1951 में बॉलीवुड के एवरग्रीन स्टार देवानंद की फ़िल्म आई थी 'बाज़ी'. इसे बलराज साहनी जी ने लिखा था और डायरेक्ट किया था गुरु दत्त साहब ने. फ़िल्म का गाना 'तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले' काफ़ी हिट हुआ था. आज भी लोग इस गाने को गुनगुनाते दिखाई दे जाते हैं. पर क्या आप जाते हैं 1952 में इस फ़िल्म के गानों को ऑल इंडिया रेडियो पर बजाने पर रोक लगा दी गई थी.

'बाज़ी' फ़िल्म में देवानंद और गीता दत्त ने लीड रोल निभाया था. फ़िल्म का ये गाना भी इन दोनों कलाकारों पर फ़िल्माया गया था. मगर तत्कालीन सूचना एंव प्रसारण मंत्री बी.वी. केसकर को ये उन दिनों भारतीय फ़िल्मों के गाने पसंद नहीं आते थे.

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तब देश को आज़ाद हुए कुछ ही साल हुए थे. उनका कहना था कि ये गाने देश में वेस्टर्न कल्चर को बढ़ावा दे रहे हैं. इससे हमारी संस्कृति पर से भारतीय नौजवानों का भरोसा उठ जाएगा. वो भारतीय शास्त्रीय संगीत के पैरोकार थे. वो चाहते थे कि फ़िल्मों में भारतीय संगीत यंत्रों जैसे सितार, तबला, सारंगी आदि का इस्तेमाल कर म्यूज़िक दिया जाए. 

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क्योंकि उन दिनों पियानो, गिटार आदि का चलन गीतों में अधिक होने लगा था. लिहाज़ा उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो पर 'बाज़ी' सहित ऐसी ही दूसरी बॉलीवुड फ़िल्मों के गाने बजाने पर बैन लगा दिया. उनके इस आदेश से ऑल इंडिया रेडियो की रेटिंग घटने लगी. इसी बीच रेडियो सिलॉन पर बॉलीवुड फ़िल्मों के गानों का एक शो शुरू हो गया 'बिनाका गीतमाला'. इस शो को फ़ेमस आर.जे. अमीन सयानी जी लेकर आते थे. इस शो को सुनने के लिए हर सप्ताह लोग रेडियो सिलॉन को सुनने लगे.

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इससे रेडियो सिलॉन की रेटिंग बढ़ने लगी और ऑल इंडिया रेडियो की रेटिंग नीचे जाने लगी थी. इसलिए बाद में सरकार को अपना ये फ़ैसला बदलना पड़ा था. गानों पर लगे बैन से जुड़ा ये क़िस्सा आप यहां पढ़ सकते हैं. 
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