किसी चीज़ के होने के पीछे कोई न कोई ठोस वजह ज़रूर होती है, चाहे वो कोई सामान्य-सी चीज़ ही क्यों न हो. वहीं, हम अपने दैनिक जीवन में कई आम चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं या कई चीज़ों को बार-बार टीवी पर या इंटनरेट पर देखते हैं, लेकिन उनके पीछे की कहानी पर हमारा ध्यान नहीं जाता है, जैसे कई जूतों में छेद क्यों होते हैं या पीतल के डोर हैंडल क्यों बनाए जाते हैं? आइये, इन दोनों सवालों सहित आपको बताते हैं कुछ बेहद ही आम सवाल और उनके हैरान कर देने वाले जवाब.   

1. नाविकों (Sailors) की शर्ट धारीदार क्यों होती है?

sailor
Source: wikipedia

धारीदार शर्ट आपको क़ैदी या अस्पतालों के मरीज़ पहनते दिख जाएंगे. लेकिन, ऐसी शर्ट नौसेना में भी पहनते हैं. बता दें कि 1858 में, नेपोलियन ने नौसेना में धारीदार शर्ट पहनने की अनुमति दी थी. ऐसा कहा जाता है कि शर्ट में धारियों की वजह से ‘डेक’ पर व्यक्ति की पहचान की जा सकती है और अगर कोई जवान समुद्र में गिर जाता है, तब भी उसकी पहचान करना आसान हो सकता है.  

2. फ़ुटबॉल रेफ़री लाल और पीले रंग का कार्ड का उपयोग क्यों करते हैं? 

referee showing red card
Source: news.sky

आपने कई बार टीवी पर या लाइव फ़ुटबॉल मैच में रेफ़री द्वारा लाल या पीले कार्ड का उपयोग करते ज़रूर देखा होगा. क्या आपको पता है ऐसा करना क्यों और कब से शरू हुआ? दरअसल, 1966 में, अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच एक मैच के दौरान अर्जेंटीना का एक फ़ुटबॉल खिलाड़ी (Antonio Rattin) जर्मन रेफरी Rudolf Kreitlein के शब्दों को समझ नहीं पाया, क्योंकि उसे जर्मन भाषा नहीं आती थी. इसके बाद उसे फ़िल्ड से निकाल दिया गया. 

जब उसे बाहर जाने का आदेश दिया जा रहा था, वो वहां चुपचाप खड़ा था. मैच देख रहे दर्शक भी समझ नहीं पा रहे थे कि अंदर क्या चल रहा है. इस घटना के बाद वर्ल्ड कप रेफ़री प्रमुख Ken Aston ने पेनल्टी के लिए स्पष्ट तरीक़े की बात की और लाल-पीले कार्ड का उपयोग करने का सुझाव दिया.

3. ‘Flight Jackets’ की आस्तीन पर जेब कहां से आई? 

flight jacket
Source: redcanoebrands

माना जाता है कि 1955 में MA-1 jacket आई थी, जो ‘Flight Jackets’ का ही प्रारंभिक रूप था. ये ख़ास जैकेट बमवर्षक विमान चलाने वाले पाइलट के लिए बनाई गई थी. इस जैकेट की आस्तीन में ख़ास पॉकेट बनाई गई थी, ताकि पाइलट इसमें कुछ ज़रूरी चीज़ें जैसे चाबी या सिगरेट रख सकें. बता दें इस पॉकेट को सिगरेट पॉकेट भी कहा जाता है. तब से ही ‘Flight Jackets’ में आस्तीन की जेब बनाई जाने लगी.

4. लंदन के ‘टेलीफ़ोन बूथ’ लाल क्यों होते हैं?  

London telephone booth
Source: businessinsider

1920 में, लंदन में पहला टेलीफ़ोन बूथ लगाया गया था, जो कि कंक्रीट का बना था और उसका रंग क्रीमी था. केवल उसका दरवाज़ा लाल था. वहीं, बाद में बूथ के नए डिज़ाइन के लिए 1924 में एक प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसे जाइल्स गिल्बर्ट स्कॉट नामक एक ब्रिटिश आर्किटेक्ट ने जीता. लेकिन, उनके डिज़ाइन में थोड़ा बदलाव कर दिया गया, जैसे कैबिन को स्टील की जगह लोहे का बना दिया गया और रंग को ग्रे की जगह लाल कर दिया गया, ताकि लोग इसे आसानी से देख सकें. 

बाद में यह रंग काफ़ी उपयोगी साबित हुआ, क्योंकि लंदन के कोहरे (Fog) में इसे आसानी से देखा जा सकता था. तब से ही लंदन के टेलीफ़ोन बूथ लाल रंग के ही होते हैं.  

5. सार्वजनिक स्थानों पर दरवाज़ों के हैंडल ज़्यादातर पीतल के क्यों होते हैं?

brass door handle
Source: alibaba

ऐसा इसलिए, क्योंकि पीतल बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीवों से बचाव का काम कर सकता है. यही कारण है कि अधिकतर सार्वजनिक स्थानों पर दरवाज़े के हैंडल पीतल के बने होते हैं.

6. ‘Trench Coats’ में शोल्डर टैब क्यों होते हैं? 

trench coat
Source: indiamart

1901 में सैनिकों के भारी ओवरकोट के विकल्प के रूप में ट्रेंच कोट बनाया गया था. उस वक़्त कोट में छाती तक Storm Flap भी बनाए गए थे, ताकि सैनिक के कंधे को राइफल के पट्टे की रगड़ से बचाया जा सके. आज भी ट्रेंच कोट में ऐसे शोल्डर टैब देखे जा सकते हैं.  

7. पुरुषों के कई जूतों में छेद क्यों होते हैं?  

brogue
Source: londonbrogues

इस प्रकार के जूते 17वीं शताब्दी में आयरलैंड और स्कॉटलैंड के मवेशी पालनेवालों द्वारा पहले इस्तेमाल किए गए. वे दलदली जगह पर काम करते थे. उनके जूते जल्दी सूख जाएं, इसलिए वो जूतों में छोटे-छोटे छेद कर देते थे. बाद में इस चीज़ को डिज़ाइन के तौर पर ले लिया गया और आज ऐस जूतों का काफ़ी चलन है.

8. नाविकों (Sailors) की पैंट नीचे से फैली हुई क्यों होती है?

sailor pants
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ऐसी पैंट (Flared Pants) पहली बार 1813 में नाविकों की वर्दी के हिस्से के रूप बनाई गई थी. ये पैंट नीचे से फैली हुई होती थी, ताकि ‘डेक’ को साफ़ करते वक़्त पैंट को आसानी से ऊपर किया जा सके, जिससे उनकी पैंट भीगने से बच जाती थी. बाद में ऐसी पैंटों की जरूरत कम हो गई और ऐसी पैंटों ने फ़ैशन का रूप ले लिया.