Sushma Seth: 70, 80 और 90 के दशक में बॉलीवुड फ़िल्मों में कई ऐसी मांएं हुईं जिन्होंने हमारे दिल को छू लिया. इनमें दीना पाठक, निरुपा राय, अचला सचदेव और फ़रीदा जलाल शामिल हैं. इन्हीं में से एक हैं सुषमा सेठ, जिन्होंने देर से पर्दे पर दस्तक दी, लेकिन सबके रिकॉर्ड तोड़ दिए. सुषमा सेठ (Sushma Seth) ने सीधी-सादी मां की छवि को तोड़ते हुए बड़े पर्दे पर एक तेज़-तर्रार, अकड़ू, घमंडी और अमीर मां, दादी और नानी की भूमिका को निभाया. दर्शकों ने सुषमा सेठ की इस छवि को अपनाया भी और उनकी जमकर आलोचना की, लेकिन उन्हें नाकार नहीं. सुषमा सेठ रील लाइफ़ में बड़े-बड़े स्टार्स की दादी, मां और नानी बन चुकी हैं, जिनमें ऋषि कपूर, शाहरुख़ ख़ान, अक्षय कुमार, ऋतिक रोशन, अनिल कपूर, प्रीति ज़िंटा और फ़वाद ख़ान शामिल हैं. इनमें सबसे ज़्यादा सुषमा सेठ ऋषि कपूर की मां के रोल में नज़र आई हैं. 

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सुषमा सेठ (Sushma Seth) का जन्म सन् 1936 में दिल्ली में हुआ था और यहीं पर उनकी पढ़ाई-लिखाई भी हुई. इनके परिवार के सभी लोगों को कला में रुचि थी, इसलिए सुष्मा सेठ का भी ज़्यादा रुझान कला के प्रति था. हालांकि, सुषमा सेठ को हमलोग सीरियल तो जल्दी मिल गया था, लेकिन फ़िल्मी पर्दे तक पहुंचते-पहुंचते उन्हें 42 साल लग गए. 42 साल की उम्र में सुषमा सेठ को पहली फ़िल्म जुनून मिली, जो श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी थी. ये फ़िल्म इनके करियर के लिए शानदार ओपनिंग थी. इसके बाद सुषमा सेठ को कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा. जुनून के अलावा, सिलसिला, प्रेम रोग, तवायफ़, नागिन, निगाहें, दीवानाचांदनीधड़कन और कल हो न हो जैसी 80 और 90 के दशक की कई फ़िल्मों में शानदार अभिनय कर लोगों के घर में मां और दादी के रूप में जगह बना ली.

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हालांकि, बड़े पर्दे पर सुषमा सेठ को आने में समय लग गया, लेकिन छोटे पर्दे पर उन्होंने अपने पैर 'हमलोग' से ही जमा लिए थे. इस सीरियल में सुषमा सेठ ने इमरती देवी का किरदार निभाया था. इस किरदार से वो दादी के रूप में फ़ेमस हो गईं. ख़ुद उनको भी ये किरदार इतना पसंद आया था कि उन्होंने किरदार सुनते ही हां कर दी थी. कहानी में एक ऐसा मोड़ आया था, जब दादी का रोल ख़त्म हो रहा था और उन्हें मरना पड़ता. इसी के चलते उनके फ़ैंस ने दूरदर्शन को भर-भर के ख़त लिखे कि वो दादी को न मारें. इसी क़िस्से का ज़िक्र ख़ुद सुषमा सेठ ने कपिल शर्मा के शो 'द कपिल शर्मा शो' में किया था.

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पिछले साल, देश के सबसे पहले सीरियल ‘हम लोग’ की पूरी स्टारकास्ट कपिल के शो पर पहुंची थी, लेकिन सउषमा सेठ उम्र का ध्यान रखते हुए और कोरोना के चलते वीडियो कॉल से शामिल हुई थीं, तब उन्होंने बताया,

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हां, ये सही बात है कि दूरदर्शन पर उनके फ़ैेस के ख़त आते थे, जिनमें लिखा होता था कि दादी के किरदार को न मारें. ख़त पढ़ने के बाद शो के निर्माता ने दादी के किरदार को काफ़ी समय तक जारी रखा, लेकिन अंत में उन्हें दादी इमरती देवी को कहानी की डिमांड के वजह से कैंसर से मरते दिखाना ही पड़ा.
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आपको बता दें, सुषमा सेठ ने 100 से ज़्यादा फ़िल्में और 17 टीवी सीरियरल्स में काम किया है. सुषमा सेठ को लाइफ़टाइम अचीवमेंट, राष्ट्रीय प्रियदर्शनी अवार्ड, भारत निर्माण अवार्ड के अलावा फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड में भी नॉमिनेशन मिल चुका है. सुषमा सेठ एक अपर्णा नाम के एनजीओ से जुड़ी हैं, जिसके लिए वो अक्सर प्ले लिखती और डायरेक्ट करती रहती हैं.

TOI में छपी एक ख़बर के अनुसार, इन्होंने 2017 में सितारों के पास नाम का एक प्ले लिखा था, जो भारतीय अमरीकी अन्तरिक्ष यात्री कल्पना चावला की कहानी से प्रभावित था. इन्हें आख़िरी बार Zee 5 की शॉर्ट फ़िल्म 'मेहरम' में देखा गया था.

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हालांकि, अब सुषमा सेठ फ़िल्मों और टीवी सीरियल्स से दूरी बना चुकी हैं. मगर सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इतनी दिग्गज अभिनेत्री को आज तक न तो नेशनल अवॉर्ड से और न ही पद्म भूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है.