ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना रे….

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ये गाना सुनते ही नटखट और चुलबुली अभिनेत्री आशा पारेख की छवि आंखों के सामने आ जाती है. फ़िल्म कटी पतंग में दमदार अभिनय कर वो फ़िल्म इंडस्ट्री की हिट गर्ल बन गई, लेकिन ये बस शुरूआत थी. इसके बाद उन्होंने ‘मेरा गांव मेरा देस’, ‘शिकार और कन्यादान’ सहित कई सुपरहिट फ़िल्में कर दर्शकों के दिल में एक ख़ास जगह बनाई.

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आशा पारेख जी को 1992 में कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. साथ ही उनको बेस्ट एक्ट्रेस का फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड और फ़िल्मफ़ेयर का लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिला. यही नहीं, उन्हें आइफ़ा 2006 में स्पेशल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. इसके अलावा आशा पारेख जी 1994 से 2000 तक सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन की अध्यक्ष रहीं और सेंसर बोर्ड की पहली महिला अध्यक्ष भी बनीं.

आशा पारेख ने हिन्दी के अलावा गुजराती, पंजाबी और कन्नड़ फ़िल्मों में भी काम किया. उनकी गुजराती फ़िल्म ‘अखंड सौभाग्यवती’ को अपार सफ़लता मिली.

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इन तस्वीरों में आप ख़ूबसूरत और बेहतरीन अदाकारा के फ़िल्मी सफ़र की एक झलक देख सकते हैं:

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Happy Birthday! आशा जी आप जिएं हज़ारों साल.