1985 में बॉलीवुड स्टार अनिल कपूर की फ़िल्म आई थी 'साहेब'. इस मूवी में उनके अपोजिट नज़र आई थीं अमृता सिंह. फ़िल्म का एक गाना ‘यार बिना चैन कहां रे’ सुपरहिट हुआ था. इसे गाया था बप्पी लाहिरी और एस. जानकी ने. इस गाने को एक बार फिर से आयुष्मान ख़ुराना की अपकमिंग फ़िल्म शुभ मंगल ज़्यादा सावधान के लिए रिक्रिएट किया गया है. आज हम आपको इस गाने से जुड़ा एक ज़बरदस्त फ़ैक्ट बताने जा रहे हैं. इस गाने की धुन बप्पी लाहिरी ने एक बंगाली लोक संगीत से कॉपी की थी.

80 के दशक के इस सुपरहिट गाने को सुनकर आज भी लोगों के पैर थिरकने लगते हैं. इस गाने से जुड़ा सबसे बड़ा सच ये है कि इसकी धुन एक भवैया संगीत के एक मशहूर गाने से ली गई है. ये गाना है बंगाली भाषा में है. इसके बोल हैं- "जे जन प्रेमर भाब जाने ना, तार संगे नै लेना देना, खाटी सोना छारिया जे नेय नकल सोना, से जन सोना छेने ना." इसे आप यहां सुन सकते हैं:

'भवैया' एक बंगाली संगीत कला है. ये बंगाल और असम के कुछ इलाकों में काफ़ी लोकप्रिय है. बप्पी दा ने अपने ज़माने में बनाए गए कई सुपरहिट गानों की धुन इसी लोक संगीत से कॉपी की थी. इन्हीं गानों की वजह से उन्हें बॉलीवुड में डिस्को किंग का ख़िताब दिया गया था.

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वहीं बंगाल के लोगों का उन्हें लेकर कुछ अलग ही विचार है. ख़ासकर भवैया संगीत सुनने वालों के बीच. ये लोग उन्हें कॉपी किंग कहते हैं. वैसे देखा जाए तो उनका तर्क काफ़ी हद तक सही भी ठहरता है. बप्पी लाहिरी जो पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी ज़िले जन्में थे. वो भवैया संगीत सुनते हुए बड़े हुए और इसीलिए उनके गानों में इसकी छाप दिखाई देती है.

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हर साल जलपाईगुड़ी में भवैया संगीत की एक प्रतियोगिता होती है, लेकिन ये इतनी सुर्खियां नहीं बटोर पाती जितना की बप्पी लाहिरी के गाने. इसलिए संगीत की ये कला धीरे-धीरे ख़त्म हो रही है. वैसे अतीत में भी बप्पी लाहिरी पर विदेशी और देसी धुनों को चोरी करने के आरोप लगते रहे हैं. मगर उन्होंने हमेशा इस बात को सिरे से नकारा है.

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इंडस्ट्री को इतने सुपरहिट गाने देने वाले संगीतकार को इस तरह किसी की धुन को कॉपी करना शोभा नहीं देता. कम से कम वो उन्हें क्रेडिट तो दे ही सकते थे.


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