टीवी सीरियल क्वीन एकता कपूर ने 15 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने टीवी की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया, वो शायद ही उन्होंने भी कभी सोचा होगा. वो समय एकता कपूर का समय था और टीवी पर उनके प्रोड्यूस किये हुए सीरियल्स की भरमार थी.

Ekta Kapoor
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बालाजी टेलीफ़िल्म के अंतर्गत एकता ने 'इतिहास', 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी', 'कहानी घर घर की', 'कहीं किसी रोज़', 'हम पांच', 'कसौटी ज़िंदगी की' और 'कसम से' जैसे कई सुपरहिट धारावाहिक बनाये. एकता कपूर के ये सीरियल्स पारिवारिक और युवाओं से जुड़े हुए होते थे. इसलिये इन्हें अच्छी ख़ासी टीआरपी भी मिलती थी. एकता कपूर अपने सीरियल को बेहतर बनाने के लिये उसमें वो सब रखती, जिसे दर्शक देखना पसंद करते.

Kahaani Ghar Ghar Ki
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इन सीरियल्स के हर एपिसोड की ख़ास बात ये होती थी कि इन्हें सस्पेंस के साथ ख़त्म किया जाता था. इसलिये अगले दिन दर्शकों के मन में उन्हें देखने की चाह बढ़ जाती थी. इसके अलावा एकता कपूर के सीरियल्स के कई स्टार्स को बड़ी पहचान भी मिली और वो घर-घर अपनी ख़ास जगह बनाने में कामयाब रहे. इस दौर में एकता कपूर एक के बाद एक सीरियल्स बनाती गईं. वो एक ऐसा डॉट था, जब टीवी पर ज़्यादातर उनके ही सीरियल्स आते थे. फिर चाहे वो 'स्टार प्लस' हो, 'सोनी टीवी' हो या 'जीटीवी' ही क्यों न हो. कभी-कभी तो ऐसा भी लगता था जैसे अब दर्शक एकता के धारावाहिक के अलावा कुछ और देखना ही नहीं चाहते.

Kahin kisi roz
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पर ऐसा नहीं हुआ और समय के साथ लोगों का ध्यान खींचने के लिये कुछ नये सीरियल्स आये. 'खिचड़ी', 'तू-तू मैं-मैं', 'ऑफ़िस-ऑफ़िस', 'जीमंत्री' ' और 'साराभाई V/s साराभाई' नामक कई ऐसे धारावाहिक आये, जिसे दर्शकों ने ख़ूब सराहा. इन धारावाहिकों में कभी दर्शकों को सास-बहू की 'तू-तू मैं-मैं' हंसाती, तो कभी दर्शक 'ऑफ़िस-ऑफ़िस' के मुसद्दीलाल को देख कर ख़ुश हो जाते. इसके बाद धीरे-धीरे टीवी पर एकता कपूर के सीरियल्स की लिस्ट थोड़ी छोटी हो गई. हांलाकि, टीवी पर एकता का जलवा अब भी कायम है, पर बस सीरियल्स थोड़े कम हो गये हैं.

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इस दौरान टीवी पर 'सम्राट अशोक' और 'महाराणा प्रताप' जैसे ऐतिहासिक सीरियल्स भी आये, जिससे लोगों को देश के इतिहास की जानकारी मिलने लगी. कॉमेडी और ऐतिहासिक सीरियल्स की कहानियों ने लोगों को देखने के लिये कुछ नया दिया. दर्शकों ने भी इन धारावाहिकों को Accept किया और देखते-देखते ही ऐसी कहानियों की डिमांड बढ़ने लगी.

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