Famous Monologues In Bollywood Movies : ड्रामा, डांस, म्यूज़िक, इमोशन्स, एक्शन... ये सब अगर एक जगह पर देखना है, तो बॉलीवुड से बेहतरीन जगह कोई नहीं. हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री आपको ये सारा मसाला कूट-कूट कर परोसती है. और इन सभी सीन्स को दमदार बनाते हैं पावर पैक्ट डायलॉग्स. कुछ तो इतने पॉपुलर हुए कि उन्हें हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी जब-तब इस्तेमाल करते रहते हैं. इनमें से कुछ ऐसे मोनोलॉग्स (Monologues) हैं, जिन्हें शायद जब तक बॉलीवुड है, तब तक लोग दोहराते ही रहेंगे. 

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आज हम ऐसे ज़बरदस्त बॉलीवुड मोनलॉग्स की लिस्ट लेकर आए हैं. तो देखिए और मौज काटिए. Famous Monologues In Bollywood Movies -

1. 70 मिनट है तुम्हारे पास - शाहरुख ख़ान

शाहरुख ख़ान के तो हर डायलॉग हिट रहते हैं. मगर 'चक दे इंडिया' फ़िल्म में उनका '70 मिनट' वाला मोनोलॉग अलग ही लेवल का था. इस पूरे सीन के दौरान न तो कैमरा शाहरुख़ से हटता है और न ही दर्शकों की निगाहें. आज भी हर शख़्स जब कुछ बड़ा करने जा रहा होता है, तो लोग मज़ाक में भी यही डायलॉग दोहराते हैं.

2. तारीख पे तारीख- सनी देओल

सनी देओल अपने पावर पैक्ट डायलॉग्स के लिए ही जाने जाते हैं. उनका ढाई किलो का हाथ हो या फिर बलवन्त राय के कुत्ते बोलकर चीखना, हर डायलॉग दशर्कों को दिल जीत लेता है. मगर, जो पॉपुलरटी 'दामिनी' फ़िल्म में बोल गए 'तारीख पे तारीख' मोनोलॉग को मिली, उसकी बात ही निराली है. (Famous Monologues In Bollywood Movies)

3. इंग्लिश इज़ अ वेरी फ़नी लैंग्वेज - अमिताभ बच्चन

आई कैन टॉक इंग्लिश, आई कैन वॉक इंग्लिश, आई कैन लॉफ़ इंग्लिश... नमक हलाल फ़िल्म का ये मोनलॉग सुनने के लोग ये समझ गए थे कि इंग्लिश फ़नी हो न हो, मगर अमिताभ बच्चन बहुत फ़नी एक्टर हैं. क्या ग़ज़ब का मोनोलॉग था. वाक़ई ये डायलॉग बॉलीवुड इतिहास के सबसे बेहतरीन मोनलॉग्स में से एक है.

4. आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने - नाना पाटेकर 

अब मुझे लटका देंगे. ज़ुबान ऐसे बाहर आएगी, आंखें बाहर आएंगी... यार क्या पावर फ़ुल मोनोलॉग था. क्रांतिवीर फ़िल्म में नाना पाटेकर के इस डायलॉग को आज भी सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. 

5. नो मीन्स नो - अमिताभ बच्चन

एक ज़रूरी और शायद बहुत पहले कह दी जाने वाली बात थी. मगर देर से आए, दुरूस्त आए. पिंक मूवी में अमिताभ ने जिस तरीके से एक महिला के न कहने के अधिकार को बयां किया, उसकी जितनी तारीफ़ की जाए कम है. इस मोनलॉग की ख़ासियत ये थी कि बिना कोई ड्रामा क्रिएट किए हुए इसे बिल्कुल सीधा और स्पष्ट बोला गया. अमिताभ के भाव आप तक पूरी तरह पहुंचते हैं.

