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Happy Birthday Jeetendra: हर कामयाब इंसान कभी न कभी मुश्किल भरे दिनों से गुजरता है. यूं कह लीजिये कि मुश्किल हालत ही इंसान को कामयाब बनाते हैं. सफ़लता की मिसाल कायम करने वाले इन्हीं लोगों में से एक सदाबहार अभिनेता जितेंद्र भी हैं. 60 से लेकर 90 के दशक तक हिंदी सिनेमा (Hindi Film Industry) में जितेंद्र का चॉर्म सिर चढ़ कर बोलता था. अब तक के फ़िल्मी सफ़र के दौरान वो क़रीब 200 फ़िल्मों में काम कर चुके हैं, जिसमें कम से कम 130 फ़िल्में सुपरहिट थीं.  

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जितेंद्र की अदाकारी और स्टाइल ने लोगों को उनका दीवाना बना दिया था. अब भी बॉलीवुड में उनका बोलबाला है और हर कोई उन्हें काफ़ी सम्मान भी देता है. हांलाकि, ये प्यार, सम्मान और शोहरत जितेंद्र साहब को आसानी से नहीं मिली है. वो उन कलाकारों में से हैं, जिन्होंने Bollywood में काफ़ी नीचे स्तर से शुरुआत की थी और मेहनत से आगे निकलते चले गये. 

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दूर से देखने पर हर किसी की लाइफ़ अच्छी लगती है, लेकिन लोग अक़सर ही उसके पीछे छिपे संघर्ष को देखना भूल जाते हैं. कुछ ऐसी ही मुश्किलों भरी दांस्ता जितेंद्र साहब की भी है.  

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क़िस्सा: जब एक रोल के लिये जितेंद्र ने दिये थे 30 टेक

जो लोग नहीं जानते हैं उन्हें बता दें कि जितेंद्र का असली नाम रवि कपूर हैं और उनके पिता फ़िल्ममेकर्स को ज्वैलरी सप्लाई करते थे. पर उम्र के साथ उनके पिता का स्वास्थ्य गड़बड़ाता गया. इसके बाद घर चलाने के लिये उन्होंने बॉलीवुड में काम देखना शुरू किया और इसी सिलसिले में उन्होंने फ़िल्म निर्माता शांताराम जी से मुलाक़ात की.

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जितेंद्र को देख कर पहले तो शांताराम ने कोई भी रोल देने से इंकार कर दिया, लेकिन कुछ दिन फिर ख़ुद उन्हें कॉल करके बुलाया. फ़िल्म के लिये उनका स्क्रीन टेस्ट लिया गया, लेकिन 30 टेक लेने के बावजूद उनसे एक डायलॉग ढंग से नहीं बोला गया. ख़ैर, फिर भी उन्हें ‘गीत गाया पत्थरों ने’ के लिये सेलेक्ट कर लिया गया. बस इस शुरूआत के बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और आज वो बॉलीवुड (Bollywood)के सदाबहार अभिनेताओं में से एक हैं.  

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कहते हैं कि जितेंद्र साहब ने अपनी ज़िंदगी के 20 साल चॉल में रह कर गुज़ारे हैं और फ़िल्म में रोल पाने के लिये 5 साल तक संघर्ष किया. ये शोहरत और दौलत उन्हीं कठिन दिनों का फल है. जितेंद्र साहब की लाइफ़ हम सभी लोगों के लिये एक प्रेरणा है.