माथे पर बिंदिया, अनारकली सूट और बेगम टोपी पहने ये मोहतरमा असल में बॉलीवुड की सबसे ख़तरनाक विलेन थीं. वैसे तो ये मोहतरमा हैं नहीं, बल्क़ि दढ़ियल पुरुष हैं. इन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री के सबसे ऐतिहासिक और खूंखार विलेन रोल अदा किया है.

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एक ज़माने में इनका नाम सुन 50-50 कोस दूर तक बच्चे कांप जाते थे. साल 1951 में फिल्म ‘नाज़नीन’ से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपने करियर की शुरुआत की थी, इसके बाद 1973 में वो फिल्म ‘हिंदुस्तान की कसम’ में नज़र आए.

उन्होंने ‘चरस’, ‘परवरिश’, ‘अपना खून’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘सुहाग’, ‘कुर्बानी’, ‘लव स्टोरी’, ‘याराना’, ‘उत्सव’, ‘मां कसम’ और ‘सौतेला भाई’ सहित कई फिल्मों में काम किया था. अपने पूरे करियर में इन्होंन 200 से ज़्यादा हिंदी फिल्मों में काम किया था. इसके साथ ही उन्होंने अंग्रेजी की एक फिल्म ‘द परफेक्ट मर्डर’ में भी काम किया था.

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हालांकि, इनका सबसे यादगार रोल ‘शोले’ में गब्बर सिंह का था. वैसे ‘चमेली की शादी’ में एडवोकेट हरीश का क़िरदार भी काफ़ी यादगार है. आज भी इस फ़िल्म को देखिए तो उनका क़िरदार आपको गुदगुदा देगा.

ज़ाहिर है कि अब आप पहचान ही गए होंगे कि हम मशहूर एक्टर अमजद ख़ान की बात कर रहे हैं.

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बता दें, बॉलीवुड में कई यादगार क़िरदार निभाने वाले अमजद ख़ान का निधन 27 जुलाई 1992 को दिल का दौरा पड़ने से हो गया था.

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