दुनिया का हर सक्सेसफुल व्यक्ति असफ़लताओं और रिजेक्शन के बाद ही एक ख़ास मुकाम पर पहुंचता है. बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) भी इन्हीं में से एक हैं. स्ट्रगल के दौर में बिग बी को उनकी आवाज़ के कारण कभी फ़िल्में नहीं मिली, तो कभी रेडियो स्टेशन से निकाल दिया गया. इसके बाद उन्होंने अपनी आवाज़ पर काम किया और सन 1969 में मृणाल सेन की 'राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता' फ़िल्म 'भुवन शोम' में कथाकार (Narrator) के तौर पर बॉलीवुड में डेब्यू किया. आज अमिताभ बच्चन अपनी एक्टिंग ही नहीं, बल्कि अपनी आवाज़ के लिए भी काफ़ी मशहूर हैं.

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Amitabh Bachchan as Narrator
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अमिताभ बच्चन ने सन 1969 में सात हिंदुस्तानी (Saat Hindustani) फ़िल्म से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी. लेकिन ये फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर सुपरफ़्लॉप साबित हुई थी. हालांकि, बिग बी को इस फ़िल्म के लिए 'National Film Award for Best Newcomer' चुना गया था. इस फ़िल्म के बाद उन्होंने बतौर हीरो लगातार 13 फ़्लॉप फ़िल्में दी. इतनी फ़िल्में फ़्लॉप होने के बाद बच्चन साहब बेहद मायूस हो गए थे.

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सन 1972 में 'ज़ंजीर' फ़िल्म रिलीज़ हुई, ये फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर सुपरहिट साबित हुई. इसके बाद अमिताभ बच्चन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 1970-80 के दशक में अमिताभ बच्चन 'एंग्री यंग मैन' के तौर पर बॉलीवुड में काफ़ी मशहूर हुये. इस दौरान 'सौदागर', 'रोटी कपड़ा और मकान', 'शोले', 'ज़ंजीर', 'दीवार', 'हेरा फेरी', 'परवरिश', 'डॉन', 'मुक़द्दर का सिकंदर', 'सुहाग', 'दोस्ताना', नसीब, लावारिश, 'अमर अकबर एंथोनी', 'अग्निपथ', 'शहंशाह', 'नमक हलाल', 'खुद्दार', 'अंधा क़ानून', 'कूली शराबी', 'गिरफ़्तार', 'मर्द', 'आज का अर्जुन' जैसी कई सुपरहिट फ़िल्मों ने उन्हें भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान दिलाई.

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अमिताभ बच्चन 70 के दशक से लेकर आज तक बॉलीवुड के सुपरस्टार बने हुए हैं. 70 से लेकर 90 के दशक तक अमिताभ बच्चन के फ़िल्मीं करियर पर नज़र डालें तो इस दौरान सबसे ख़ास बात ये रही कि उन्होंने कई फ़िल्मों में 'विजय' नाम का किरदार निभाया. बच्चन साहब ने सबसे पहले 'ज़ंजीर' फ़िल्म में 'विजय' नाम का किरादर निभाया था. 

Zanjir Film
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इसके बाद अमिताभ बच्चन 'रोटी कपड़ा और मकान', 'हेरा-फेरी', 'त्रिशूल', 'डॉन', 'द ग्रेट गैंबलर', 'काला पत्थर', 'दो और दो पांच', 'दोस्ताना', 'शान', 'शक्ति', 'आख़िरी रास्ता', 'अकेला', 'आंखें', 'रण', 'शहंशाह', 'अग्निपथ' सहित अब तक कुल 22 फ़िल्मों में 'विजय' नामक किरदार निभा चुके हैं. आख़िरी बार 'निशब्द' फ़िल्म में विजय नाम का किरदार निभाया था. लेकिन इस नाम के पीछे की असल वजह शायद कम ही लोग जानते होंगे.

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दरअसल, बॉलीवुड में एक प्रथा है, जिस नाम से किसी स्टार की फ़िल्म सफ़ल हो जाती है. अगली फ़िल्मों में भी उसका नाम वही रखा जाता है. 70 और 80 के दशक में अमिताभ बच्चन के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था. इस दौरान 'विजय' नाम वाली उनकी अधिकतर फ़िल्में हिट हो रही थीं. ऐसे में हर निर्माता-निर्देशक अपनी फ़िल्म में अमिताभ बच्चन का नाम 'विजय' ही रखना चाहता था.