दारा सिंह वो नाम है जिसे हिंदी सिने जगत और रेसलिंग की दुनिया में बड़े ही अदब से लिया जाता है. रुस्तम-ए-हिंद उर्फ़ दारा सिंह ने हिंदी फ़िल्मों में शर्टलेस होने का ट्रेंड शुरू किया था. उनका असली नाम दारा सिंह रंधावा था. हिंदी सिने जगत में उन्होंने काफ़ी मान-सम्मान कमाया. एक दौर ऐसा भी था जब लोग उन्हें भगवान मानकर उनकी पूजा भी करने लगे थे.

चलिए आज दारा सिंह की लाइफ़ से जुड़े इस क़िस्से के बारे में भी आपको बता देते हैं. 

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ये क़िस्सा रामायण सीरियिल से जुड़ा है. बात उन दिनों की है जब रामानंद सागर को इस सीरियल के लिए एक्टर्स की तलाश थी. राम के किरदार के लिए वो अरुण गोविल को फ़ाइनल कर चुके थे. लेकिन राम भक्त हनुमान के लिए उन्हें एक गठीले कद वाले एक्टर की तलाश थी. उनकी ये तलाश दारा सिंह पर जाकर ख़त्म हुई, जो पहलवानी के साथ ही फ़िल्मों में अपना जलवा दिखा चुके थे.

रामायण सीरियल में उन्होंने हनुमान का रोल ऐसे निभाया कि लोग उन्हें राम भक्त हनुमान ही समझने लगे. वो इस शो के बाद इतने फ़ेमस हो गए थे कि लोग मंदिरों में हनुमान की मूर्ती और तस्वीरों के स्थान पर उनके ही पोस्टर और मूर्तियां लगाने लगे थे.   

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हैरानी की बात ये है कि जब उन्होंने ये रोल किया था तब वो 60 साल के थे. मगर कसी हुई कद काठी के कारण उन्हें देखकर कोई दारा सिंह की उम्र का अंदाज़ा भी नहीं लगा पाता था. 

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दारा सिंह ने अपने करियर में क़रीब 150 फ़िल्मों में काम किया था. हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में उन्हें काम पहलवानी की वजह से ही मिला था. रेसलिंग की दुनिया में उनका नाम बड़े ही अदब के साथ लिया जाता है. रुस्तम-ए-हिंद का ख़िताब जीतने वाले दारा सिंह ने अपने पहलवानी के करियर में एक भी मुकाबला नहीं हारा था. उन्होंने लगभग 500 मैच खेले थे.

2003-2009 तक सांसद भी रहे थे दारा सिंह. 12 जुलाई 2012 को दुनिया छोड़कर चले गए. लेकिन आज भी कुश्ती के खेल में उनके पैंतरें इस्तेमाल किए जाते हैं और सिने जगत में उनकी एक्टिंग की मिसाल दी जाती है.

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