शार्क टैंक इंडिया (Shark Tank India) ने युवाओं के लिए एक नई उम्मीद पैदा की है. ये उम्मीद है अपने पैरों पर खड़े होने और अपने कंधों पर देश की इकोनॉमिक ग्रोथ का भार उठाने की. कोशिश है कि युवा नौकरियां ढूंढने के बजाय कुछ ऐसा काम करें, जिससे वो दूसरे युवाओं के लिए जॉब के अवसर पैदा कर सकें. 

Anupam mittal
Source: hindustantimes

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इसके लिए बस लोगों को शार्क्स (Sharks) यान जज के पास जाकर अपना यूनीक आइडिया पेश करना होता है और बदले में लाखों-करोड़ों का इन्वेस्टमेंट उन्हें मिल जाता है. अब जबकि शो (Shark Tank India) का सीजऩ ख़त्म होने की कगार पर है, तो अनुपम मित्तल ने शो से जुड़े कुछ बेहद रोचक फ़ैक्ट्स शेयर किए हैं.

साथ ही, अनुपम ने शो से जुड़े कुछ डाटा शेयर करते हुए कहा कि इस शो (Shark Tank India) ने लोगों के अंदर जोश भरा है, जो भारत के उद्यमी परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल देगा. अनुपम ने बताया, 'इस सीज़न में 67 डील हुई हैं. इनमें 87 फ़ीसदी फ़ाउंडर वो हैं, जो आईआईटी/आईआईएम बैगग्राउंड से नही हैं. 67 फ़ीसदी के पास कम से कम एक युवा फ़ाउंडर था. 60 फ़ीसदी ऐसे थे, जिन्हें कभी फंड नहीं मिला. 43 फ़ीसदी के पास कम से कम एक महिला को-फ़ाउंडर थी. वहीं, 30 फ़ीसदी ग्रामीण परिवेश से जुड़े लोग थे.'

अनुपम युवा से लेकर महिला उद्यमियों के लिए नए मौक़े पैदा कर काफ़ी एक्साइटेड हैं. वो कहते हैं कि 'हम तब तक जीत नहीं सकते, जब तक सबको साथ लेकर आगे न बढ़ें.'

इस शो के ज़रिए उन्होंने ख़ुद कितना और किस तरह का इन्वेस्टमेंट किया है, उसके बारे में भी उन्होंने जानकारी दी है. उन्होंने कहा, 'मैंने 24 कंपनियों में 5.4 करोड़ रुपये निवेश किए. इनमें 70 फ़ीसदी कंपनियां युवा उद्यमी चलाते हैं. 50 फ़ीसदी महिला उद्यमी और 30 फ़ीसदी कपल्स और परिवारों द्वारा बनाई गई कंपनियां हैं. उत्साही उद्यमियों और इन्क्रेडिबल इंडिया के लिए अपना योगदान कर मुझे बहुत गर्व हो रहा है.'

अनुपम बदलते भारत के मिजाज़ और माहौल को लेकर काफ़ी ख़ुश हैं. वो साल 1961 में आई फ़िल्म 'हम हिंदुस्तानी' के गानों की लाइनों से अपनी बात ख़त्म करते हैं. 'छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी. नए दौर में लिखेंगे, मिल कर नई कहानी. आज पुरानी ज़ंजीरों को तोड़ चुके हैं, क्या देखें उस मंज़िल को जो छोड़ चुके हैं! नया खून है नई उमंगें, हम है नई जवानी!'

वाक़ई शार्क टैंक इंडिया (Shark Tank India) ने युवाओं को बिज़नेस को लेकर प्रोत्साहित तो किया है. आम लोग भी व्यवसायोंं में इस्तेमाल होने वाले टेक्निकल शब्दों से परिचित हो रहे हैं. उम्मीद यही है कि भविष्य में युवा नौकरियां तलाशने के बजाय जॉब्स पैदा करने वाले उद्यमी बनेंगे.