लाइट बंद करके, रात को दोस्तों के साथ हॉरर मूवीज़ तो ख़ूब देखी होंगी और सबसे ज़्यादा डरने वाले दोस्त को कई दिनों तक ख़ूब छकाया भी होगा. अब उसका फ़ायदा सामने आ रहा है.

मनोवैज्ञानिकों की एक टीम की एक नई स्टडी सामने आयी है जिसमें कहा गया है एक ख़ास तरह की फ़िल्में और टीवी सीरीज़ देखने वाले लोग कोरोना वायरस महामारी का बेहतर ढंग से सामना कर सकते हैं बजाय आम लोगों के.

उन्होंने पाया कि जिन लोगों ने भयंकर और कठिन परिस्थितियों को किसी फिल्मों के ज़रिये से देखा है वो कोरोना की परिस्थितियों को अच्छी तरह झेल सकते हैं.

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रिसर्च करने वाले मनोवैज्ञानिकों ने 310 लोगों की फ़िल्मों की पसंद को देखा और उनसे सवाल किया. इस दौरान उन्होंने पाया कि जिन लोगों को डरावनी फ़िल्में पसंद आती हैं उनमें COVID-19 जैसी महामारी के साथ मनोवैज्ञानिक रूप से निपटने की क्षमता थी. रिसर्च से ये बात सामने आयी कि डरावनी फ़िल्में पसंद करने वाले लोग कठिनाइयों से जल्दी उबरने की क्षमता रखते हैं. साथ ही एलियन-अटैक, महामारी की फ़िल्में, ज़ोंबी की फ़िल्में देखने वाले लोग कठिना परिस्थिति से जल्दी उबरने के साथ-साथ बेहतर तैयारी भी देखने को मिली.

रिसर्चर्स ने बताया कि ऐसा नहीं की कोरोना महामारी से ऐसी फ़िल्में देखने वालों को फ़र्क़ नहीं पड़ेगा मगर आप लोगों की तुलना से उन्हें कम संघर्ष करना पड़ेगा यानी इन लोगों पर मनोवैज्ञानिक दबाव उतना नहीं पड़ेगा.

लोगों से किये गए इन सवालों में मनोवैज्ञानिकों की टीम ने ऐसे सवाल रखे जिनसे लोगों की फ़िल्मों की रूचि को जानकर उनकी महामारी और बचाव को लेकर जिज्ञासा को परखा जा सके. इसको नापने के लिए Pandemic Psychological Resilience Scale (PPRS) का इस्तेमाल किया गया.

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टीम के एक मेंबर के अनुसार ,"अगर आपने ऐसी फ़िल्में देखी हैं जिसमें महामारी फैली हुई है, बाहर से हमला हो गया है या ऐसी ही किसी बद से बद्तर हालातों का सामना करते हुए किसी को इन हालातों से बाहर आते हुए सैकड़ों बार देखा है तो आप यकीनन उन लोगों से बेहतर तैयार रहेंगे जिन्होंने कभी ऐसी फ़िल्में नहीं देखीं."

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आपने कौन कौन सी हॉरर मूवीज़ देख डाली हैं ज़रा हमें भी बताओ.