बॉलीवुड में लव स्टोरी पर आधारित ढेरों फ़िल्में बनाई जा चुकी हैं. पर जिस तरह की रोमेंटिक फ़िल्म यश चोपड़ा बनाते थे वैसी शायद ही कोई बनाता हो. तभी तो उन्हें रोमेंटिक फ़िल्मों का जादूगर कहा जाता था. मगर अपने शुरुआती दौर में इन्होंने एक राजनीतिक फ़िल्म भी डायरेक्ट की थी, जिसकी स्क्रीनिंग पर इतना बवाल हुआ कि उसे बैन कर दिया गया था.

आज हम यश चोपड़ा की इसी फ़िल्म के बारे में आपको बताएंगे. साथ ही ये बताएंगे कि क्यों इस फ़िल्म को बैन कर दिया गया था.

Dharmputra
Source: letterboxd

इस फ़िल्म का नाम है धर्मपुत्र. यश चोपड़ा की ये फ़िल्म 1961 में रिलीज़ हुई थी. ये वो दौर था जब भारत विभाजन के समय लोगों को मिले ज़ख्म अभी ताज़ा थे. इस फ़िल्म की कहानी भी इंडिया-पाकिस्तान के बंटवारे पर आधारित थी जो आचार्य चतुर सेन द्वारा लिखे गए इसी नाम से लिखे गए उपन्यास से ली गई थी. इसे यश चोपड़ा के बड़े भाई बी.आर. चोपड़ा ने प्रोडयूस किया था.

Dharmputra
Source: facebook

इस मूवी में शशि कपूर ने एक हिंदु कट्टरवादी युवक की भूमिका निभाई थी. फ़िल्म में अशोक कुमार, निरुपा राय, मनमोहन कृष्ण, इन्द्रानी मुखर्जी, तबस्सुम, देवेन वर्मा, जगदीश राज, जैसे कलाकर भी थे. चूंकि फ़िल्म की कहानी बंटवारे पर आधारित थी इसलिए और जब ये रिलीज़ हुई तब तक लोग विभाजन के दौरान ख़ुद के साथ हुए अत्याचारों को भुला नहीं पाए थे.

Dharmputra
Source: facebook

इसलिए जब ये फ़िल्म थिएटर में लगती तो लोग उत्तेजित हो जाते(ख़ासकर दिल्ली में). वो सिनेमा हॉल में ही तरह-तरह के नारे लगाने लगते. जिससे माहौल ख़राब होने की स्थिति उत्पन्न हो जाती. इसलिए सरकार को मजबूरन इस पर कुछ समय के लिए बैन लगाना पड़ा. बाद में जब ये फ़िल्म रिलीज़ हुई तो बी.आर. चोपड़ा को बहुत घाटा हुआ.

yash-chopra
Source: medium

इससे सबक लेते हुए यश चोपड़ा ने भी राजनीतिक फ़िल्में बनाने से तौबा कर ली. यही नहीं उस दौर के कई निर्माता-निर्देशकों ने भी विभाजन पर फ़िल्में बनाने से ख़ुद को कुछ समय के लिए रोक लिया था. इस फ़िल्म से जुड़ा एक दिलचस्प फ़ैक्ट ये है कि पर्दे पर असफ़ल रहने के बावजूद इसने 9वें नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड में बेस्ट फ़ीचर फ़िल्म इन हिंदी का अवॉर्ड जीता था.ये क़िस्सा आप यहां पर पढ़ सकते हैं.

Entertainment के और आर्टिकल पढ़ने के लिये ScoopWhoop Hindi पर क्लिक करें.