सालों से बॉलीवुड फ़िल्मों के द्वारा समाज के हर तबक़े को दिखाने की कोशिशें की गई हैं. चाहे वो भ्रष्टाचार से परेशान कोई पुलिसवाला हो या ज़िन्दगी से जूझता आम आदमी हो. फ़िल्मों के द्वारा इनकी कहानी दिखाने की पूरी कोशिश की गई है.

एक समय था जब हिन्दी फ़िल्मों में महिलाओं को अबला नारी की तरह दिखाया जाता था, उसे हमेशा किसी हीरो पर निर्भर दिखाया जाता था. ये छवि पूरी तरह नहीं बदली है पर धीरे-धीरे बदल रही है. 

आप बॉलीवुड के फ़ैन हों या न हों पर महिलाओं पर आधारित ये 15 फ़िल्में आपको ज़रूर देखनी चाहिए-

1.मडर इंडिया, 1957          

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 इस क्लासिक ने नरगिस दत्त को हिंदी भारतीय सिनेमा में अमर कर दिया. नरगिस ने राधा का किरदार निभाया है जो अपने दम पर अपने दो बेटों को बड़ा करती है. 

2. भूमिका, 1977

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एक अभिनेत्री को कितनी मुश्किलों का और किन हालातों का सामना करना पड़ता है, श्याम बेनेगल ने इस फ़िल्म के ज़रिये दिखाया है. कहते हैं कि ये कहानी किसी मराठी अभिनेत्री की थी. 

3. अर्थ, 1982

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इस फ़िल्म में शबाना आज़मी ने एक पत्नी का किरदार निभाया है जिसे उसका पति दूसरी महिला के लिए छोड़ देता है. महेश भट्ट निर्देशित इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि किस तरह से एक महिला अपनी ज़िन्दगी की डोर अपने हाथ में लेती है और आत्मनिर्भर बनती है.

 4. मिर्च मसाला, 1987

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एक बेहतरीन कास्ट और एक अति बेहतरीन कहानी. केतन मेहता की ये फ़िल्म गांव की महिलाओं की कहानी है. स्मिता पाटिल ख़ुद को सुबेदार (नसीरुद्दीन शाह) की नज़रों से बचाने के लिए लड़ती है. इस फ़िल्म में महिलाओं के उठ खड़े होने की कई कहानियां हैं.

5. बैंडित क्वीन, 1994  

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ये फ़िल्म प्रतिबंधित थी. फूलन देवी के जीवन पर आधारित है ये फ़िल्म. ज़बरदस्त कास्ट, बहुत ही स्ट्रॉन्ग एक्टिंग. इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि किस तरह एक महिला पूरे समाज से लड़ती और अपने साथ हुए अन्याय का मुंहतोड़ जवाब देती है. फ़िल्म के कुछ सीन आपको विचलित कर सकते हैं.

6. मृत्युदंड. 1997 

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इस फ़िल्म में माधुरी दीक्षित ने केतकी का किरदार निभाया है. इस फ़िल्म में केतकी पुरुषों के वर्चस्व को चुनौति देती है, अन्याय के ख़िलाफ़ और महिलाओं के हक़ के लिए लड़ती है.

7. अस्तित्व, 2000 

समाज में पुरुषों के वर्चस्व, पत्नियों के साथ दुर्व्यवहार और विवाह से बाहर के संबंधों को दिखाती है ये फ़िल्म. इस फ़िल्म में अभिनेत्रियों हिम्मत दिखाती हैं और अंत में अपनी ज़िन्दगी अपनी शर्तों पर जीती हैं.

8. चांदनी बार, 2001 

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मुंबई की कई महिलाओं की ज़िन्दगी में फैले अंधेरे में रौशनी लाती है ये फ़िल्म. फ़िल्म में तब्बू ने मुमताज़ का किरदार निभाया है जो अपने बच्चों को एक अच्छी ज़िन्दगी देना चाहती है.

9. लज्जा, 2001 

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इस फ़िल्म में कहानियां हैं 4 महिलाओं (रेखा, माधुरी दीक्षित, मनीषा कोयराला और महिमा चौधरी) की. समाज की कई कुरीतियों, प्रथाओं पर सवाल उठाती है ये फ़िल्म.

10. डोर, 2006 

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नागेश कुकनूर की डोर है दो महिलाओं (आयेशा टाकिया, गुल पनाग) की कहानी. दोनों महिलाओं के साथ अनहोनी होती है पर इनकी कहानयां आपको बांध लेंगी.

11. इंग्लिश विंग्लिश, 2012 

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श्रीदेवी ने इस फ़िल्म में शशि, एक होममेकर का रोल अदा किया है. ये फ़िल्म एक ख़ूबसूरत सफ़र है एक लड्डू बनाने वाली होममेकर और आत्मविश्वास के बीच का. शशि के पति और बच्चे उसके अंग्रेज़ी न जानने का मज़ाक उड़ाते हैं और शशि मैनहैटन में जाकर अंग्रेज़ी सीखाकर अपने परिवार के सामने अपना पॉइंट प्रूव करती है.

12.कहानी, 2012 

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ये फ़िल्म अल्टीमेट 'कहानी' है. एक से एक ट्वीस्ट, दमदार अभिनय, ज़बरदस्त लोकेशन, उम्दा स्क्रीप्ट. सुजॉय घोष ने फ़िल्म में बारीकी से काम किया है. ये कहानी है एक महिला, विद्या की जो अपनी पति की मौत का बदला लेती है और आतंकवादी को सज़ा देती है.

13. क्वीन, 2014 

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क्वीन कहानी है रानी की. रानी का किरदार निभाया है कंगना रनौत ने जो अपने हनीमून पर अकेले जाती है और हर वो काम करती है जिसके लिए उसके मंगेतर ने उसे मना किया था.

14. पार्च्ड, 2016 

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ये बोल्ड फ़िल्म है 4 महिलाओं की जिन्होंने सपने देखने की हिम्मत की. राधिका आप्टे, सुरवीन चावला, तनिष्ठा चैटर्जी और लेहर ख़ान का कहानी है राजस्थान के एक गांव की. इन चारों महिलाओं के अपने-अपने संघर्ष हैं. इस फ़िल्म में आपको दर्द महसूस होगा, ख़ुशी होगी और मिलेगी ढेर सारी पॉज़िटिविटी.

 15. लिपस्टिक अंडर माई बुरक़ा, 2017 

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इस फ़िल्म को रिलीज़ होने के लिए काफ़ी जद्दोजहद करनी पड़ी. कोनकना शर्मा, अहान कुमरा, रत्ना पाठक शाह और Plabita Borthakur की कहानी ऐसी है कि बहुत से लोग असहज होंगे! ये महिलाएं अपने 'लिपस्टिक वाले सपनों' के लिए जीती हैं. ये फ़िल्म कई स्टीरियोटाइप को तोड़ती है.

 जल्द से जल्द देख डालिए.