6. अपुन सिर्फ़ काले पे चलता है, सफ़ेद पे पैर रखा मतलब आउट - नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी

रमन राघव - 2.O में नवाज़ जब अपना ये मोनोलॉग बोलते हैं, तब उनका चेहरा देखने लायक होता है. हर एक्सप्रेशन एकदम क़ातिल. मतलब नवाज़ को सुनते-सुनते एक अजीब सा डर महसूस होने लगता है. वाक़ई, इस सीन में उन्होंने जिस तरह से अपने डायलॉग को डिलिवर किया है, उसकी जितनी तारीफ़ की जाए कम है. 

7. प्रॉब्लम ये है कि वो लड़की है - कार्तिक आर्यन

देखो आम लोगों में मोनोलॉग शब्द फ़ेमस होने के पीछे वजह ही 'प्यार का पंचनामा' फ़िल्म का ये सीन है. इसमें रज्जो यानि कार्तिक आर्यन ज़बरदस्त भड़ास निकालते हैं. मतलब, क़रीब 5 मिनट तक लगातार ये बंदा बड़बड़ात रहता है. वास्तव में इसी मोनोलॉग ने कार्तिक आर्यन का बॉलीवुड करियर सेट कर दिया था.

8. क्योंकि आज मैं रूकने वाली हूं नहीं - विद्या बालन

'सिल्क स्मिता' की लाइफ़ पर बेस्ड इस फ़िल्म में विद्या बालन ने ग़जब का काम किया है. फ़िल्म में एक सीन है, जहां 
नसीरुद्दीन शाह का क़िरदार उन्हें डर्टी सीक्रेट का टाइटल देता है. उसके बाद विद्या औरतों पर समाज द्वारा अलग-अलग तरह के ठप्पे लगाने की आदत पर ज़ोरदार तमाचा जड़ती हैं. हाथ से नहीं, अपनी बातों से. अपने 2 मिनट के मोनोलॉग में वो समाज की रूढ़िवादी सोच को उधेड़ कर रख देती हैं.

9. आज ख़ुश तो बहुत होगे तुम - अमिताभ बच्चन

भगवान से टकरा जाने की हिम्मत सिर्फ़ अमिताभ बच्चन के बस की ही बात है. दीवार फ़िल्म में उन्होंने ऐसा ही किया. जिस तरह उन्होंने डॉयलाग्स बोले, वो आज भी लोगों के ज़ेहन में है. सच कहें, तो भगवान की तस्वीर देखते ही, सबसे पहले यही लाइन मन में आ जाती है. फिर मन ही मन सॉरी बोलते घूमते हैं. Famous Monologues In Bollywood Movies

10. तुम मुझे अच्छे-बुरे का पाठ मत सिखाओ, तुम्हीर औक़ात नहीं है - 

ये कोर्ट रूम ड्रामा फ़िल्म वाकई क़माल थी और के.के. मेनन का क़िरादर पूरी फ़िल्म की जान था. मेनन ने एक आर्मी ऑफ़िसर ब्रिगेडियर रुद्र प्रताप सिंह का क़िरदार निभाया था. एक ऐसा क़िरदार जिसका मानना है कि आम लोग सुरक्षित सिर्फ़ इसलिए हैं क्योंकि सेना बॉर्डर पर खड़ी है. हालांकि, उसकी इस सोच में परेशानी ये है कि वो एक ख़ास समुदाय से बेइंतिहा नफ़रत करने लगता है. वाकई में जिस तरह इस नफ़रत को मेनन ने पर्दे पर दर्शाया है, वो रोंगटे खड़े करने वाला है. कोर्ट रूम में उनका मोनोलॉग इस फ़िल्म की सबसे बड़ी याद है. मेनन क़रीब 5 मिनट तक ग़ुस्से में बोलते जाते हैं. मैं शर्त के साथ कह सकता हूं, उस दौरान उनसे नज़रे हटा पाना नामुमक़िन है.

इनमें से आपका फ़ेवरेट मोनलॉग कौन सा है? Famous Monologues In Bollywood Movies