बॉलीवुड (Bollywood) के इतिहास में हज़ारों फ़िल्में बनी हैं, जिनमें से हर फ़िल्म की एक अलग कहानी है. शायद ही ऐसा कोई जॉनर हो, जो फ़िल्ममेकर्स की नज़र से अछूता रह गया हो. कॉमेडी, इमोशनल, हॉरर आदि कई कैटेगरीज़ हैं, जिस पर हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री ढेरों फ़िल्म बना चुकी है. अपनी फ़िल्मों के ज़रिए कुछ डायरेक्टर्स ने संवेदनशील मुद्दों को भी उजागर किया है. हालांकि, कुछ फ़िल्ममेकर्स ऐसे भी थे, जिन्होंने अपनी लेंस को ख़ुद के व्यापार की तरफ़ ही मोड़ दिया. कहने का मतलब है कि कई डायरेक्टर्स ने बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की ही अनकही कहानियों को बड़े पर्दे पर फ़िल्मों के रूप में दर्शाने का फ़ैसला किया था, जिसमें वो सफ़ल भी हुए.

आइए आपको बॉलीवुड की उन मूवीज़ के बारे में बताते हैं, जो बॉलीवुड (Bollywood Films On Bollywood) पर ही बनाई गई हैं.

Bollywood Films On Bollywood

1. हीरोइन

साल 2012 में आई इस फ़िल्म में करीना कपूर ख़ान (Kareena Kapoor Khan) लीड रोल में थीं. मधुर भंडारकर ने मूवी को डायरेक्ट किया था. इस मूवी में एक जर्नलिस्ट फ़ेमस एक्ट्रेस ‘माही अरोड़ा’ की ज़िंदगी पर रिपोर्टिंग करती है. इसमें वो एक्ट्रेस की व्याख्या अस्थिर और प्रॉब्लमेटिक होने के साथ अपने बचपन के आघात की वजह से टूटी हुई और अकेली शख्सियत के रूप में करती है. इस मूवी में ये दर्शाने की कोशिश की गई कि स्टार्स के ग्लैमरस अवतार के पीछे कई दर्दभरी कहानियां भी छुपी होती हैं. साथ ही हर स्टार को स्टारडम की एक भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है, ये फ़िल्म उसी के बारे में है.

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2. द डर्टी पिक्चर

विद्या बालन (Vidya Balan) और इमरान हाशमी (Emraan Hashmiस्टारर इस बायोग्राफ़िकल फ़िल्म में भारतीय सिनेमा की कंट्रोवर्शियल और फ़ेमस पर्सनैलिटी सिल्क स्मिता की ज़िंदगी के बारे में दिखाया गया है. फ़िल्ममेकर्स ने इस मूवी को लेकर पहले ही सफ़ाई दे दी थी कि ये फ़िल्म सिर्फ़ स्मिता की ज़िंदगी पर नहीं है, बल्कि ये हॉलीवुड और बॉलीवुड कल्चर की कई कहानियों से मेल खाती है. 80 के दशक के बैकग्राउंड में बनी ये फ़िल्म एक सुपरस्टार के उदय से लेकर पतन की कहानी दर्शाता है, जिसने ख़ाली हाथ फ़िल्म इंडस्ट्री में एंट्री मारी थी. फ़िल्म हिट साबित हुई थी और इसे कई अवार्ड्स से भी नवाज़ा गया था. (Bollywood Films On Bollywood)

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3. ओम शांति ओम

साल 2007 में आई शाहरुख़ ख़ान (Shahrukh Khan) और दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) स्टारर इस फ़िल्म को फ़राह ख़ान ने डायरेक्ट किया था. ये दीपिका की डेब्यू फ़िल्म भी थी. ये फ़िल्म बॉलीवुड पर एक नाटकीय दृष्टिकोण रखती है. ये एक पॉपुलर एक्ट्रेस ‘शांतिप्रिया‘ के ख़ून के बदले की कहानी है. हालांकि, इसमें पुनर्जन्म वाला एंगल भी बीच में मसाला के लिए जोड़ा गया है. अब बॉलीवुड की बात हो रही है, तो मसाला और मेलोड्रामा की बात भला कैसे छूट सकती है?

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4. रंगीला

ये रोमांटिक ड्रामा फ़िल्म साल 1995 में आई थी, जिसमें आमिर ख़ान, जैकी श्रॉफ़ और उर्मिला मातोंडकर लीड रोल्स में थे. फ़िल्म की कहानी एक यंग लड़की ‘मिली‘ के बारे में है, जो एक्ट्रेस बनने का सपना देखती है. मुन्ना (आमिर ख़ान) के नाम से एक अनाथ की दोस्ती कुछ दयालु लोगों से होती है, जिसकी तेज़-तर्रार बेटी मिली (उर्मिला मातोंडकर) जल्द ही उसकी सबसे अच्छी दोस्त बन जाती है. दोनों मुंबई शहर की तरफ़ काफ़ी आकर्षित होते चले जाते हैं. मिली की क़िस्मत तब चमकती है, जब एक मूवी स्टार की नज़र उस पर पड़ती है और वो उसे अपनी फ़िल्म ‘रंगीला’ के लिए साइन कर लेता है. ये मूवी एक एक्ट्रेस के सपने और स्ट्रगल्स के बारे में है. (Bollywood Films On Bollywood)

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5. लक बाय चांस

इस मूवी ने हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री पर एक रियल अप्रोच दिखाई थी. फ़िल्म में फ़रहान अख़्तर को लीड रोल के लिए लिया गया था. ये फ़िल्म एक एक्टर की कहानी बयां करती है, जिसमें नेपोटिज़्म और कास्टिंग काउच जैसे मुद्दों को भी दर्शाया गया है. फिल्म एक अभिनेता की जर्नी के बारे में है, जो एक फ़िल्म स्टार बनने के लिए मुंबई आता है. कैसे वो अपनी रिलेशनशिप को मेंटेन करते हुए एक स्टार बनता है, इस मूवी में यही दर्शाया गया है. 

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6. बॉम्बे टाकीज़

इस फ़िल्म में चार शॉर्ट फ़िल्म दिखाई गई हैं. इसकी शॉर्ट फ़िल्म ‘स्टार‘ में ‘पुरंदर’ (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) की कहानी को दिखाया गया है, जोकि एक फ़ेल स्टेज एक्टर है. वो अपने पिता की मृत्यु के बाद अपनी रोज़ी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है. संयोग से, वो एक आम पैदल यात्री की भूमिका निभाने के लिए भीड़ से चुना जाता है, जो शूट किए जा रहे एक दृश्य में नायक से टकरा जाता है. फ़िल्म की कहानी काफ़ी रोमांचक है और एक एक्टर की फ़ीलिंग्स को बयां करती है. (Bollywood Films On Bollywood)

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7. क़ामयाब

फ़िल्म ‘क़ामयाब‘ एक एक्टर की जर्नी को बयां करती है, जो काफ़ी सालों से एक्टिंग इंडस्ट्री में है, लेकिन वो स्पॉटलाइट में कभी नहीं आ पाया. अपने रिटायरमेंट के सालों बाद, उन्हें पता चलता है कि वो एक अनूठा रिकॉर्ड हासिल करने के कगार पर रिटायर हो गए हैं. वो 500 मूवीज़ के राउंड फ़िगर को पूरा करने के लिए अपने रिटायरमेंट से बाहर आने का फैसला करता है और वो एक महत्वपूर्ण भूमिका प्राप्त करता है, जिसके लिए उसे हमेशा याद किया जाएगा. 

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कभी-कभी अपने गिरेबान में झांकने से भी फ़ायदा मिलता है.