हिंदुस्तान एक पुरुष प्रधान देश है. इसलिये हमारे यहां सभी काम पुरुष और महिलाओं के बीच बंटे हुए हैं. यही नहीं, यहां अगर कोई पुरुष किसी महिला की तरह कुछ करता दिख जाये, तो लोग कहते हैं क्या लड़की बनता फिर रहा है. हद है यार मतलब ये क्या बात हुई!

ख़ैर, वो लोग और होते होंगे, जो इस तरह के कमेंट को इग्नोर करते होंगे. कुछ लोगों ने जब बाबिल ख़ान को मेकअप के लिये ट्रोल करने की कोशिश की, तो उन्होंने करारा जवाब देकर सबकी बोलती बंदा करा दी. हाल ही में बाबिल ने लोगों की स्टीरियोटाइप सोच तोड़ते हुए पुरुषों के लिये मेकअप को सामान्य बनाने की कोशिश की है.

बाबिल ने पोस्ट के ज़रिये बताते हैं कि जब वो मेकअप करके घर से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें मेकअप के लिये काफ़ी ट्रोल किया जाता है. वो कहते हैं कि पुरुष के अंदर स्त्री को पहचानना उसे पुरुष बनाता है. आगे वो कहते हैं कि आपको विश्वास नहीं होगा कि अभी भी मैं जब फ़ेस मास्क या मेकअप लगाता हूं, तो लोग कहत हैं कि क्या आप लड़की हैं?

बाबिल कहते हैं कि 'मुझे अपनी त्वचा का ध्यान रखना पसंद है. मुझे सेक्सी दिखना अच्छा लगता है. मुझे महिलाओं से प्यार है और मैं एक पुरुष बनना पसंद करूंगा. बाबील का कहना है अब वो टाइम आ गया है, जब हमें मेकअप को सामान्य करना चाहिये.'

बाबिल के इस पोस्ट की हर कोई सराहना कर रहा है और करनी भी चाहिये. बाबिल की सोच बताती है कि उन्हें उनके पिता यानि अभिनेता इरफ़ान ख़ान ने कितने अच्छे संस्कार दिये हैं.