज़ नहीं हो पाई थी. इसलिए उनकी दूसरी फ़िल्म गूंज को ही जलाल आगा द्वारा निर्देशित पहली फ़िल्म कहा जाता है.

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