बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस की फ़िल्में तो डायरेक्ट सिनेमाघरों या फिर Amazon Prime या Netflix जैसे प्लेटफ़ार्म पर रिलीज़ हो जाती हैं. लेकिन फिर कुछ फ़िल्में और डॉक्यूमेंट्री रह जाती हैं जिन्हें डिस्ट्रीब्यूटर ही नहीं मिलते. इनमें से अधिकतर ऐसी फ़िल्में होती हैं जो आर्ट फ़िल्में और क्षेत्रीय भाषा की कैटेगरी में आती हैं. विडंबना देखिए ये फ़िल्में विदेशों में तो बहुत अच्छा काम करती हैं वहां अवॉर्ड भी जीत लेती हैं, लेकिन अपने ही देश में इन्हें पूछने वाला कोई नहीं होता.

ऐसी ही फ़िल्मों को एक नया डिज़िटल मंच मुहैया करा रहा है Cinemapreneur.com. सिनेमाप्रेन्योर के ज़रिये क्षेत्रीय भाषाओं के और नए फ़िल्म निर्माता अपनी फ़िल्मों को दर्शकों को दिखा कर कमाई कर पाएंगे.

Cinemapreneur a new OTT platform for indie films
Source: cinestaan

सिनेमाप्रेन्योर की स्थापना की है रूपिंदर कौर और गौरव रतुड़ी ने. गौरव रतुड़ी पहले फ़िल्मबूथ नाम के एक बैनर तले दिल्ली में शॉर्ट और डॉक्यूमेंट्री पिक्चर्स के फ़िल्म फ़ेस्टिवल दिल्ली में आयोजित करते थे. उन्हें सिनेमाप्रेन्योर बनाने का आइडिया कोरोना काल में डिजिटल प्लेटफ़ार्म की तरफ बढ़ते दर्शकों के रुझान को देख कर आया. इसके ज़रिये वो नए फ़िल्म मेकर्स को अपनी फ़िल्में लोगों को दिखाने का मौक़ा दे रहे हैं साथ ही असली सिनेमा के भूखे दर्शकों का भी हित साध रहे हैं.

Cinemapreneur a new OTT platform for indie films
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गौरव रतुड़ी ने इस बारे में बात करते हुए कहा- 'कोविड-19 महामारी के बाद के दौर में क्षेत्रीय सिनेमा को देखने से वंचित हुए सिनेमा प्रेमियों को ये वेबसाइट उनकी पसंदीदा भारतीय भाषाओं में बनी फ़िल्में देखने का अवसर देगी. हमारी वेबसाइट बहुत मामूली शुल्क पर उन क्षेत्रीय फ़िल्मों को दिखाएगी जिन्हें विदेशों में आयोजित होने वाले फ़िल्म फे़स्टिवल्स में सम्मानित किया गया है.'

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दूसरे OTT प्लेटफ़ॉर्म की तरह यहां आपको मंथली सब्सक्रिप्शन लेने की ज़रूरत नहीं है. यहां आप जो फ़िल्म देखना चाहते हैं बस उसका ही शुल्क आपको चुकाना होगा. इस वेबसाइट पर आप एक फ़ीचर फ़िल्म 149 रुपये में, फ़ीचर डॉक्यूमेंट्री 99 रुपये में, 60 मिनट की डॉक्यूमेंट्री 79 रुपये में और शॉर्ट फ़िल्म 49 रुपये में देख सकते हैं.

Cinemapreneur a new OTT platform for indie films
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इस वेबसाइट को 1 अगस्त को 25 अलग-अलग फ़िल्मों के साथ लॉन्च किया गया था. इनमें एसिड हमले पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘ब्यूटी आफ़ लाईफ़’, मराठी फ़िल्म ‘कोंदण’, बांग्ला फ़िल्म ‘जान्हवी’, मलयालम फ़िल्म ‘मिसेज नांबियार’, न्यूयॉर्क इंडियन फ़िल्म फ़ेस्टिवल में पिछले सप्ताह बेहतरीन शॉर्ट फ़िल्म का अवार्ड जीतने वाली फ़िल्म ‘अरेबियन नाईट’ जैसी फ़िल्में शामिल हैं.

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इनका लक्ष्य इस साल के अंत तक 300 फ़िल्मों को यहां उपलब्ध कराना है. वेबसाइट के संस्थापकों का कहना है कि वो 6 महीने के अंदर ही इसका ऐप भी मार्केट में उतार देंगे. उनका कहना है कि इस मंच के ज़रिये वो नए फ़िल्मकारों को अपनी फ़िल्मों को दर्शकों तक पहुंचाने का मौक़ा दे रहे हैं, जिन्हें बड़े-बड़े OTT प्लेटफ़ॉर्म अपने यहां दिखाने से कतराते हैं. अब उन्हें मुख्य धारा के इन OTT प्लेटफ़ॉर्म पर निर्भर नहीं रहना होगा.

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